कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर शुक्रवार को श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से अलग-अलग राज्यों से आए 2612 श्रमिक भूख प्यास से बेहाल रहे। खाना-पानी देखते ही लूट मच गई। मजदूरों के बीच खूब लात घूंसे चले। मारपीट और हंगामा भी हुआ। भूख के आगे सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार हो गई। हालांकि यात्रियों से किराया नहीं लिया गया।
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इस बीच मजदूरों में मारपीट भी हुई
- फोटो : amar ujala
यात्रियों ने बताया कि पैदल चलने वाले तो रास्ते में पेड़ों में लगे फल, हैंडपंप और नदियों का पानी पी लेते हैं लेकिन ट्रेनों में तो तड़पते रह गए। हालांकि कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर आईआरसीटीसी, स्टेशन निदेशक हिमांशु शेखर उपाध्याय और स्वयंसेवी संस्थाओं की तरफ से खाना-पानी दिया जा रहा है।
निरंकारी मिशन, स्काउट, सिख समाज समेत तमाम संगठनों की तरफ से पाइप से लोगों को पानी भी पिलाया गया। शुक्रवार को दिल्ली के निजामुद्दीन स्टेशन से बनारस जाने वाली ट्रेन से कानपुर में 40 श्रमिक उतरे। इसके अलावा झांसी-गोरखपुर ट्रेन से 44, उदयपुर-बरौनी ट्रेन से 56, दिल्ली से बनारस और केरल के एर्नाकुलम स्टेशन से गोरखपुर जाने वाली ट्रेनों से 1840, भुज से बिहार के खगड़िया जाने वाली ट्रेन से 390 श्रमिक उतरे। इन श्रमिकों को 71 बसों से 36 जिलों में भेजा गया।
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लंच पैकेट के लिए मारपीट करते मजदूर
- फोटो : amar ujala
बांदा निवासी मनीष बोले भुज से आ रहा हूं। कानपुर सेंट्रल पर उतरा तो लगा जैसे स्वर्ग में आ गया हूं। रास्ते में न खाना मिला न पानी। यहां आया तो सबसे पहले पानी की तरफ टूट पड़ा। हालांकि गुजरात से कानपुर तक का टिकट 690 रुपये का था लेकिन उनसे किराया नहीं लिया गया।
गोरखपुर के अनिल ने बताया गुजरात के मोरबी से आ रहा हूं। रास्ते का सफर बहुत दुखदायी था। बस घर जाने को मिल रहा है, इस एहसास ने भूख-प्यास की तड़प को कम कर दिया। ट्रेनों के टॉयलेट तक में पानी नहीं था। कानपुर सेंट्रल आया तो खाने को लेकर भीड़ टूट पड़ी। मारपीट भी लोगों में हो गई।