कानपुर मेट्रो को दौड़ाने के लिए जापान और यूरोप से फंडिंग का ईंधन मिल सकता है। लखनऊ मेट्रो में यूरोपीय इन्वेस्टमेंट बैंक (ईआईबी) ने करीब 3600 करोड़ का निवेश किया है। बैंक ने कानपुर मेट्रो रेल परियोजना में भी निवेश की इच्छा जताई है।
दूसरी ओर जापान इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन एजेंसी (जीका) भी लोन देने की इच्छुक है। दो वर्ष पूर्व जीका की टीम कानपुर आकर सर्वे कर निवेश के लिए ग्रीन सिग्नल दे चुकी है। अब केंद्र सरकार किसी एक बैंक का चयन करेगी।
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कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट को गुरुवार को केंद्र सरकार ने मंजूरी दी है। 11076 करोड़ रुपये से अगले पांच वर्षों में प्रोजेक्ट पूरा किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के साथ ही प्रोजेक्ट के लिए वित्तीय संस्थाओं से लोन लेने का रास्ता भी साफ हो गया है।
राज्य और केंद्र सरकार के 20-20 फीसदी के अंशदान के साथ पांच फीसदी राशि अन्य ग्रांट से ली जाएगी। करीब 55 फीसदी धनराशि विदेशी बैंक से लोन के रूप में ली जानी है। ईआईबी और जीका की लोन देने की शर्तों व ब्याज दरों का आंकलन होगा। जिसकी शर्तें और ब्याज दर कम होंगी, उसका नाम तय किया जाएगा।
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ईआईबी
यूरोपीय इन्वेस्टमेंट बैंक यूरोपीय संघ के देशों का मजबूत आधार है। इसका संचालन यूरोपीय संघ करता है। मुख्यालय लक्जमबर्ग में है। वर्ष 2008 में आई वैश्विक मंदी के बाद इस बैंक ने आर्थिक संकट से उबारने के लिए बड़े कदम उठाए थे। 2014 में यूरोपीय संघ ने इस बैंक को इजाजत दी थी कि यह विदेशों में भी निवेश कर संघ की स्थिति और मजबूत करे।
जानें जीका के बारे
जापान इंटरनेशन कारपोरेशन एजेंसी (जीका) जापान की सरकारी एजेंसी है। 2003 में स्थापित न्यू जीका का मुख्यालय टोक्यो में है। जीका जापान की आर्थिक मजूबती के साथ ही विश्व के विकासशील देशों में विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि से जुड़ी परियोजनाओं की फंडिंग करता है।
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पहले चरण में मोतीझील स्टेशन खत्म
मेट्रो के पहले चरण में आईआईटी से लेकर मोतीझील तक प्रस्तावित 15.2 किलोमीटर के रूट में मोतीझील स्टेशन खत्म कर दिया गया है। शिवाजी गेट से लेकर हैलट के बीच बनने वाले स्टेशन के जरिये मोतीझील और आसपास के यात्रियों को मेट्रो मिलेगी। एलएमआरसी सूत्रों के मुताबिक, लागत घटाने के लिए ऐसा किया गया है।
इसी माह शुरू होगी टेंडर प्रक्रिया
लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन (एलएमआरसी) ट्रैक और स्टेशन निर्माण के लिए इसी माह टेंडर प्रक्रिया शुरू कर सकता है। आठ मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शहर आगमन पर उनकी उपस्थिति में मेट्रो प्रोजेक्ट की शुरुआत कराई जा सकती है। हालांकि, प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में केंद्र में बनने वाली नई सरकार की प्रमुख भूमिका रहेगी। विदेशी बैंकों से लोन और केंद्र का अंशदान मिलने से ही प्रोजेक्ट साकार हो सकेगा।