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Kidney Racket: किस्मत की धनी निकली पारुल, किडनी के सौदागरों ने तो कोई कसर न छोड़ी थी; सीरम क्रेटनिन भी हुआ कम

Thu, 02 Apr 2026 09:18 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

किडनी ट्रांसप्लांट की रोगी पारुल तोमर की सेहत सुधर गई है। हैलट में इलाज के बाद किडनी ने धीरे-धीरे फिल्टर करना शुरू कर दिया है। सीरम क्रेटनिन भी कम हो गया है। ट्रांसप्लांट के पहले डोनर और रोगी दोनों की इम्युनोलॉजिकल जांचें नहीं कराई गई।
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Kidney Racket - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
अनधिकृत किडनी ट्रांसप्लांट की रोगी पारुल तोमर की प्रत्यारोपित किडनी इलाज के बाद अब धीरे-धीरे काम करने लगी है। पारुल किस्मत की धनी निकली क्योंकि ऑपरेशन के पहले और बाद में डॉक्टरों ने उसे मौत तक पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी।

डॉक्टरों ने गैर कानूनी तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट तो किया ही सारे मानकों और चिकित्सा नैतिकता की भी हत्या कर दी। ट्रांसप्लांट के पहले डोनर और रोगी दोनों की इम्युनोलॉजिकल जांचें नहीं कराई गई। ट्रांसप्लांट के पहले सबसे जरूरी एचएलए एंटीजन की भी जांच नहीं हुई। 
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मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पारुल की जांच करते मैडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसी जांच से तय होता कि प्रत्यारोपित किडनी नए शरीर में कितना काम करेगी या शरीर उसे रिजेक्ट कर देगा। चार घंटे तक किडनी प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी करने के बाद तुरंत सामान्य में डालने जैसा है। इससे जानलेवा संक्रमण का खतरा रहता है। 

 
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हैलट में किडनी डोनर आयुष चौधरी की जांच करते प्राचार्य डॉ. काला और अन्य - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
तीमारदार को इलाज से संबंधित कोई पर्चा नहीं दिया गया। उसके बाद की जांचें भी नहीं कराई गई। मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि किडनी, लिवर, बोन मैरो ट्रांसप्लांट के पहले एचएलए एंटीजन की जांच जरूरी होती है। इसी से मैचिंग की जाती है और रिजेक्शन का पता चलता है।

 

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किडनी कांड के मरीज पारुल और आयुष चौधरी को देखते डॉक्टर - फोटो : amar ujala
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि किडनी के फिल्टर करने से सीरम क्रेटेनिन कम हुआ है। हालांकि, वह अभी रोगी को रेफर करने के लिए बात कर रहे हैं। किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट न होने से रोगी के इलाज की सुविधाएं नहीं हैं। वह अपने स्तर से व्यवस्था करा रहे हैं। 

 
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आहूजा हॉस्पिटल और डॉ. प्रीति आहूजा - फोटो : amar ujala
हैलट में रोगी का अनधिकृत रूप से इलाज किया जा रहा है। अभी मल्टी सुपर स्पेशियलटी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट के लिए अनुमति नहीं मिली है।
डॉ. काला ने बताया कि ट्रांसप्लांट के रोगी को केटीयू में रखकर इलाज किया जाना जरूरी है। 

 
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कल्याणपुर स्थित प्रिया और मेड लाइफ अस्पताल - फोटो : amar ujala
उन्होंने बताया कि रोगी का दवाओं से टीएलसी काउंट भी कम हुआ है लेकिन हेमोग्लोबिन अभी कम है। सीरम क्रेटेनिन सुधर रहा है। डोनर का इलाज तो किया जा सकता है। डोनर आयुष चौधरी की स्थिति ठीक है लेकिन अभी आईसीयू में है।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : amar ujala
साइबर अपराधियों से जुड़ रहे ट्रांसप्लांट करने वालों के तार
कानपुर शहर में किडनी ट्रांसप्लांट करने वालों के तार साइबर अपराधियों से जुड़ रहे हैं। पुलिस को बिहार के बेगुसराय निवासी डोनर आयुष से पूछताछ में इसके सुबूत मिले हैं। उसने अली नाम के युवक की जानकारी दी है। वह एक टेलीग्राम ग्रुप संचालित कर रहा था। 
 

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उस ग्रुप में कई निजी अस्पतालों के डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और प्रतिनिधि जुड़े हुए थे। आयुष को म्यूल अकाउंट खुलवाने पर 20 हजार रुपये देने का झांसा दिया गया था। हालांकि, खाता खुलने के बाद उसे कमीशन नहीं मिल सका जिसके बाद उसने किडनी प्रत्यारोपित करने का फैसला किया। 

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प्रिया हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि किडनी प्रत्यारोपित करने वालों में आयुष की दिल्ली के रहने वाले अली नाम के युवक से मुलाकात हुई थी। वह उसे म्यूल अकाउंट खोलकर उसमें रुपये मंगवाने का लालच दे रहा था। खाता खोलते ही उसमें 20 हजार रुपये आने का आश्वासन दिया। 

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आहूजा हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नर्सिंगहोम को रखना होगा 60 दिन के सीसीटीवी कैमरे का बैकअप
किडनी ट्रांसप्लांट का मामला सामने आने के बाद से कमिश्नरी पुलिस सतर्क हो गई है। नर्सिंगहोम और निजी अस्पतालों में आए दिन मारपीट, विवाद और आरोप प्रत्यारोप की घटनाओं को देखते हुए उनके लिए दिशानिर्देश जारी किया जा रहा है।

 

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मान्या हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
थानेदार क्षेत्र के नर्सिंगहोम को जारी करेंगे नोटिस, नहीं मानने पर होगी कार्रवाई
थानेदार अपने क्षेत्रों के नर्सिंगहोम को नोटिस जारी करेंगे। नोटिस में बताए गए दिशा निर्देशों को न मानने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि नर्सिंगहोम में आए दिन मरीज की मौत पर गलत इलाज और दवा देने का आरोप लगता है।

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मेड लाइफ हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कई बार छेड़छाड़, रोगी व तीमारदार का सामना चोरी होने की घटनाएं होती हैं। लोग हंगामे के साथ सड़क जाम करने का प्रयास करते हैं। समस्या को देखते हुए उनके लिए दिशानिर्देश जारी किया जा रहा है।
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जांच के लिए पहुंची पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह रहेंगे दिशा निर्देश
  • पूरे नर्सिंगहोम परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे जिनकी फुटेज का बैकअप 60 दिनों का रहना चाहिए।
  • नर्सिंगहोम में लाइसेंस, इलाज की सुविधा, डॉक्टरों के नाम, फायर एनओसी आदि की जानकारी लिखी जाए।
  • केवल अधिकृत इलाज की जानकारी दी जाए। बिना वजह डॉक्टरों के नाम आदि न अंकित किए जाएं।
  • दवाओं की बिक्री के लिए भी लाइसेंस होना जरूरी है।
  • मरीजों का पर्चा और बीएचटी फाइल बनाई जाए।
  • कर्मचारियों की निगरानी की जाए।
  • पार्किंग की सुविधा भी आवश्यक है।
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