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किडनी कांड में नया खुलासा: एंबुलेंस चालक खुद को डॉक्टर बता फंसाता था, हिचक दूर करने के लिए शिवम करता था ये काम

Wed, 01 Apr 2026 03:11 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

किडनी ट्रांसप्लांट के खेल में शामिल आरोपियों के तार सीधे तौर पर मेरठ, नोएडा और दिल्ली से जुड़ रहे हैं। वहां से तय समय में सर्जन, एनेस्थीसिया के डॉक्टर, ओटी असिस्टेंट, स्टाफ नर्स शहर आते थे। निर्धारित नर्सिंगहोम में किडनी ट्रांसप्लांट कर रवाना हो जाते थे। 
 
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Kidney Racket - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
कानपुर में किडनी के अवैध ट्रांसप्लांट मामले में मंगलवार को जेल भेजे गए आरोपियों में शामिल शिवम अग्रवाल ही मुख्य दलाल है। वह आठवीं पास एंबुलेंस चालक है लेकिन क्षेत्रीय लोगों से खुद को डॉक्टर बता रखा है। क्षेत्रीय लोग उसे डॉक्टर शिवम के नाम से जानते हैं। उसका मुख्य काम इलाके में संचालित अस्पतालों के लिए गांव-देहात से मरीज खोजकर लाना था।

पुलिस की जांच में सामने आया कि कल्याणपुर के देवी सहायनगर का रहने वाला आरोपी शिवम लोगों को झांसे में लेने के लिए एप्रेन और गले में स्टेथेस्कोप लटका कर घूमता था। शिवम मामले में वांछित डॉ. रोहित उर्फ राहुल, आहूजा हॉस्पिटल की डॉ. प्रीति आहूजा और डॉ. सुरजीत आहूजा के संपर्क में था। उसने ही देहरादून में पढ़ रहे आयुष से संपर्क किया था। आयुष को रुपये की जरूरत थी। उसे बातों में फंसा कर छह लाख रुपयों में किडनी देने के लिए राजी कर लिया।
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किडनी कांड के मरीज पारुल और आयुष चौधरी को देखते डॉक्टर - फोटो : amar ujala
हिचक दूर करने के लिए इंटरनेट पर दिखाए कई वीडियो
पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने कबूला कि पहले आयुष किडनी देने से हिचक रहा था। ऐसे में उसे इंटरनेट पर किडनी से जुड़े कई ऐसे वीडियो दिखाए जिनमें किडनी देने वाले व्यक्ति एक किडनी से बिना किसी स्वास्थ्य समस्या के जीवन काटते दिखाए गए थे। 

 
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आहूजा हॉस्पिटल और डॉ. प्रीति आहूजा - फोटो : amar ujala
वीडियो देखने के बाद और मिलने वाले छह लाख रुपयों के लालच में आकर आयुष ने हामी भर दी थी। ट्रांसप्लांट के बाद शिवम को सात लाख रुपये दिए थे जिसमें से 3.50 लाख उसने आयुष को दिए। ट्रांसप्लांट करने वाले आहूजा हॉस्पिटल को 2.75 लाख और मेड लाइफ हॉस्पिटल को ट्रीटमेंट के लिए 25 हजार रुपये दिए थे। 

 

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कल्याणपुर स्थित प्रिया और मेड लाइफ अस्पताल - फोटो : amar ujala
वहीं, शिवम ने 50 हजार रुपये अपने पास बतौर कमीशन रखे थे। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि किडनी देने वाले युवक को इलाज के लिए हैलट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसके पास से कई म्यूल अकाउंट भी मिले हैं। सेहत में सुधार होने पर उससे इनके बारे में पूछताछ की जाएगी।
 
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : amar ujala
मेरठ, नोएडा, दिल्ली से आकर डॉक्टरों की टीम करती थी सर्जरी
किडनी ट्रांसप्लांट के खेल में शामिल आरोपियों के तार सीधे तौर पर मेरठ, नोएडा और दिल्ली से जुड़ रहे हैं। वहां से तय समय में सर्जन, एनेस्थीसिया के डॉक्टर, ओटी असिस्टेंट, स्टाफ नर्स शहर आते थे। निर्धारित नर्सिंगहोम में किडनी ट्रांसप्लांट कर रवाना हो जाते थे। 
 
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : amar ujala
इसके बाद मरीज और डोनर को अलग-अलग निजी अस्पतालों में भर्ती कर दिया जाता था। पूरी प्रक्रिया के दौरान न ही किडनी रोगी की फाइल बनती थी और न ही डोनर का बेड हेड टिकट (बीएचटी) तैयार होता था। सर्जरी के बाद सादे कागज पर इलाज का पूरा ब्योरा लिखा जाता था। इस पर नर्सिंगहोम और डॉक्टरों की कोई मोहर नहीं रहती थी।

