लॉकडाउन में फंसे 1220 श्रमिकों को गुजरात के गोधरा से लेकर एक स्पेशल ट्रेन मंगलवार को कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंची। सभी श्रमिकों से गोधरा में ही 500-500 रुपये किराया वसूला गया। बच्चों तक को नहीं छोड़ा गया। हालांकि, रेल अफसरों का कहना है कि उन्होंने किसी श्रमिक से किराया नहीं लिया।
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श्रमिकों से भरी ट्रेन
- फोटो : amar ujala
सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-9 पर पहुंचने के बाद इन श्रमिकों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बाहर लाया गया। इसके बाद थर्मल स्क्रीनिंग कराकर सभी को रोडवेज की 46 बसों से प्रदेश के 58 जिलों के लिए रवाना किया गया। गोधरा से यह ट्रेन सोमवार देर रात एक बजे चली और मंगलवार दोपहर सवा तीन बजे कानपुर सेंट्रल पहुंची।
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सभी की थर्मल स्कैनिंग
- फोटो : amar ujala
इसमें कानपुर देहात, कासगंज, इटावा, औरैया, बदायूं, अंबेडकर नगर, बलिया, रायबरेली, उन्नाव, आगरा, मथुरा, अलीगढ़ समेत 58 जिलों के श्रमिक व उनके परिवार शामिल थे। उन्नाव के राजेश कुमार ने बताया मेरे पास टिकट के लिए 500 रुपये नहीं थे। वहां सरपंच के लोगों ने भगा दिया। इसके बाद दोस्त से 500 रुपये उधार लेकर दिया तो स्टेशन जाने के लिए बस में बैठाया।
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गुजरात से कानपुर पहुंचे श्रमिक
- फोटो : amar ujala
गुजरात परिवहन की बसों में ही लिया किराया
श्रमिकों का कहना था कि उनसे गुजरात में बसों पर चढ़ने से पहले ही प्रति व्यक्ति 500 रुपये लिए गए। इसके बदले में उन्हें रेलवे का टिकट भी दिया गया। जिस पर 505 रुपये किराया अंकित है। यह वसूली वहां के गांव सरपंच, क्षेत्रीय प्रतिनिधि तथा उनके लोगोें ने की। किराया वसूलने के बाद ही बस में चढ़ने दिया गया। ये बसें ही सभी को ट्रेन में बैठाने के लिए स्टेशन तक ले गईं।
आठ काउंटरों पर महज दो लोग ही थर्मल स्क्रीनिंग करते रहे
- फोटो : amar ujala
उधर, रेलवे ने साफ किया कि उसकी तरफ से यात्रियों से कोई किराया नहीं लिया जा रहा है। न ही रेलवे का कोई व्यक्ति किसी यात्री को टिकट दे रहा है। रेलवे यात्री किराए का 85 फीसदी स्वयं वहन कर रही है। 15 प्रतिशत किराया प्रदेश सरकार से लिया जा रहा है। ट्रेन में चेकिंग भी नहीं हो रही है। इस बात की यात्रियों से भी पुष्टि हुई। श्रमिकों ने कहा कि ट्रेन, स्टेशन पर उनसे टिकट के बारे में नहीं पूछा गया।