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ग्राउंड रिपोर्ट: हॉटस्पॉट इलाकों में दूसरे दिन ही बढ़ी मुसीबतें, यहां भूख पर भारी कोरोना महामारी

Sat, 11 Apr 2020 07:33 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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मछरिया जाने वाला रास्ता पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर किया बंद - फोटो : amar ujala
कानपुर के बाबूपुरवा में दो और मछरिया के तीन स्थानों को हॉटस्पॉट में शामिल करने के बाद से लागू पूर्ण लॉकडाउन के दूसरे दिन से ही लोगों की दुश्वारियां बढ़ने लगी हैं। इन इलाकों में रहने वाली करीब 80 प्रतिशत आबादी दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पेट पालती है। ऐसे में रोजमर्रा के महंगे सामान को लेकर लोगों की समस्याएं बेहद गंभीर हैं। हमारे सिटीजन जर्नलिस्ट ने सील किए गए इलाके के माहौल और लोगों की समस्याओं को देखा-समझा।

 
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रेड जोन घोषित इलाके सील होने के बाद लगाई गई बैरिकेडिंग - फोटो : amar ujala
मछरिया मस्जिद खैर निवासी अकील अहमद ने बताया  के आसपास का इलाका शुक्रवार को पूरी तरह से सील कर दिया गया। अब यहां ठेले वाले महंगा सामन बेच रहे हैं। 80 रुपये किलो टमाटर, 120 रुपये किलो हरी मिर्च, 80 रुपये किलो भिंडी और 30 रुपये किलो लौकी बिक रही है। दूध, दवा समेत राशन के लिए तरसना पड़ रहा है। खैर मस्जिद के पास स्थित दूध और दवाओं की दुकानें खुलवा दी जातीं तो सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रख कर लोगों की मदद की जा सकती थी।

 
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ट्रक लगाकर सील किया गया बाबूपुरवा का इलाका - फोटो : amar ujala
मछरिया हिदायत उल्लाह मदरसा निवासी मों शकील ने कहा घर के आस पास का इलाका ब्लॉक कर दिया गया है। किसी को भी अंदर से बाहर और बाहर से अंदर जाने पर रोक लगी है। क्षेत्र में सैनिटाइजेशन भी कराया गया है। घरों में कैद लोगों को आवश्यक वस्तुओं के लिए काफी जद्दोजहद उठानी पड़ रही है। हमारे पूरे इलाके में 15 इलाकाई युवक लगाए गए हैं, जो लोगों को अंदर आने से रोकने में पुलिस की मदद के साथ ही लोगों को जरूरत का सामान भी बाहर लाकर उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन लोगों को अपनी बारी का कई कई घंटे इंतजार करना पड़ रहा है।


 

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सील किया गया इलाका - फोटो : amar ujala
इमरान खान बताते हैं मछरिया नसीमाबाद मस्जिद को जाने वाले सभी रास्ते सील कर दिए गए हैं। मछरिया के तीनों इलाकों को मिला कर करीब 25 हजार की आबादी को वर्तमान में पूरी तरह से सील किया गया है। सब्जी के ठेले वालों को अंदर जाने की छूट दी गई है, लेकिन कोई भी डर के मारे अंदर नहीं जाता है। इससे लोगों को खाने पीने की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर उन महिलाओं को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिनके घरों में छोटे बच्चे हैं। उनके पीने के लिए दूध की किल्लत हो रही है।

 
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कानपुर का कुली बाजार इलाका किया गया सील - फोटो : amar ujala
सुफ्फा मस्जिद को आने वाले और बाहर जाने वाले सभी रास्तों को ब्लॉक किया गया है। इलाके के रहने वाले अजरा नूरा अंसारी ने बताया यहां रहने वाले अधिकांश लोग दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूर हैं। उनके पास पैसे खत्म हो चुके हैं। ऐसे में रोज सामान खरीद कर परिवार का पेट भर पाना मुश्किल हो रहा है। कुछ समाजसेवी संस्था पहले यहां लोगों की मदद के लिए खाने के लिए लंच पैकिट और राशन बंटवा जाते थे, लेकिन संपूर्ण लॉकडाउन के बाद वो भी नहीं आ रहे हैं। लोगों को कोई भी सामान अगर लेना होता है तो पुलिस की मदद में लगे इलाके के कुछ युवा उन्हें अंदर ही खुली कुछ दुकानों से सामान लाकर दे देते हैं। इस पर ज्यादा सामान एक साथ मंगाने की शर्त रखी गई है, जो दिहाड़ी मजदूरों के लिए नामुमकिन है।


 
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हलीम चौराहे पर की गई बैरिकेडिंग - फोटो : amar ujala
शबनम बानो कहती हैं मुंशीपुरवा बिलाल मस्जिद के आसपास का इलाका भी पूरी तरह से सील किया जा चुका है। कई लोगों के घरों में राशन समेत जरूरत का सामान खत्म हो चुका है। घरों से बाहर न निकल पाने के कारण इलाके के ही कुछ लोग उनकी मदद कर रहे हैं। लोग एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। अपने घरों से दो वक्त की रोटी मुहैया करा रहे हैं। बाहर से ठेले लेकर जरूरत का सामान बेचने आने वाले लोग फिलहाल लापता हो गए हैं। जिन घरों में बूढ़े बुजुर्ग बीमार थे, उनकी दवाइयों का संकट आ गया है। कई दवाइयां आसपास के मेडिकल स्टोर तक में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे लोगों को पुलिस को छूट देनी चाहिए, जिससे वो आवश्यक दवाएं ला सकें।
 
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