19 वर्ष पूर्व भाजपा की ही सरकार में सत्ताधारी दल के दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री को थाने में घुसकर मौत के घाट उतारने वाला अपराधी यदि अभी भी छुट्टा घूम रहा है तो यह समझने के लिए काफी है कि बिना राजनीतिक संरक्षण के यह संभव नहीं है।
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विकास दुबे ने पुलिस टीम पर किया हमला
- फोटो : amar ujala
सरकार किसी की भी रही हो, विकास दुबे की बादशाहत हमेशा कायम रही। अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद इसी राजनीतिक संरक्षण का फायदा उठाकर विकास दुबे ने जमीन की सौदेबाजी को अपना मुख्य कारोबार बना लिया।
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विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
बेसकीमती जमीनों के मालिकों को धमकाकर कम कीमत में खरीद लेना विकास का शगल था। राजनीतिक संरक्षण देने वालों ने भी इस बात का फायदा उठाया। आखिरकार विकास अपने और अपने आकाओं के लिए कुख्यात भू माफिया बन बैठा।
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विकास दुबे (काले कोट में)
- फोटो : amar ujala
बताते हैं कि कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, औरैया तक में विकास की बादशाहत कायम है। इन जिलों में कहीं भी कोई कीमती जमीन दिखती तो उसकी सौदेबाजी विकास दुबे और गुर्गों के जरिये ही होती।
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हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
आसपास के कई जिलों के सफेदपोस प्रॉपर्टी डीलर तक उससे अपना काम निकलवाते थे। महंगी जमीन को सस्ते में खरीदवाकर विकास अपना मोटा कमीशन लेता था। उसकी कमाई का यही असली जरिया था।
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कानपुर एनकाउंटर में आठ पुलिसकर्मी शहीद
- फोटो : अमर उजासा
बताते हैं कि विकास दुबे की कानपुर, लखनऊ, आगरा समेत प्रदेश के कई शहरों में कीमती जमीनें और मकान हैं, जिनकी कीमत करोड़ों में है। पत्नी और एक बेटा लखनऊ के ही एक मकान में रहते हैं।
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कानपुर एनकाउंटर में शहीद पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
ठिकाने बदलने के लिए खरीदता था मकान
अपराध और राजनीति में दखल रखने की वजह से विकास के साथ लुकाछिपी का खेल चल रहा था। जब वह सत्ता पक्ष के नेता के करीब होता तो खुलेआम अपनी हनक दिखाता। जब उसे किसी नेता का साथ नहीं मिलता तो वह छिपकर रहता।
बीते 20 वर्षों से वह इसी तरह की जिंदगी जी रहा है। इन वर्षों में कई मामलों में जेल भी गया और जमानत पर छूटता भी गया। पुलिस से बचने के लिए वह पैसा तो फेंकता ही था, अपने मकान भी बदलता था। यह काम उसके गुर्गे करते थे। ठिकाने बदलने के लिए ही उसने कई शहरों में मकान खरीदे और बेचे। हालांकि ये भी सच है कि उसकी ज्यादातर संपत्तियां उसके खुद के नाम पर नहीं हैं।