बुंदेलों की आन-बान-शान के प्रतीक ऐतिहासिक कजली मेले का मंगलवार को भव्य शोभायात्रा के साथ आगाज हो गया। हाथी, घोड़े व ऊंट के साथ आधा सैकड़ा से अधिक झांकियों ने लोगों का मन मोहा। हर सड़क, गली और सार्वजनिक स्थल पर लोगों की भीड़ नजर आई। शोभायात्रा के साथ कीरत सागर तट पर सात दिन तक मेला लगेगा। दिन व रात के समय बुंदेली लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम भी शुरू हो गए।
शहर के हवेली दरवाजा स्थित शहीद स्थल से दोपहर साढ़े तीन बजे कजली मेले की 842वीं वर्षगांठ पर भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ सदर विधायक राकेश गोस्वामी, पूर्व सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर, डीएम मृदुल चौधरी, एसपी अपर्णा गुप्ता व पालिकाध्यक्ष संतोष चौरसिया ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। शोभायात्रा में हाथी पर सवार आल्हा, घोड़े पर सवार ऊदल और ब्रह्मा के अलावा अन्य वीर योद्धाओं के प्रतिरूप चलते रहे। जगह-जगह अश्व नृत्य के साथ कलाकारों ने विभिन्न करतब दिखाकर लोगों का दिल जीता। सबसे आगे सिर पर कलश धारण कर महिलाएं चलती रहीं।
विज्ञापन
2 of 5
ऐतिहासिक कजली मेला
- फोटो : अमर उजाला
शोभायात्रा में आल्हा-ऊदल के अलावा राजकुमारी चंद्रावलि का डोला, सखियों के साथ बाग में झूला झूलतीं रानी मछला, दक्षराज-बच्छराज, नशा मुक्ति, वीरांगना रानी दुर्गावती आदि की झांकी शामिल रहीं। मथुरा वृंदावन से आए कलाकारों ने राधा-कृष्ण व शिव-पार्वती की वेशभूषा में शानदार झांकियों से सभी का मन मोहा। रामदरबार की झांकी आकर्षण का केंद्र रहीं। शिव तांडव करते भगवान शिव व अन्य कलाकारों ने सभी का मन मोह लिया।
शोभायात्रा हवेली दरवाजा से शुरु होकर तहसील चौराहा, मुख्य बाजार, ऊदल चौक, सुभाष चौक, खोयामंडी होते हुए कीरत सागर तट पहुंची। जहां भुजरियों का विसर्जन किया गया। शोभायात्रा और मेलास्थल पर हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ जुटी रही। शोभायात्रा के साथ सात दिन तक कीरत सागर तट पर बने आल्हा मंच व सांस्कृतिक मंच पर रंगारंग कार्यक्रम शुरू हो गए। शोभायात्रा के शुभारंभ पर अपर एसपी सत्यम, सीओ दीपक दुबे, हर्षिता गंगवार, रविकांत गोंड, समाजसेवी शिवकुमार गोस्वामी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
3 of 5
ऐतिहासिक कजली मेला
- फोटो : अमर उजाला
बढ़ता गया मेला प्रेमियों का उत्साह
कजली मेले की शोभायात्रा में तेज धूप व भीषण उमस भी लोगों का उत्साह नहीं डिगा सकी। जैसे-जैसे शाम ढलती गई मेला प्रेमियों का उत्साह बढ़ता गया। युवाओं से लेकर महिलाओं, बच्चों और वृद्धों में भी जोश नजर आया। शोभायात्रा मार्ग के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। दूर-दराज व ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों ने दोपहर 12 बजे से ही शोभायात्रा मार्ग में अपनी जगह बना ली। भीड़ अधिक होने से अभिभावक अपने छोटे-छोटे बच्चों को कंधे पर बैठाकर शोभायात्रा दिखाते नजर आए।
छतों व दुकानों पर चढ़कर देखी शाेभायात्रा
शोभायात्रा मार्ग पर स्थित दुकानों व मकानों की छतों के अलावा दीवारों पर चढ़कर लोगों ने शोभायात्रा का आनंद लिया। घंटों पहले से ही लोग और रिश्तेदार छत पर चढ़कर शोभायात्रा निकलने का इंतजार करते रहे। छतों पर भीड़ अधिक होने से किसी हादसे की आशंका को लेकर पुलिस उन्हें पीछे की ओर रहने के निर्देश देती रही ताकि, कोई अनहोनी न हो सके।
4 of 5
ऐतिहासिक कजली मेला
- फोटो : अमर उजाला
चप्पे-चप्पे पर रहा पुलिस का पहरा
कजली मेले में भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। चप्पे-चप्पे पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। शोभायात्रा के अलावा हर चौराहे पर पुलिस तैनात रही। एसपी अपर्णा गुप्ता स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले रहीं। आधा किमी दूर से ही शहर में वाहनों को प्रवेश नहीं दिया गया। इससे जाम की स्थिति नहीं बनी।
हर पल को कैमरे में कैद करते दिखे मेला प्रेमी
शोभायात्रा के दौरान मेला प्रेमियों में सेल्फी खींचने और वीडियो बनाने का क्रेज दिखा। हर कोई हाथ में मोबाइल लेकर शोभायात्रा का वीडियो बनाकर अपने फेसबुक व स्टेटस पर लगाते नजर आए। मेले को लेकर पुलिस ने भी चौकसी बरती। मेले की हर गतिविधि को कैद करने के लिए जगह-जगह तैनात पुलिस कर्मचारी वीडियोग्राफी करते रहे। इसके अलावा मेले में 42 सीसीटीवी कैमरे से निगरानी रखी गई।
मेला प्रेमियों का जनसैलाब उमड़ा
मेला स्थल कीरत सागर तट पर मेला प्रेमियों का जनसैलाब उमड़ा। मेले में महोबा के अलावा हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, झांसी, ललितपुर, मऊरानीपुर, राठ, मध्यप्रदेश के छतरपुर, सागर, पन्ना, टीकमगढ़, दमोह, सतना आदि से सैकड़ों की संख्या में मेला प्रेमी आए। जिन्होंने कीरत सागर तट पर चल रहे दो सांस्कृतिक मंचों में कार्यक्रमों का आनंद लिया।
गौरवशाली अतीत को संजोए है कजली मेला
बारहवीं शताब्दी के चंदेल साम्राज्य के गौरवशाली अतीत की स्मृतियों को संजोए ऐतिहासिक कजली मेला बुंदेलों की आन-बान-शान का प्रतीक है। सन् 1182 में दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान ने महोबा पर चढ़ाई कर दी थी। रक्षाबंधन के दिन कीरत सागर तट पर भीषण युद्ध हुआ था। रक्षाबंधन के दूसरे दिन आल्हा-ऊदल ने सेना को दिल्ली खदेड़ दिया था। इसके बाद से विजयोत्सव के रूप में कजली मेला लगता आ रहा है। मेले में शामिल होकर आल्हा-ऊदल की वीरता सुन लोग स्वयं को गौरवांवित महसूस करते हैं।