कानपुर में लैब टेक्नीशियन संजीत यादव के अपहरण के मामले में पुलिस की कदम-कदम पर लापरवाही रही है। थानेदार ने न तो समय पर कार्रवाई न की और न ही जिस मोबाइल नंबर से फिरौती मांगी गई उसे सर्विलांस पर लगाया। मामला सीओ गोविंदनगर और एसपी साउथ के भी संज्ञान में रहा, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। इंस्पेक्टर रणजीत राय पर तो गाज गिर गई लेकिन एसपी और सीओ की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। 22 जून की रात नौ से दस बजे के बीच संजीत का अपहरण हुआ था।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : amar ujala
रात पौने दस बजे बर्रा विश्व बैंक निवासी राहुल ने संजीत को आखिरी कॉल की थी। उसके बाद से संजीत का मोबाइल बंद है। पुलिस ने दूसरे दिन 23 जून को गुमशुदगी दर्ज की। बाद में 26 तारीख को राहुल पर अपहरण की रिपोर्ट दर्ज हिरासत में ले लिया। न उससे सही से पूछताछ की और न ही पुलिस ने संजीत के मोबाइल नंबर की सीडीआर को खंगाला। फिर 29 तारीख को फिरौती का कॉल परिजनों के पास पहुंचा। उन्होंने पुलिस को सूचना दी लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। अगर उस वक्त पुलिस सक्रिय होती तो शायद संजीत अभी तक मिल चुका होता।
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हम पकड़ लेंगे, तुम परेशान न हो
परिजन लगातार बर्रा थाने के चक्कर लगा रहे थे। उन्होंने इंस्पेक्टर रणजीत राय से मदद की गुहार भी लगाई। इस पर इंस्पेक्टर का कहता था कि अपहरण करने वालों को पकड़ना हमारा काम है। तुम परेशान न हो। संजीत मिल जाएगा। लेकिन वह कोई काम नहीं करता था। दिन-बीतते गए लेकिन संजीत नहीं मिला।
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एसपी-सीओ भी सवालों के घेरे में
इतनी बड़ी वारदात के बाद एसपी साउथ ने कई बयान जारी किए, जिनमें विरोधाभास रहा। पहले बताया कि बैग देते वक्त पुलिस साथ में नहीं थी, परिजनों ने बैग दिया है। कुछ ही देर बाद एक वीडियो सामने आया जिसमें एसपी साउथ अपर्णा ने बताया कि पुलिस ऊपर थी, बदमाश नीचे थे। दूरी अधिक थी, जब पुलिस पहुंचती तब तक बदमाश चंपत हो गए। साफ है कि पुलिस की रणनीति फेल रही और बदमाश उसकी नाक के नीचे से फरार हो गए। एसपी और तत्कालीन सीओ मनोज कुमार गुप्ता दोनों को घटना की शुरू से ही जानकारी थी। इसलिए ये दोनों अफसर भी सवालों के घेरे में हैं। हालांकि 11 तारीख से सीओ बदल गए हैं। अब विकास पांडेय सीओ गोविंद नगर है। ज्वाइन करते ही वह दो दिन के लिए बाहर चले गए थे।
पीड़ित को किया नजरअंदाज
संजीत की बहन रुचि ने बताया कि वह 12 तारीख को एसपी साउथ से मिलीं थीं। तब यह तय हुआ था कि पैसों भरा बैग (पुलिस का दावा बैग में पैसे नहीं थे) किस तरह बदमाशों को देने हैं। पुलिस कैसे उनको पकड़ेगी। रुचि के मुताबिक इस दौरान उन्होंने कहा था कि बैग में जीपीएस की चिप लगवा दें। जिससे बदमाश ट्रेस हो सकें। इस पर एसपी ने कहा था कि क्या करना है, कैसे करना है, उनको पता है। रुचि के मुताबिक एसपी ने कहा था कि छोटे-छोटे काम के लिए यहां आने की जरूरत नहीं है।