किडनी कांड में एसआईटी अब फरीदाबाद के फोर्टिस हॉस्पिटल के बड़े अधिकारियों व डॉक्टरों पर कार्रवाई करने की तैयारी में है। इनके खिलाफ जांच अधिकारी साक्ष्य जुटा रहे हैं। एक सप्ताह के भीतर बड़ी कार्रवाई हो सकती है। मामले में ट्रांसप्लांट कमेटी की बैठक की वीडियोग्राफी अहम साक्ष्य होगा।
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किडनी कांड में खाकी के भी हाथ काले
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, जिन हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा होती है, वहां शासन के आदेश पर एक विशेष कमेटी बनाई जाती है। पीएसआरआई में एक साल में 25 से अधिक ट्रांसप्लांट के केस होते हैं। इस लिए यहां पर एक आंतरिक कमेटी भी बनाई गई थी। इसके प्रमुख वहां के सीईओ डॉ. दीपक शुक्ला थे।
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किडनी कांड में कानपुर पुलिस ने फोर्टिस हॉस्पिटल की महिला कोऑर्डिनेटर गिरफ्तार किया
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पुलिस को उनकी संलिप्तता के साक्ष्य मिले। इसलिए उनको जेल भेजा गया। एसआईटी के अधिकारियों के मुताबिक ठीक इसी तरह से फोर्टिस में भी फर्जीवाड़ा हुआ है। जिम्मेदारों के सामने से ही सभी फर्जी डोनरों व रिसीवरों की फाइलें गुजरी हैं। जिन पर उनके हस्ताक्षर हैं। चूंकि दस्तावेजों का सत्यापन करना कमेटी का ही काम है। ऐसे में ये सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। इसलिए एसआईटी इन पर कार्रवाई करेगी।
नहीं मुकर पाएंगे अधिकारी
ट्रांसप्लांट कमेटी की जब बैठक होती है तो उसकी वीडियोग्राफी कराई जाती है। इसमें कमेटी के अधिकारी डोनर व रिसीवर से लाइव पूछताछ करते हैं। इसके जरिए वह पुख्ता करते हैं कि डोनर व रिसीवर रिश्तेदार हैं। किडनी की खरीद-फरोख्त नहीं हो रही है। एसआईटी केमुताबिक वीडियोग्राफी में जो लोग मौजूद हैं, उनसे पूछताछ की जाएगी।
पिछले तीन साल के रिकॉर्ड की होगी जांच
एसआईटी ने फोर्टिस प्रशासन से पिछले तीन साल का किडनी व लिवर ट्रांसप्लांट का ब्योरा मांगा है। एसआईटी को हॉस्पिटल में ये खेल पिछले कई वर्षों से चलने की आशंका है। पिछले साल करीब डेढ़ दर्जन ट्रांसप्लांट के केस हुए थे। अब एसआईटी एक-एक केस की पड़ताल कर डोनर व रिसीवर के दस्तावेजों का सत्यापन करेगी।