चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू कांड से जुड़े अपराधियों को बढ़ावा कौन देता था। इसकी जांच के लिए एसआईटी टीम रविवार को शिवली कोतवाली पहुंची। वहां दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की कोतवाली में हत्या से लेकर विकास व उसके साथियों पर दर्ज अन्य मामलों का विवरण जुटाया।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
शिवली नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन व बिकरू के पूर्व प्रधान समेत तीन लोगों से बात की। शासन की ओर से गठित एसआईटी टीम में अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी, अपर पुलिस महानिदेशक हरीराम शर्मा, पुलिस उप महानिरीक्षक जे रवींद्र गौड़ जांच करने शिवली कोतवाली पहुंचे।
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12 अक्तूबर 2001 में शिवली कोतवाली में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की हत्या के मामले समेत विकास व उसके साथियों पर दर्ज आपराधिक मामलों का विवरण जुटाया। खासतौर पर टीम की छानबीन का बिंदु यह रहा है कि अपराध की दुनिया आबाद कराने में विकास का साथ देने वाले कौन-कौन लोग रहे।
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इसके लिए टीम ने शिवली के पूर्व चेयरमैन राधाकृष्ण बाजपेई उर्फ लल्लन और कस्बे के प्रेमशंकर और बिकरू गांव के पूर्व प्रधान अमर सिंह को कोतवाली बुलाकर बात की। टीम के लोग एक घंटे कोतवाली में रुके। टीम ने विकास व उससे जुड़े साथियों पर कोतवाली में दर्ज हर छोटे से लेकर बड़े मामले तक का रिकार्ड देखा।
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किस मामले में कौन बरी हुआ और साथ ही मुकदमें में क्या हुआ, यह विवरण लिया। इस दौरान उनके साथ कानपुर डीएम ब्रह्मदेव तिवारी, एसएसपी दिनेश कुमार पी, जिले के एडीएम प्रशासन पंकज वर्मा, सीओ रामशरण सिंह मौजूद रहे।
एसआईटी ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों के बयान लिए और साक्ष्य जुटाए। गांव वालों ने एसआईटी को विकास के जुलम की दास्तान सुनाई और बताया कि वह किस तरह जमीन के धंधे में लिप्त था। जमीन की खरीदारी से लेकर गाड़ी की खरीद तक के लिए विकास को रंगदारी देनी होती थी। उसने किसी की जमीन पर कब्जा किया तो किसी की जमीन हड़प ली। इसके आगे किसी की नहीं चली क्योंकि पुलिस से उसकी गहरी सांठगांठ थी।