कानपुर एनकाउंटर के बाद लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। अब एक और खुलासा हुआ है। चौबेपुर एसओ बुधवार को एक मामले में पूछताछ करने हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के घर गए थे। पूछताछ के दौरान ही विकास ने एसओ से हाथापाई कर दी थी। दरअसल, जमीन पर कब्जे को लेकर जादेपुर गस्सा गांव निवासी राहुल तिवारी ने चौबेपुर एसओ विनय तिवारी से शिकायत की थी।
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बीच में विनय तिनारी ग्रे जैकेट में
- फोटो : अमर उजाला
इस संबंध में एसओ बुधवार को विकास दुबे से पूछताछ करने उसके घर गए थे। पूछताछ के दौरान ही विकास ने एसओ से हाथापाई कर दी थी। उस वक्त एसओ ने वहां से वापस होने में ही अपनी भलाई समझी। गुरुवार को पुलिस ने राहुल की तहरीर पर विकास के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। राहुल के अनुसार विकास दुबे ने उसके ससुर लल्लन शुक्ला की जमीन जबरन अपने नाम बैनामा करा ली थी।
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हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
इसे लेकर उन्होंने विकास के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा भी दायर किया था। इसी मुकदमे को वापस लेने का दबाव बनाने केलिए विकास दुबे, सुनील, बाल गोविंद, अमर दुबे, शिवम दुबे ने एक जुलाई को उसे बंधक बना कर पीटा था।
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विकास दुबे
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विकास को पता था, पुलिस आ रही
आपको बता दें कि चौबेपुर के बिकरू गांव में हुई वीभत्स वारदात में दबिश देने गई पुलिस टीम को धोखा मिला। किसी अपने ने ही मुखबिरी कर बदमाशों को दबिश की जानकारी दे दी। यही वजह है कि बदमाश पुलिस से अधिक तैयारी में थे। वे असलहों से लैस थे और संख्या पचास से अधिक थी। रास्तों को भी ब्लॉक कर दिया था। एक रास्ते को आड़ी-तिरछी जेसीबी लगाकर रोक दिया गया था।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
फोर्स के गाड़ियों से उतरते ही बदमाशों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए। पुलिस अफसर मुखबिरी करने वाले के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। पुलिस ने जिस मामले में दबिश दी वो केस गुरुवार शाम को ही दर्ज हुआ। सीओ बिल्हौर देवेन्द्र मिश्र ने एसएसपी को मामले की जानकारी दी और फिर विकास दुबे को पकड़ने का निर्णय लिया। कुछ ही घंटे बाद गुरुवार रात साढ़े 12 बजे सीओ तीन थानों की फोर्स लेकर गांव पहुंचे।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
इन तीन-चार घंटों के बीच किसी ने विकास को उसके घर पर दबिश होने की जानकारी दे दी। वह सतर्क हो गया। अपने गैंग के लोगों को बुलाया। असलहे लेकर छतों पर, गलियों में घात लगाकर बैठ गए। अपने घर से पहले एक जेसीबी भी सड़क पर खड़ी दी, जिससे कोई भी वाहन आगे न आ सके। इन सारे इंतजाम करने से साफ है कि बदमाश पुलिसकर्मियों के आने का इंतजार कर रहे थे।
छतों से चलाईं गोलियां, पत्थर-बम
विकास अपने घर की छत पर था। उसके गुर्गे गली के दोनों तरफ घरों की छतों पर असलहों से लैस बैठे थे। मौके पर पहुंची पुलिस का ध्यान विकास के मकान की तरफ था। इसलिए पुलिस कर्मियों ने मकान की तरफ आगे बढ़ने का प्रयास किया। इसी बीच दोनों तरफ से छतों से गोलियां, पत्थर और बम चलने लगे। पुलिसकर्मी समझ नहीं सके कि वे जान बचाकर किस तरफ भागे।