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मनीष गुप्ता हत्याकांड: होटल के कमरे में मिले खून के धब्बे, क्राइम सीन दोहराया, सीसीटीवी फुटेज खंगाले

Sun, 03 Oct 2021 09:18 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर/गोरखपुर
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इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह व मनीष की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
एसआईटी ने शनिवार शाम गोरखपुर पहुंचकर मनीष गुप्ता हत्याकांड की तफ्तीश शुरू कर दी। एडिशनल पुलिस कमिश्नर क्राइम के नेतृत्व में गठित टीम ने सात घंटे तक होटल कृष्णा पैलेस में जांच की। बेंजाडीन टेस्ट कराया तो होटल के कमरा नंबर 512 (इसी में मनीष ठहरे थे) में खून धब्बे मिले। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य संकलन किए हैं। क्राइम सीन दोहराया गया, जिससे अफसरों ने घटना को समझा और सुबूतों को जुटाया। अब तक की गोरखपुर पुलिस की जांच की भी समीक्षा की। उसके अहम तथ्य अपनी जांच में शामिल किया। कानपुर एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) ने शनिवार शाम करीब साढ़े तीन बजे डीआईजी गोरखपुर जे रविंद्र गौड़ से मुलाकात की। एसआईटी अध्यक्ष कानपुर के एडिशनल सीपी क्राइम आनंद प्रकाश तिवारी, एडीसीपी पश्चिम बृजेश कुमार श्रीवास्तव, इंस्पेक्टर छत्रपाल सिंह और पांच दरोगा तकरीबन चार बजे कैंट पुलिस के साथ होटल कृष्णा पैलेस पहुंचे।

 
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मनीष हत्याकांड में जांच करने गोरखपुर पहुंची एसआईटी कानपुर। - फोटो : अमर उजाला।
जांच की शुरुआत कमरा नंबर 512 से की। गोरखपुर फोरेंसिक टीम से बातचीत कर जानकारी हासिल करने के बाद कानपुर के फोरेंसिक एक्सपर्ट ने सीन री-क्रिएशन का काम किया। इसकी मदद से टीम ने यह जानने की कोशिश की कि पुलिस वाले कैसे आए होंगे? कैसे कमरा खुलवाया होगा, कमरे के अंदर कौन कैसे था और फिर क्या हुआ? करीब तीन घंटे तक सीन को रीक्रिएट कर एसआईटी ने बारीकी से इसे समझने की कोशिश की कि आखिर उस रात कब, कैसे और क्या हुआ?



फिलहाल टीम की ओर से यही जवाब दिया गया है कि इस मामले की जांच जारी है। जांच के दौरान सीओ कैंट श्यामदेव भी एसआईटी कानपुर के साथ मौजूद रहे। मुख्य विवेचक एडीसीपी पश्चिम बृजेश श्रीवास्तव हैं। पर्यवेक्षक डीसीपी साउथ कानपुर रवीना त्यागी हैं। लखनऊ में विभागीय कार्यक्रम में शिरकत करने की वजह से डीसीपी अभी टीम के साथ गोरखपुर नहीं पहुंचीं। वह जल्द ही गोरखपुर रवाना होंगी।

 
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मनीष हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला।
कर्मचारियों से पूछताछ कर दर्ज किए बयान
एसआईटी ने घटना की रात मौजूद रहे होटल के सभी कर्मचारियों को बुलाकर उनसे पूछताछ की। टीम ने बारीकी से यह समझने की कोशिश की कि 27 सितंबर की रात में रामगढ़ताल पुलिस कितने बजे जांच को पहुंची थी, कितने पुलिस वाले कमरे में दाखिल हुए थे, पुलिस की मौजूदगी कितने देर तक रही, कमरे में कौन-कौन गया था, मनीष के दोस्तों से इंस्पेक्टर व दारोगा की क्या बात हुई? पुलिस इस बात को समझने पर जोर ज्यादा दे रही है कि उस रात अगर मारपीट हुई तो वह कौन सी बात थी कि इस तरह के हालात बन गए थे।

 

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मनीष हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला।
रामगढ़ताल पुलिस को जांच से दूर रखा
एसआईटी के साथ कैंट पुलिस को भेजा गया था, जबकि रामगढ़ताल पुलिस को जांच से दूर रखा गया है। यहां तक कि बाहर की व्यवस्था भी कैंट पुलिस के हवाले रही। सिर्फ चंद मिनट के लिए रामगढ़ताल थाने के एक दरोगा को सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर लेकर बुलाया गया था। उससे यह हासिल करने के बाद लौटा दिया गया।

पत्नी की मांग पर कानपुर को सौंपी गई जांच
मनीष की पत्नी मीनाक्षी ने गोरखपुर पुलिस पर सवाल खड़ा करते हुए कानपुर पुलिस से जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री के आदेश पर जांच को कानपुर के हवाले कर दिया गया। हालांकि, गोरखपुर एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने भी केस को थाने से हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंप दिया था। उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार स्पेशल टीमें भी गठित कर दी थीं।

 
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मनीष गुप्ता हत्याकांड: मां मीनाक्षी के साथ अभिराज - फोटो : amar ujala
औपचारिकता पूरी कर कानपुर को सौंप दी विवेचना
रामगढ़ताल थाने में दर्ज हत्या के केस को एसएसपी गोरखपुर ने क्राइम ब्रांच को सौंप दिया था। अब केस कानपुर ट्रांसफर होने के बाद औपचारिकता पूरी कर विवेचना एसआईटी के हवाले कर दी गई है। एसआईटी ने गोरखपुर पुलिस द्वारा अब तक की गई जांच के बारे में पूरी जानकारी ली है। उसकी मदद भी ली जा रही है। 

विवेचक दिलीप पांडेय से ली गई जानकारी
एसआईटी ने अब तक इस केस की विवेचना कर रहे क्राइम ब्रांच गोरखपुर के इंस्पेक्टर दिलीप पांडेय से भी जानकारी हासिल की है। अब तक जांच में मिले तथ्य और अन्य साक्ष्य उनसे लिए गए हैं। गोरखपुर फोरेंसिक टीम ने भी अपनी जांच रिपोर्ट एसआईटी से साझा की है।  
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