दहशतगर्द विकास दुबे को आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने का जरा भी पछतावा नहीं था। उसका कहना था सीओ पर गुस्सा, अपने एनकाउंटर का डर था और गिरफ्तारी न देने की ठान ली थी। इसलिए हमला कर पुलिसकर्मियों को मार दिया। बोला..अब जो हो गया सो हो गया।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
एसटीएफ जब विकास को उज्जैन से कानपुर ला रही थी तब ये बातें उसने रास्ते में कहीं थीं। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक उसका व्यवहार और बातचीत साइको किलर की तरह थी। सनक में उसने इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे डाला।
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एसटीएफ को उसने बताया था कि जब उसको थाने से सूचना मिली तो उसने मोर्चा लेने की ठान ली। उसके साथी अमर व अतुल समेत कई अन्य शराब के नशे में धुत थे। जब इन लोगों ने पुलिस पर हमला कर गोलियां चलाईं तो खुद नहीं पता था कि वो कितनी गाेलियां मार रहे हैं।
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kanpur encounter
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मुझे लगा घायल हुए होंगे
जब उससे सवाल किया गया कि उसने पुलिसकर्मियों को क्यों मार दिया तो वो बोला कि मुझे लगा पुलिसवाले केवल घायल हुए होंगे। आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई, ये टीवी पर खबर देखकर पता चला।इसके बाद वो दो दिन शिवली में रूका फिर फरीदाबाद निकला गया।
डर नहीं लग रहा था
एसटीएफ ने उससे पूछा कि वारदात के बाद बेखौफ होकर फरीदाबाद, जयपुर और उज्जैन में घूमता रहा तो डर नहीं लगा। इस पर विकास ने जवाब दिया है कि मुझे अपना अंजाम पता था। इसलिए डर नहीं लग रहा था। सरेंडर कर जेल जाने की तैयारी थी। इसके लिए उसने कई वकीलों से संपर्क किया। पचास हजार रुपये एडवांस देने की बात भी हो गई थी। मगर उसके पहले ही वो गिरफ्तार हो गया और फिर मुठभेड़ में मार दिया गया।