बिकरू कांड के बाद विकास के गुर्गो को ढूंढ ढूंढ कर मारने वाली कानपुर पुलिस अब संजीत अपहरण हत्याकांड के खुलासे में हो रही किरकिरी से बचने के लिए पुलिस उसका शव बरामद करने के लिए पांडु नदी में तीन दिनों से सर्च ऑपरेशन चला रही है। करीब 85 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। स्टीमरों की मदद से पीएसी और 35 गोताखोरों की टीमें पांडु नदी में संजीत के शव की तलाश में जुटी हैं।
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kanpur kidnapping case
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रविवार को बिधनू से महाराजपुर थाना क्षेत्र तक एक दर्जन जगहों पर जाल डाले गए। इसके बाद भी शव का पता नहीं लग सका है। गोविंदनगर सीओ विकास पांडेय ने बताया कि चार स्टीमरों की मदद से तीन प्लाटून पीएसी नदी का चप्पा चप्पा खंगाल रही है। नदी में अब तक कूड़े के अलावा जानवरों के शव ही फंसे मिले हैं। कई जानवरों के शव प्लास्टिक की बोरियों में मिले हैं।
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कैसे मिल पाएगा बेटे का शव
संजीत अपहरण हत्याकांड के खुलासे के बाद पांडु नदी में शव की तलाश शुरू कराई गई। संजीत के पिता चमन सिंह ने बताया कि पुलिस ने जब आरोपियों से मिलवाया था, तब कुलदीप, नीलू व ईशु ने शव के संबंध में अलग-अलग जानकारी दी थी। किसी ने शव को मेहरबान सिंह पुरवा के पास वाले पुल से तो किसी ने फतेहपुर में लोहे के पुल से फेंकने की बात कही था। ऐसे में बेटे का शव कैसे से मिल पाएगा।
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कानपुर के बर्रा से 22 जून को लैब टेक्नीशियन संजीत यादव (28) का अपहरण फिरौती के लिए उसके दोस्त ने साथियों के साथ मिलकर किया था। 26 जून को उसकी हत्या कर लाश पांडु नदी में फेंक दी थी। इसके बाद पुलिस को चकमा देकर 13 जुलाई को 30 लाख की फिरौती भी वसूल ली थी। बृहस्पतिवार रात पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोस्त कुलदीप, रामबाबू समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
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शव की तलाश में जुटी पुलिस
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पुलिस ने बताया कि कुलदीप संजीत के साथ सैंपल कलेक्शन का काम करता था। उसने रतनलाल नगर में किराये पर कमरा ले रखा था। 22 जून की रात शराब पिलाने के बहाने वह संजीत को अपने कमरे में लाया गया था। इसके बाद उसे बंधक बना लिया था। चार दिन तक बेहोशी के इंजेक्शन देकर उसे बंधक बनाकर रखा था। इसके बाद 26 जून को कुलदीप ने अपने दोस्त रामबाबू और तीन अन्य के साथ मिलकर संजीत की हत्या कर दी थी।
इसके बाद कुलदीप शव को अपनी कार में रखकर पांडु नदी में फेंक आया था। तीन दिन बाद 29 जून की शाम को संजीत के पिता चमन सिंह यादव को फोन कर फिरौती मांगी गई थी। परिजनों ने पुलिस के कहने पर मकान, जेवर बादि बेचकर जैसे तैसे 30 लाख रुपयों की व्यवस्था की और 13 जुलाई को अपहर्ताओं के सौंप दिए लेकिन पुलिस अपहर्ताओं को नहीं पकड़ पाई और वे 30 लाख लेकर भाग गए थे।