कानपुर देहात मेंं इंसानियत को झकझोर कर रख देने वाला एक वाकया सामने आया है। सिकंदरा कस्बे के हाईवे किनारे सर्विस रोड पर दो वक्त की रोटी के जुगाड़ के लिए कबाड़ बीन रहे एक बालक को बड़ी बेदर्दी से कोई रहीसजादा अपनी कार तले रौंद कर चला गया। रहागीरों ने बालक को सड़क पर तड़पता देखा तो तरस खाकर उसे सीएचसी अस्पताल पहुंचा दिया। लेकिन अफसोस तब तक उस बालक की सांस थम चुकी थी।
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मदद को गिड़गिड़ाते रहे मां-बाप फिर भी नहीं पसीजा किसी का दिल
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बेटे की मौत पर रोती मां
- फोटो : अमर उजाला कानपुर
बेटे को खो देने के गम के आसूं परिजनों की आखों से टप-टप गिर रहे थे। परिजन बेटे के शव को ले जाना चाहते थे लेकिन अस्पताल से किसी तरह की मदद नहीं मिली। मां-बाप हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते फिर रहे थे। इसके बावजूद स्वास्थय कर्मियों का दिल नहीं पसीजा।
घंटो इंतजार के बाद जब कोई राह नहीं दिखी तो हारकर पिता ने बेटे की लाश को अपने कंधे पर लाद लिया। मृतक का पिता शव लेकर घर की ओर चल रहा था। यह नजारा देख जब मामला तूल पकड़ता नजर आया तो करीब आधा किलोमीटर दूर थानेदार ने पहुंचकर शव पोस्टमार्टम के लिए ले कब्जे में लिया।
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एंबुलेंस नहीं मिली तो कंधे पर लादना पड़ा शव
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बेटे के मौत पर रोती बिलखती मां, मृत बेटे का शव कंधे पर लादकर ले जाता पिता
- फोटो : अमर उजाला कानपुर
पुलिस को मामले में जानकारी मिली कि राजपुर कसबा स्थित पशु बाजार निवासी नइया (17) ने बताया कि पड़ोसी सुरेंद्र नट का पुत्र अर्जुन (10 ) और छोटू (8) बिरहाना चौराहे के पास हाईवे के किनारे सर्विसरोड पर कबाड़ बीन रहे था। तभी एक बेकाबू कार अर्जुन को रौंदते हुए निकल गई। राहगीरों ने एंबुलेंस मंगाकर उसे सीएचसी भिजवाया।
वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। बाद में अर्जुन की मां ज्ञान देवी और परिजन भी पहुंच गए। मां ज्ञान देवी ने बताया कि शव ले जाने के लिए गुहार लगाने पर स्वास्थ्यकर्मियों ने मदद नहीं की। इसलिए शव कंधे पर रखकर ले जाना पड़ा। थाना इंचार्ज विकास राय ने बताया कि अस्पताल से थोड़ा आगे ही शव ले लिया गया था। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में जब अस्पताल जाकर पूछताछ की तो सिकंदरा सीएचसी के डॉ. मोहम्मद साजिद ने बताया कि सीएचसी से शव ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। बता दें इंसानियत को शर्मसार कर देने वाले ऐसे कई मामले प्रदेश में पहले भी सामने आ चुके हैं। फिर भी लापरवाहों के खिलाफ न तो कोई कार्रवाई होती है और न ही अस्पतालों की व्यवस्था दुरुस्त की जाती है।