कानपुर के चौबेपुर के बिकरू गांव में हुए एनकाउंटर के मामले की जांच एसआईटी (स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम) ने शुरू कर दी है। एसआईटी रविवार को बिकरू गांव पहुंची और ग्रामीणों के बयान लिए। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। उसके बाद शिवली और चौबेपुर थाने में विकास दुबे का आपराधिक इतिहास खंगाला।
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kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
शहर पुलिस से एनकाउंटर संबंधी एफआईआर और अब तक की कार्रवाई का ब्योरा लिया। रविवार सुबह करीब 11 बजे एसआईटी के मुखिया अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी, एडीजी हरिराम शर्मा और आईजी जे रवींद्र गौड़ बिकरू गांव पहुंचे।
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सबसे पहले जमींदोज किए गए विकास के घर की छानबीन की। फिर जहां पांच पुलिसकर्मियों के शव जलाने के लिए इकट्ठा किए गए थे, उस जगह का निरीक्षण किया। विकास के मामा का घर, जहां डीएसपी देवेंद्र मिश्र की नृशंस हत्या की गई थी, टीम वहां भी पहुंची। इसके बाद एसआईटी शिवली थाने और आखिर में चौबेपुर थाने गई। यहां से विकास का पूरा रिकार्ड निकाला। केसों से जुड़े तमाम दस्तावेज भी ले गई। दोनों थानों में एक से डेढ़ घंटे तक टीम रही।
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ग्रामीणों ने बताई जुल्म की दास्तान
बिकरू गांव में एसआईटी ने छह और शिवली में पूर्व चेयरमैन लल्लन बाजपेई समेत आठ-दस लोगों से पूछताछ की। लोगों ने बताया कि किस तरह से विकास दुबे उन पर जुल्म करता था। जमीन कब्जा करने से लेकर वसूली और मारता पीटता था। विकास की दहशत से थाना पुलिस खामोश रहती थी।
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- फोटो : अमर उजाला
बता दें दो जुलाई की रात को बिकरू स्थित विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस कर्मियों पर घात लगाकर बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया। जिसमें सीओ सहित आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए। जिसके बाद विकास फरार हो गया। पुलिस ने एक एक कर विकास के पांच साथियों को मुठभेड़ में ढेर कर दिया।
नौ जुलाई को एमपी पुलिस ने विकास दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया था। जिसके बाद कानपुर लाते समय कार पलटने के दौरान विकास ने पुलिस कर्मी की पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस पर हमला कर दिया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसे ढेर कर दिया। विकास के एनकाउंटर के बाद यूपी सरकार सवालों के घेरे में है।