कानपुर के मसवानपुर चौराहा स्थित आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट देर रात या सुबह के तीन से चार बजे के बीच होता था। यह वह समय था जब अधिकतर मरीज व तीमारदार नींद में होते थे। सर्जरी के बाद किडनी रोगी व डोनर को शिफ्ट करना आसान रहता था।
कानपुर में केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल में करीब दो साल से अनधिकृत तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट का खेल चल रहा है। यहां दिल्ली, मेरठ, नोएडा और एनसीआर क्षेत्र से मरीजों व डोनरों को लाकर किडनी प्रत्यारोपित की जा रही थी। इसकी जानकारी पुलिस और सीएमओ कार्यालय की टीम को प्रारंभिक जांच में हुई है। इस वर्ष तीन मार्च को साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका की किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था।
पुलिस आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाए रही, जबकि मरीज व उनके रिश्तेदार शहर से कहीं और चले गए। नए केस के लिए पुलिस अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों के साथ फिर से प्लानिंग की और आरोपियों को दबोच लिया। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि पुलिस के पास अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना आ रही थी। क्राइम ब्रांच, एलआईयू और खुफिया की टीमों को सक्रिय किया गया।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
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अस्पताल के रिकार्ड में भी ब्योरा नहीं मिला
स्वास्थ्य विभाग को भी चौकन्ना किया गया था। अनधिकृत तरीके से अंग प्रत्यारोपण का खेल किस नर्सिंगहोम में हो रहा है, इसकी सटीक जानकारी नहीं आई। इसी साल तीन मार्च को साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका का अंग प्रत्यारोपण हुआ था। एलआईयू और क्राइम ब्रांच ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जानकारी जुटाई, लेकिन महिला व उनके परिजनों का पता नहीं चल सका था। अस्पताल के रिकार्ड में भी किसी तरह की सर्जरी का ब्योरा नहीं मिला।
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प्रिया हॉस्पिटल
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आहूजा हॉस्पिटल में सात किडनी प्रत्यारोपण की जानकारी
आरोपियों ने अरेबिका को कुछ दिन कल्याणपुर के नर्सिंगहोम के आईसीयू में रखा फिर दिल्ली ले गए। दिल्ली के नर्सिंगहोम के बाद नोएडा के निजी अस्पताल में डेढ़ से दो माह के लिए उनका इलाज चला। अब तक आहूजा हॉस्पिटल में सात किडनी प्रत्यारोपण की जानकारी हुई है। इस अस्पताल के कुछ स्टाफ कई अधिकृत और अनधिकृत तरीके से संचालित हो रहे कल्याणपुर, काकादेव और पनकी क्षेत्र के नर्सिंगहोम से जुड़े हुए थे। वहां से मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने का खेल चल रहा था।
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मेड लाइफ हॉस्पिटल
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स्टाफ को छुट्टी देकर देर रात किया जाता था ट्रांसप्लांट
कानपुर के मसवानपुर चौराहा स्थित आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट देर रात या सुबह के तीन से चार बजे के बीच होता था। यह वह समय था जब अधिकतर मरीज व तीमारदार नींद में होते थे। सर्जरी के बाद किडनी रोगी व डोनर को शिफ्ट करना आसान रहता था। किडनी प्रत्यारोपण वाले दिन पूरे स्टाफ को छुट्टी दे दी जाती थी। यह जानकारी पुलिस और सीएमओ कार्यालय के अधिकारियों को जांच में मिली है।
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आहूजा हॉस्पिटल
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पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए देर रात का समय निर्धारित किया जाता था। इस दौरान सभी स्टाफ की छुट्टी कर दी जाती थी। केवल मेरठ और नोएडा के डॉक्टरों व पैरामेडिकल टीम रहती थी।
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हैलट में किडनी डोनर आयुष चौधरी की जांच करते प्राचार्य डॉ. काला और अन्य
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सर्जरी के बाद किडनी रोगी और डोनर को अलग-अलग अस्पताल में भर्ती करा दिया जाता था। इस बीच अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे भी बंद कर दिए जाते थे। पुलिस और सीएमओ कार्यालय की टीम को आरोपियों की वीडियो फुटेज नहीं मिली है। आहूजा हॉस्पिटल, मेडलाइफ और प्रिया नर्सिंगहोम में भी फुटेज नहीं मिले हैं। हालांकि आसपास लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों ने एंबुलेंस व मरीज को शिफ्ट कराने की फुटेज मिले हैं। पुलिस ने साक्ष्य बरामद किए हैं।
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मान्या हॉस्पिटल
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अनाधिकृत पैरामेडिकल स्टाफ कर रहा था इलाज