 
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डॉ. प्रीति आहूजा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि शिवम अग्रवाल एंबुलेंस चालक है। वह ऑपरेशन और कई तरह की सर्जरी की जानकारी रखता है। उसकी मेरठ, नोएडा और दिल्ली के कई एंबुलेंस चालकों से पहचान है। ये एंबुलेंस चालक एनसीआर क्षेत्र से मरीज लेकर अक्सर कानपुर और आसपास के जिलों में आया करते हैं। इनमें से कुछ एडवांस लाइफ सपोर्टिंग (एएलएस) एंबुलेंस चलाया करते हैं। 

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक शिवम अग्रवाल का संपर्क नोएडा के डॉ. रोहित और मेरठ के डॉ. अफजाल से हुआ है। इन्हीं के साथ डॉ. रोहित, डॉ. अनुराग और अन्य के नाम सामने आए हैं। डॉ. रोहित एनेस्थीसिया का डॉक्टर बताया जा रहा है। वह मेरठ के काफी बड़े नर्सिंगहोम से जुड़ा हुआ है। इन सभी की तलाश की जा रही है।

 

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प्रिया हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ और नोएडा में होती सेटिंग
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि आरोपी किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दूसरे शहरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी सेटिंग मेरठ, नोएडा और दिल्ली में होती है। वहां के कुछ अधिकृत और बड़े नर्सिंगहोम अनाधिकृत तरीके से गुर्दा प्रत्यारोपण कर रहे हैं। अपने यहां खेल पकड़ा न जाए या फिर किसी तरह की कोई गड़बड़ी न हो उसकी वजह से 350-400 किलोमीटर दूर निजी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट किया गया।

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मेड लाइफ हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एंबुलेंस का बिछाया नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने मरीज और डोनर को शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस का जाल बिछा रखा है। इसमें ओटी असिस्टेंट से लेकर आईसीयू का कार्य देखने वाले पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हैं। पोस्ट ऑपरेटिव (सर्जरी के बाद) कुछ ही दिन तक रखकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक मरीज व डोनर को ले जाया जाता है। इस कार्य के लिए भरोसे के स्टाफ को जिम्मेदारी दी जाती है।

 

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आहूजा हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मेडलाइफ कागजों पर सील पड़ताल में संचालित मिला
किडनी कांड में स्वास्थ्य विभाग ने दूसरे दिन तीन अस्पतालों में से मेडलाइफ अस्पताल को सील कर दिया और बाकी दो अस्पतालों को बंद करने के लिए नोटिस जारी किया है। संवाद न्यूज एजेंसी ने मंगलवार अस्पतालों की पड़ताल की तो तीनों अस्पताल ही खुले नजर आए। 

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मान्या हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मेडलाइफ व आहूजा हॉस्पिटल खुले मिले लेकिन सन्नाटा पसरा था जबकि प्रिया अस्पताल में रोगियों को भर्ती करने के साथ ही डॉक्टर उनका इलाज भी करते मिले। एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि मेडलाइफ को सील कर दिया गया है। आहूजा और प्रिया अस्पताल को जांच पूरी होने तक अस्पताल बंद रखने का नोटिस दिया गया है। इस दौरान उन्हें भर्ती रोगियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने और अस्पतालों को बंद रखने के निर्देश दिए हैं।

 

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इसी अस्पताल में चल रहा था किडनी कांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चलते मिले अवैध अस्पताल, डर से नहीं पहुंचे डॉक्टर
अवैध अस्पतालों की स्थिति जानने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से मंगलवार को कल्याणपुर में संचालित अस्पतालों की पड़ताल की गई। अवैध अस्पताल भी संचालित मिले। ये वे अस्पताल थे जिन पर स्वास्थ्य विभाग ने खुद नोटिस चिपकाया था या उन्हें सील किया था। हालांकि इन अस्पतालों में डर की वजह से डॉक्टर नहीं पहुंचे।

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अस्पताल में मौजूद पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
टेलीग्राम के जरिये रहते थे संपर्क में, एक करोड़ तक में बेचते थे किडनी
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ट्रांसप्लांट करने वाले डॉ. रोहित, मरीज पारुल से संपर्क करने वाले नोएडा के अफजाल, वैभव और अनुराग की तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि अफजाल और अन्य आरोपी टेलीग्राम चैनल के माध्यम से एक दूसरे के संपर्क में हैं। आरोपी जरूरतमंदों को पैसों का लालच देकर पांच से 10 लाख रुपये में किडनी खरीदते थे। उसे अमीर परिवार के मरीजों को 60 लाख से एक करोड़ रुपये तक में बेच देते थे।

 
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kanpur kidney scam - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जांच में सामने आए अस्पतालों के अलावा सात अन्य अस्पताल अवैध ढंग से किडनी ट्रांसप्लांट करने के मामले से जुड़े हैं। इनमें से एक अस्पताल लखनऊ और छह कानपुर के हैं। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीमें इनकी गहनता से जांच कर रही हैं। रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर कानपुर

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