कानपुर एनकाउंटर के बाद विकास के एक-एक साथी को पुलिस तलाश रही है। मुंबई एटीएस ने गुड्डन को गिरफ्तार कर यूपी एसटीएफ को सौंपा है। पूछताछ में गुड्डन ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। कानपुर देहात के शिवली कस्बे के कुढ़वा गांव निवासी जिला पंचायत सदस्य अरविंद त्रिवेदी उर्फ गुड्डन वर्तमान में रूरा स्थित घर में रहता था। आठवीं तक पढ़ाई करने वाला गुड्डन कद काठी से लंबा चौड़ा है।
विज्ञापन
2 of 5
kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
गांव में शुरू से ही दबंगई करने की आदत रही। उसने दुधारू पशुओं को खरीदने बेचने का व्यापार शुरू किया तो बिकरू गांव में जाने के दौरान 1998 में मुलाकात विकास दुबे से हो गई। चर्चा है कि विकास दुबे ने पशुओं के व्यापार में गुड्डन के साथ काफी रुपये लगाए थे। लगातार संपर्क में रहने के बाद भरोसा जीतकर वर्ष 2000 में विकास के साथ अंगरक्षक के रूप में जुड़ गया। वह विकास का बहुत करीबी हो गया। वर्ष 2001 में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला हत्याकांड में विकास के जेल जाने पर गुड्डन काफी दिनों तक भूमिगत रहा।
विज्ञापन
3 of 5
kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
उसका नाम इस घटनाक्रम में नहीं आया। इसके बाद गुड्डन पंजाब व हरियाणा से अच्छी नस्ल की दूध वाली भैंस व गाय लाकर क्षेत्र में बेचने लगा। उसका व्यापार अच्छा चला। घर में उसके भाई दूध का काम करते थे जबकि गुड्डन दुधारू पशुओं को खरीदने-बेचने के व्यापार में लगा रहा। 2005 में विकास के जेल से बाहर आने के बाद गुड्डन ने फिर उससे नजदीकी बढ़ाई।
4 of 5
Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
बताते हैं कि प्रधानी के चुनाव में विकास की हनक का इस्तेमाल करके गुड्डन त्रिवेदी 2005 खुद गांव का प्रधान बन गया। विकास के सहारे राजनीति शुरू कर दी। 2015 में वह जगनपुर सीट से जिला पंचायत सदस्य बन गया। इसी वर्ष साथ में हुए चुनाव में उसकी पत्नी कंचन त्रिवेदी गांव की प्रधान चुनी गई। विकास का दबदबा इतना था कि चौबेपुर व शिवली क्षेत्र के 30 ग्राम पंचायतों के प्रधान उसके इशारे पर बनते थे।
बता दें कानपुर के पांच लाख के इनामी विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद उसके दो अन्य साथी गुड्डन त्रिवेदी व सुशील कुमार सोनू को मुंबई एटीएस ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को मुंबई से सटे ठाणे इलाके से गिरफ्तार किया था। इसके बाद से गुड्डन त्रिवेदी से पूछताछ जारी है।