पार्टियों में बिना परमिशन खुलेआम शराब परोसना कानून की नजर में बड़ा अपराध है। ऐसा करने वाले को जेल जाना पड़ सकता है। लेकिन कानून को दरकिनार करते हुए बड़े हो या छोटे हर शहर में हजारों पार्टियां की रात व्हिस्की, रम, वोदका और बीयर के पैग से रोशन हो रही हैं। ऐसा नहीं कि इन पर किसी की नजर नहीं है। पढ़िए कानपुर शहर की ये स्पेशल रिपोर्ट...
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दो दिन पहले कानपुर के द हेड क्वार्टर रेस्टोरेंट में परोसी जा रही थी शराब
आबकारी विभाग की लापरवाही से कानपुर शहर में 'ले परमिट का नाम, छलकाए जा जाम' का नया ट्रेंड चल रहा है। होटल और रेस्टोरेंट संचालक पार्टी के नाम पर शराब पिलाने का परमिट लेकर मनमाने ढंग से सभी नियम-कानून दर-किनार कर शराब पिलवाते हैं। आबकारी विभाग परमिट जारी करने के बाद कभी भी संबंधित होटल या रेस्टोरेंट में जाकर चेकिंग नहीं करता कि नियम-कानून का पालन हो रहा है या नहीं। यही कारण है कि इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से अभी तक इस मामले में एक भी कार्रवाई नहीं हुई है।
कानपुर के सिविल लाइंस स्थित द हेड क्वार्टर रेस्टोरेंट में पार्टी के नाम पर एक दिन शाम 7 बजे से 11 बजे तक का परमिट लिया गया था। दो दिन पहले ही इस जगह पर छापामारी के दौरान बड़ी संख्या में शराब और बीयर की बोतलें बरामद की गई थीं।
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दस हजार में सभी तरह की छूट
आबकारी विभाग के मुताबिक द हेड क्वार्टर रेस्टोरेंट में अंग्रेजी शराब की 9 और 12 बोतल बीयर का परमिट जारी किया गया था। जिला प्रशासन के छापे के दौरान 58 बोतल अंग्रेजी शराब, 151 बीयर के कैन और 32 बीयर के खाली कैन मिले थे। प्रशासन की कार्रवाई के बाद खुलासा हुआ है कि पार्टी के नाम पर शराब पिलाने का परमिट लेकर जमकर मनमानी की जा रही है। हर महीने पार्टी के नाम पर 30 से 35 परमिट जारी होते हैं। लिमिट तय होने के बाद भी बेहिसाब शराब परोसी जाती है। परमिट जारी होने के बाद आबकारी विभाग कभी भी चेकिंग कर नहीं देखता कि शर्तों और नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है।
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नियम-कानून जेब में
अगर कोई व्यक्ति अपने घर में पार्टी करता है तो शराब पिलाने का परमिट बनवाने की फीस चार हजार रुपये है। परमिट के लिए अर्जी लिखते समय पार्टी में शामिल होने वाले लोगों की संख्या लिखी जाती है। आबकारी विभाग छह लोगों पर एक बोतल के मानक के हिसाब से परमिट पर शराब का स्टॉक जारी करता है। आबकारी विभाग मानता है कि पार्टी में आने वाले सभी लोग शराब नहीं पीते हैं। होटल या रेस्टोरेंट के पार्टी के नाम पर शराब परोसने के लिए परमिट की फीस दस हजार रुपये होती है। एक दिन का परमिट बनता है। इसमें शराब पिलाने का समय शाम सात बजे से रात 11 बजे तक होता है। आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- नियम-कानून जेब में ...
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ट्रेंड ने तेजी से पसारे पैर
होटल-रेस्टोरेंट शराब पिलाने का परमिट लेने के बाद स्टॉक से ज्यादा शराब पार्टी के लिए रखते हैं। यह लोग कभी भी समय के नियम का पालन नहीं करते। ज्यादातर होटल और रेस्टोरेंट शनिवार और रविवार को पार्टी के नाम पर परमिट लेते हैं। इसके बाद बार की तरह पैग के हिसाब से शराब की बिक्री करते हैं। कई होटल और रेस्टोरेंट ने अपने चुनिंदा ग्राहकों का व्हाट्स एप ग्रुप बना रखा है। इसमें होटल और रेस्टोरेंट संचालक अपने ग्राहकों को शराब परोसने के बारे में अपडेट देते रहते हैं। आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- ट्रेंड ने तेजी से पसारे पैर ...
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मनमाने ढंग से सभी नियम-कानून दर-किनार
एक दिन का परमिट बनाकर होटल, रेस्टोरेंट या लाउंज में शराब परोसने के ट्रेंड ने तेजी से पैर पसारे हैं। आबकारी विभाग की मिलीभगत से चलने वाला यह धंधा चोखा साबित हो रहा है। हकीकत में एक दिन का लाइसेंस बनवा कर उसकी आड़ में दो से तीन दिन तक शराब परोसने का खेल चलता रहता है।
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फ्रेंडशिप रेव पार्टी में छापेमारी,70 से अधिक जोड़े थे शराब के नशे में
छह लीटर-अंग्रेजी शराब देश में बने ब्रांड
छह लीटर-अंग्रेजी शराब विदेश में बने ब्रांड
तीन लीटर-वाइन देश में बने ब्रांड
तीन लीटर-वाइन विदेश में बने ब्रांड
7.8 लीटर-बीयर विदेश में बने ब्रांड
7.8 लीटर-बीयर देश में बने ब्रांड
1.50 लीटर-अलग-अलग तीक्ष्णता के ब्रांड
पार्टी में शराब परोसने का परमिट जारी करने के बाद चेकिंग होती रहती है। यह संयोग ही है कि इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से लेकर अभी तक किसी भी परमिट वाली पार्टी में छापे के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी नहीं मिली। अब प्रयास रहेगा कि परमिट पर होने वाली हर शराब परोसने वाली पार्टी की चेकिंग कराई जाए। अब परमिट पर समय का जिक्र भी स्पष्ट रूप से लिखा जाएगा। -राजेश मिश्रा, जिला आबकारी अधिकारी, कानपुर