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किडनी कांड में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा: पहले 18 बीघा जमीन बेच चुका है आयुष, पीड़ित नहीं बेहद शातिर है वो

Tue, 07 Apr 2026 03:23 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

कानपुर के किडनी कांड में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा हुआ है। आयुष चौधरी को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। आयुष किडनी से पहले 18 बीघा जमीन बेच चुका है।
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Kidney Racket - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
कानपुर किडनी कांड में अब तक पीड़ित नजर आने वाला बिहार के बेगूसराय का आयुष चौधरी बेहद शातिर है। वह खुद को बचाने के लिए पुलिस को लगातार गुमराह कर रहा है। फीस के लिए किडनी बेचने की जो कहानी उसने पुलिस को सुनाई थी वह फर्जी है। अब तक की जांच में सामने आया कि वह अपनी गलत संगत के चलते किडनी ही नहीं गांव की 18 बीघा जमीन भी बेच चुका है। साइबर ठगी के एक मामले में गुजरात पुलिस ने उसे नोटिस भी भेजा है।

31 मार्च को रावतपुर पुलिस ने मसवानपुर स्थित आहूजा हॉस्पिटल में स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ छापा मारा था। जांच के लिए पहुंची टीमों को पनकी कल्याणपुर रोड स्थित प्रिया अस्पताल में मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर भर्ती मिली थीं।
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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उनको किडनी ट्रांसप्लांट की गई थी। यह किडनी बिहार के बेगूसराय के औगान गांव के आयुष की थी जो कि पुलिस को आवास-विकास कल्याणपुर स्थित मेडलाइफ अस्पताल में भर्ती मिला।
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किडनी ट्रांसप्लांट मामले में गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार - फोटो : पुलिस
पुलिस ने किडनी के अवैध ट्रांसप्लांट की पुष्टि होने के बाद आहूजा हॉस्पिटल के संचालक डॉक्टर दंपती समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। आयुष ने पुलिस को बताया था कि वह देहरादून स्थित ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से एमबीए छात्र है।

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हैलट के सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल से किडनी के मरीज पारूल, आयुष को पीजीआई लखनऊ लेकर जाती एंबुलेंस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चौथे सेमेस्टर की फीस जमा करने के लिए उसने किडनी बेची है। हालांकि, उसकी दोनों ही कहानी पुलिस की जांच में झूठी निकली। जांच टीम के अनुसार न तो वह ग्राफिक एरा का छात्र निकला और न ही उसने फीस के लिए किडनी बेची। झूठ पकड़े जाने पर आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह ग्राफिक से नहीं उत्तरांचल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहा है। इस तथ्य की भी पुलिस जांच करा रही है। उसके गांव गई पुलिस टीम को वहां से जानकारी मिली है कि आयुष ने 2015 में इंटर किया था।
 
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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उसे मेडिकल की पढाई के लिए पिता ने विशाखापट्टनम भेजा। हालांकि, उसकी संगत बिगड़ गई। उसे नशे की लत लग गई। उसकी गलत संगत से परेशान होकर पिता राजेश ने वर्ष 2017 में आत्महत्या कर ली। पिता की मौत के बाद आयुष ने दोस्तों और एयरहोस्टेस गर्लफ्रैंड के चक्कर में 18 बीघा जमीन बेच दी। वह वर्ष 2021 से गांव नहीं गया। उसने दोस्त को बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़वाने के लिए भी जमीन बेची थी।
 
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के मुताबिक आरोपी साइबर ठगी के मामलों से जुड़ा है। वह शातिरों को म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराता था। उसे साइबर ठगी के एक मामले में गुजरात के सुरेंद्रनगर की साइबर सेल ने नोटिस भी दिया है। उसके खाते भी जांचे जा रहे हैं।
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आरोपी शिवम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शिवम अग्रवाल से जेल में होगी पूछताछ
जेल गए शिवम अग्रवाल से मंगलवार को जेल में पूछताछ होगी। जांच अधिकारी उसके बयान लेंगे। उससे मामले की और जानकारी जुटाएंगे। वीडियो के संबंध में जांच करेंगे। बयान के तीन से चार दिन बाद उसका रिमांड मिल सकता है। डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी ने बताया कि शिवम के मोबाइल में कई वीडियो मिले हैं।

 

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आहूजा हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नवीन खुद को बताता था बैटरी कारोबारी
पुलिस ने नवीन पांडेय के प्रयागराज स्थित घर का पता लगा लिया है। एक टीम उसके यहां गई थी लेकिन वहां आरोपी नहीं मिला। उसने घरवालों और रिश्तेदारों को बता रखा था कि वह दिल्ली एनसीआर में बैटरी का कारोबार करता है। वहीं जाया करता था।

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मान्या हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
साउथ अफ्रीका से आई अरेबिका की जानकारी दूतावास से मांगी
आहूजा हॉस्पिटल में तीन मार्च को किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाली साउथ अफ्रीका मूल की अरेबिका की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने दूतावास और इमीग्रेशन विभाग को पत्र लिखकर उसके भारत आने का कारण पूछा है।

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अस्पताल में मौजूद पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी ने बताया कि अरिका भारत कब आई और वह इस समय कहां है। ट्रांसप्लांट के बाद इतनी जल्दी बाहर जाने की संभावना नहीं है। वह देश में घूमने या फिर इलाज कराने के नाम पर आई थी इसके बारे में जानकारी की जा रही है। उसका इलाज और इंजेक्शन देने की बात शिवम अग्रवाल कर रहा था। 

 

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kanpur kidney scam - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ट्रांसप्लांट ग्रुप से जुड़े रहे कई साइबर अपराधी
किडनी ट्रांसप्लांट ग्रुप से कई साइबर अपराधी और शातिर जुड़े थे। ये रुपये कमाने का लालच देकर युवाओं को छोटे टास्क दिया करते थे। वेगूसराय निवासी किडनी डोनर आयुष भी शुरू में उनके दिए टास्क पूरे कर रहा था। यह जानकारी पुलिस और साइबर क्राइम ब्रांच को टेलीग्राम के किडनी डोनर नामक ग्रुप से हुई है।
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जांच के लिए पहुंची पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस की धरपकड़ से अधिकतर साइबर अपराधी किनारे हो गए हैं। उनकी तलाश में इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर का सहयोग लिया जा रहा है। किडनी ट्रांसप्लांट मामले के आरोपी डॉ. अफजल के साथ गाजियाबाद में लूट व डकैती से जेल गए सरफराज सैफी का नाम सामने आया है। 
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