जालौन से15 साल पहले कानपुर में मजदूरी करने आया शिवम किडनी रैकेट का सूत्रधार बन गया। किडनी रैकेट के कारोबार की काली कमाई से एंबुलेंस, प्लॉट और ज्वैलरी बनाई।
जालौन से 15 साल पहले मजदूरी करने कानपुर शहर आया आठवीं पास शिवम अग्रवाल किडनी रैकेट के कारोबार का सूत्रधार बन गया। एक अस्पताल में एंबुलेंस चलाकर अवैध रूप से किडनी की खरीद-फरोख्त कर ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह से हाथ मिला लिया। वह रिसीवर और डोनर की तलाश करने लगा। ट्रांसप्लांट के लिए वह दिल्ली और नोएडा तक के डॉक्टरों को लाने लगा। कम समय में अपराध की कमाई से लाखों के वारे-न्यारे होने लगे।
कल्याणपुर निवासी शिवम अग्रवाल ने दो शादी की। आरोप है कि पहली पत्नी उन्नाव की थी जिसे शिवम शराब पीकर अक्सर मारता पीटता था। उससे दोनों को पांच साल का बेटा है। इसी के चलते वह छोड़कर चली गई।
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आरोपी शिवम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके बाद उसने दो साल पहले गूबा गार्डेन निवासी युवती से शादी रचाई और वहीं सास-ससुर के साथ रहने लगा। परिजन ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शिवम करीब 15 साल पहले मजदूरी करने शहर आया था।
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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अस्पताल में नौकरी कर एंबुलेंस चलाई
कल्याणपुर के एक अस्पताल में नौकरी कर एंबुलेंस चलाकर दो वक्त का पेट भरने लगा। कुछ महीने पहले ही उसने एक नई कार और लाखों रुपये कीमत का प्लॉट खरीदा था। इसमें वह जल्द अस्पताल बनवाने की तैयारी कर रहा था।
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किडनी ट्रांसप्लांट मामले में गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार
- फोटो : पुलिस
कुछ ही साल में बना ली दो एंबुलेंस
कुछ साल पहले उसने खुद की एक एंबुलेंस खरीदी। इसके बाद वह अन्य अस्पतालों के संपर्क में आ गया। समय बढ़ता गया और उसने धीरे-धीरे कुछ ही साल में उसने एक और एंबुलेंस निकलवा ली। इसी तरह लाखों रुपये कीमत की ज्वैलरी भी बनाई जिन्हें पहने उसकी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हैं।
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हैलट के सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल से किडनी के मरीज पारूल, आयुष को पीजीआई लखनऊ लेकर जाती एंबुलेंस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिजन का आरोप है कि आठवीं पास शिवम ने उनकी डबल एमए किए बेटी को प्यार के जाल में फंसाया। वह सप्ताह में कभी-कभी मरीजों को लेकर दिल्ली जाता था। दो-तीन दिनों में वापस आ जाता था। वह लोग खुद हैरान हैं कि आखिर उनकी बेटी की जिंदगी क्यों बर्बाद कर दी।
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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रावतपुर इंस्पेक्टर कमलेश राय ने बताया कि हर बिंदु पर गहनता से जांच की जा रही है। कई नई चीजें सामने आईं हैं उनकी जांच की जा रही है। इस गोरखधंधे में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
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मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पारुल की जांच करते मैडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गले में आला और एप्रिन देख डॉक्टर कहकर बुलाते
एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल को ज्यादातर लोग डॉक्टर कहकर बुलाते थे। अपनी कार से चलने पर वह हमेशा एप्रिन और गले में आला डाले रहता था। इस कारण क्षेत्र के लोग उसे डॉक्टर समझते थे।
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मान्या हॉस्पिटल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पोस्टमॉर्टम हाउस, हैलट परिसर और गोल चौराहे पर बैठकी
एंबुलेंस चालक होने का फायदा शिवम अग्रवाल को मिल रहा था। पोस्टमॉर्टम हाउस, हैलट परिसर और गोल चौराहे के पास खड़ी होने वाली एबुंलेंस के ज्यादातर चालकों से उसकी अच्छी खासी बनती थी।
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इसी अस्पताल में चल रहा था किडनी कांड
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वह हफ्ते में दो दिन पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर कार खड़ी कर सिगरेट के कश लगाता था। इसके बाद चालकों से मरीजों के टटोलने का काम करता था। यह काम हैलट और गोल चौराहे पर करता था।
अस्पताल में मौजूद पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस निकलवा रही सीडीआर
किडनी के काले कारोबार का भंडाफोड़ करने वाली रावतपुर पुलिस आरोपियों की सीडीआर निकलवा रही है। इससे पुलिस को और भी लोगों की संलिप्ता का पता चल जाएगा। आखिर आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन लोग हैं। वह कितनी देर, कितने बार फोन करते थे। पुलिस को इसमें कई नई चीजें मिली हैं।