सीएमओ की जांच में सामने आया है कि मेडलाइफ और प्रिया नर्सिंगहोम में अनाधिकृत पैरामेडिकल स्टाफ इलाज कर रहा था। उनको सादे कागज में सिर्फ पांच दिन दवाएं, इंजेक्शन, ग्लूकोज आदि की डिटेल लिखी गई थी। यह प्रक्रिया अन्य गुर्द रोगियों और डोनर में अपनाई जाती थी। अगर कोई भी केस बिगड़ता तो सिर्फ लखनऊ के एक नर्सिंगहोम में रेफर कर दिया जाता था।
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इसी अस्पताल में चल रहा था किडनी कांड
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डायलिसिस कराने वाले मरीजों की पता करते थे हैसियत
किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट से जुड़े आरोपी हमेशा उन लोगों की तलाश करते जिन्हें या तो रुपयों की सख्त हो या फिर किडनी की। रुपये के जरूरतमंदों की जानकारी के लिए नौकरी पेशा लोग या छात्रों को निशाना बनाया जाता। वहीं, किडनी किसकी खराब है और कितनी खराब है इसके बारे में उन अस्पतालों से जानकारी जुटाई जाती। जहां लोग डायलिसिस कराने जाते हैं वहीं से मरीजों का पता लेकर आरोपी उनके बारे में पूरी जानकारी जुटाते थे। उनकी हैसियत देखकर उनसे किडनी के लिए संपर्क करते थे।
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अस्पताल में मौजूद पुलिस
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मामले का खुलासा करते हुए पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि पूरा सिंडिकेट ऑर्गनाइज तरीके से काम करता था। मेरठ का रहने वाला डॉ. अफजल डायलिसिस करने वाले अस्पतालों से संपर्क रखता था। वहां से मरीजों की जानकारी लेकर उनसे किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए संपर्क करता था। इसके बाद आरोपी टेलीग्राम पर बने ग्रुप में मरीज की जानकारी साझा कर किडनी की डिमांड करते थे। इसी डॉक्टर अफजाल ने मेरठ के बड़े स्कूल संचालक की पत्नी पारुल तोमर से संपर्क किया था। पारुल की दोनों किडनी खराब हैं। उसका ब्लड ग्रुप बी-पॉजिटिव है।
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kanpur kidney scam
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वह बीते आठ वर्षों से नियमित डायलिसिस करा रही हैं। ऐसे में किडनी मिलने की उम्मीद पर वह ट्रांसप्लांट के लिए राजी हो गई थीं। शिवम अब तक मास्टर माइंड की भूमिका में नजर आ रहा है। वहीं, ट्रांसप्लांट करने वाले डॉ. रोहित से संपर्क करता था। डॉ. रोहित नोएडा और लखनऊ से अपनी टीम लेकर शहर आते थे जिनमें एनेस्थीसिया देने वाले डॉक्टर, सर्जन आदि शामिल रहते थे।
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जांच के लिए पहुंची पुलिस
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किडनी प्रत्यारोपण के खेल में एनसीआर का नामी डॉक्टर शामिल
कानपुर के आहूजा हॉस्पिटल में हुए किडनी ट्रांसप्लांट में सर्जरी का एडवांस तरीका अपनाया गया है जिसे देख स्वास्थ्य विभाग की टीम में शामिल डॉक्टर हैरान हैं। पुलिस अधिकारी भी सर्जरी की जानकारी करने के बाद इसके पीछे किसी विशेषज्ञ के होने की संभावना जता रहे हैं। अब तक हुई जांच में एनसीआर के एक नामी डॉक्टर के शामिल होने के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस व क्राइम ब्रांच ने आईएमए और सर्जन एसोसिएशन के पदाधिकारियों से जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
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कल्याणपुर स्थित प्रिया और मेड लाइफ अस्पताल
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पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पारुल और आयुष की कुछ रिपोर्ट देखी गई है जिसमें किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। उनकी कुछ और जांचें कराई गई हैं। सर्जरी में खून ज्यादा नहीं बहा है जबकि नौसिखिया तरीके या फौरी तौर पर ऑपरेशन करने से सबसे ज्यादा खून बहने की समस्या आती है।
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आहूजा हॉस्पिटल और डॉ. प्रीति आहूजा
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सीएमओ कार्यालय के डॉक्टरों को जानकारी मिली है कि किडनी ट्रांसप्लांट में उपयोग किए गए उपकरण भी एडवांस और मोबाइल हैं। इन्हें लाना ले जाना आसान रहता है। हालांकि डायलिसिस के लिए क्या सुविधा रखी गई थी, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
सरकारी डॉक्टर कर रहे प्रैक्टिस
कल्याणपुर, पनकी, रावतपुर और काकादेव के नर्सिंगहोम की जांच में पुलिस के पास जानकारी आई है कि कई सरकारी डॉक्टर यहां पर प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनके दलाल और जूनियर डॉक्टर सर्जरी के लिए मरीजों और डिलीवरी के लिए प्रसूताओं को प्रलोभन देते हैं। उनके लिए अच्छे खासे पैकेज तैयार किए गए हैं। मंगलवार को सीएमओ की टीम ने कई नर्सिंगहोम और निजी अस्पतालों में जांच की। वहां के ऑपरेशन थियेटर व अन्य सुविधाओं का जायजा लिया।