दहशतगर्द विकास दुबे ग्रामीणों की जमीनों पर कब्जा करने के साथ ही गांव के बाहर जंगलों को साफ करवाकर सरकारी जमीन पर कब्जा कर रहा था। करीब 100 बीघा जमीन वो साफ करवा चुका था। यहां पर फार्म हाउस बनाने के साथ कई और उपयोग करने की फिराक में था। वहां बरामद जेसीबी से इन जंगलों में पेड़ कटाई का काम चल रहा था।
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kanpur encounter SIT
- फोटो : अमर उजाला
ये खुलासा पुलिस की जांच में हुआ है। पुलिस के मुताबिक गांव के बाहर शिवली की तरफ कई किलीमीटर में जंगल है। विकास जेसीबी लगवाकर जंगल का सफाया कराने में जुटा था। उसके गुर्गे दिन रात काम में लगे थे। प्रशासनिक अफसर भी आंखें मूंदे हुए थे। खेतों पर कब्जे हुए, जंगल का सफाया हुआ और किसानों की जमीनें छीन लीं गईं।
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मगर एसडीएम, लेखपाल, तहसीलदार ये सब खामोश रहे। ये सब विकास दुबे की कठपुतली थे। ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई मगर जनप्रतिनिधियों ने भी ग्रामीणों की मदद नहीं की। पुलिस ने इन बिंदुओं को जांच में शामिल कर प्रशासनिक अधिकारियों को जानकारी दी है। दहशतगर्द विकास दुबे ने इलाके के 18 गांवों की करीब 200 बीघा जमीन कब्जा कर रखी थी।
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फसल पर भी वो हर सीजन में किसानों से मोटी रकम वसूलता था। बिकरू व उसके आसपास के ग्रामीणों ने पुलिस-प्रशासन के अलावा एसआईटी व न्यायिक आयोग को बताया कि विकास की दहशत के चलते वो लोग कभी भी अपने मन की फसल नहीं बोते थे। जो विकास कहता था वो ही करना पड़ता था।
उसने जमीन या तो जबरन लिखवा ली या सीधे कब्जा कर लिया। गांव निवासी जमालुद्दीन, इम्तियाज, गफूर जैसे आधा दर्जन लोगों ने न्यायिक आयोग के सामने बताया कि विकास ने किसी दो तो किसी की तीन बीघा या इससे अधिक जमीन कब्जा कर ली थी। उसके गुर्गे खेती करवाते थे या फिर बेच देते थे।