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कानपुर एनकाउंटर: डीएम की रिपोर्ट में फंसा था विकास दुबे का अरबति खजांची जय बाजपेई, अफसर बदले और...

Sun, 19 Jul 2020 10:00 AM IST
शाहरुख खान आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर
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Vikas Dubey case - फोटो : अमर उजाला
प्रिंटिंग प्रेस में मामूली नौकरी और फिर पंचर की दुकान चलाने वाला कुछ ही सालों में अरबपति कैसे बन गया। इस सवाल को जून-2017 में एक प्रार्थना पत्र देकर शिकायतकर्ता ने तत्कालीन कमिश्नर पीके महांति के सामने उठाया और जांच की मांग की थी। कमिश्नर ने तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह को जांच के आदेश दिए तो 29 अगस्त 2017 को तत्कालीन एसीएम पीसी श्रीवास्तव व सीओ नजीराबाद नवीन कुमार सिंह ने जो जांच रिपोर्ट सौंपी, उसमें जय व रजय समेत परिवारीजनों की प्रॉपर्टी के मूल्यांकन, उसकी खरीद व आय के स्रोत के संबंध में आयकर विभाग से गहन जांच की संस्तुति भी की थी, लेकिन इस रिपोर्ट पर कितना अमल हुआ, कोई अतापता नहीं है। अफसर बदलते ही रिपोर्ट दबा दी गई। अब बिकरू कांड के बाद विकास दुबे से उसके संबंधों का खुलासा हुआ तो एक-एक कर सारे कारनामों से धूल छंट रही है।
 
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Kanpur encounter - फोटो : अमर उजाला
ये की गई थी शिकायत 
शिकायतकर्ता ने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया था कि जय बाजपेई 2005-06 में प्रिंटिंग की दुकान में चार हजार रुपये महीने पर स्क्रीन धोने का काम करता था। भाई रजयकांत घर के बाहर पान की दुकान लगाता था। इतने कम समय में इन्होंने अपने, पत्नी श्वेता, भाभी पुष्पा और अन्य भाइयों के नाम से कई नामी-बेनामी संपत्तियां, सोने-चांदी के जेवरातों के अलावा लग्जरी वाहन भी खरीदे हैं। दुबई की यात्रा की। इनके पास नोट गिनने की मशीन है। 
नजीराबाद, बजरिया, चौबेपुर, सीसामऊ समेत कई थानों में विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। सपा शासन में सपा विधायक के करीबी होने के चलते जय को एसपीओ भी बनाया गया था। पासपोर्ट व शस्त्र लाइसेंस भी जारी किए गए। भाई रजय फर्जी गनर के मामले में 22 जून 2017 को बजरिया थाने में पकड़ा गया था। इसमें होमगार्ड महेंद्र सिंह यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, जबकि रजय बच गया। 2011 से 2017 के बीच अरबों रुपये की संपत्तियां खरीदी गईं। इन सभी मामलों की सीबीआई, ईडी व आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा से जांच कराई जानी चाहिए।
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जय बाजपेई - फोटो : अमर उजाला
अफसरों की जांच रिपोर्ट
अफसरों की रिपोर्ट में कहा गया कि जय और रजय सपा विधायक के नजदीकी हैं और प्रॉपर्टी डीलिंग व ठेकेदारी का काम करते हैं। जय के खिलाफ कई मुकदमे भी दर्ज हैं। इनमें से थाना बजरिया में संतलाल कुरील ने हत्या का प्रयास और एससीएसटी के तहत जय, अजय, रजय व चार अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें सबूत न मिलने पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। जबकि, 20 मई 2017 को केडीए के मुख्य अभियंता की तहरीर पर जय के खिलाफ मकान की सील तोड़कर अवैध निर्माण शुरू कर देने के संबंध में दर्ज किए गए। मुकदमे में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है।

 

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Kanpur encounter - फोटो : अमर उजाला
शिकायतकर्ता के आरोप
शिकायतकर्ता ने प्रार्थना पत्र में जय द्वारा खरीदी गई निमभनलिखित संपत्तियों और उसकी बाजारी कीमत का जिक्र किया था। इसके अलावा कई और बेनामी संपत्तियां होने का भी दावा किया था।
111/478 ब्रह्मनगर कीमत लगभग 4 करोड़
111/481 ब्रह्मनगर कीमत लगभग 5 करोड़
107/299 ब्रह्मनगर कीमत लगभग 2 करोड़
107/300 ब्रह्मनगर कीमत लगभग 2 करोड़
107/292ए ब्रह्मनगर कीमत लगभग 4 करोड़
107/298 ब्रह्मनगर कीमत लगभग 3 करोड़
आर्यनगर में कई फ्लैट्स कीमत लगभग 5 करोड़
261-3 ई ब्लॉक पनकी में डुप्लेक्स फ्लैट कीमत लगभग 2 करोड़
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Kanpur encounter - फोटो : अमर उजाला
जय बाजपेई के जवाब
जयकांत वाजपेई ने जांच के दौरान अधिकारियों को खरीदी गई संपत्तियों के दस्तावेज दिखाए। इनमें संपत्तियों की कीमत काफी कम थी।
111/478 ब्रह्मनगर कीमत 15 लाख रुपये फरवरी 2013 में खरीदा।
111/481ए हर्षनगर कीमत 16 लाख रुपये दिसंबर 2015 में खरीदा।
107/293ए ब्रह्मनगर कीमत 95 लाख रुपये में खरीदा।
107/300 ब्रह्मनगर की 18 वर्ग गज जगह कीमत 3 लाख रुपये मई 2012 में खरीदी
107/300 ब्रह्मनगर की 36 वर्ग गज जगह कीमत 6 लाख रुपये मई 2012 में खरीदने का इकरारनामा किया।
107/300 ब्रह्मनगर की 30.09 वर्ग मीटर जगह कीमत 6 लाख रुपये खरीदने का इकरारनामा किया।
107/298 ब्रह्मनगर कीमत 35 लाख रुपये नवंबर 2015 में पत्नी श्वेता के नाम से खरीदा। 
 
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जय बाजपेई - फोटो : अमर उजाला
जय ने कहा था
जांच में हुई पूछताछ के दौरान जय ने बताया था कि 15-16 साल पहले वह ब्रह्मनगर में ही एक प्रिंटर्स के यहां नौकरी करता था। अब बैट्री, इनवर्टर व कार एसेसरीज की दुकान है। करीब डेढ़ साल पहले होली पर दुबई घूमने गया था। जो मकान खरीदे हैं, वह बैंक से ऋण लेकर, गांव की पुश्तैनी जमीन बेचकर और किरायेदारों से पूर्व में ही पगड़ी लेकर खरीदे हैं। लगातार दस साल से इनकम टैक्स दे रहा हूं और मकानों का किराया भी मेरी आय का स्रोत है।
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