फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kanpur Encounter: बड़ा खुलासा, मौत का खेल खेलने के बाद एक अधिकारी ने दी थी शरण, संदीप पाल बन घूमा

Mon, 13 Jul 2020 02:18 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 5
kanpur encounter - फोटो : amar ujala
दहशतगर्द विकास दुबे को कानपुर देहात की नगर पालिका के एक अधिकारी ने शरण दी थी। उसी ने औरैया तक उसको पहुंचाने में मदद की। ये खुलासा एसटीएफ और पुलिस की जांच में हुआ है। शरण देने वाले अधिकारी से पूछताछ शुरू हो गई है। जल्द कार्रवाई संभव है।

 
विज्ञापन

2 of 5
kanpur encounter news - फोटो : amar ujala
फरार होने के बाद विकास ने जो भी टिकट लिए, वो संदीप पाल के नाम से लिए। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक वारदात को अंजाम देने के बाद विकास दुबे अपने दो साथियों अमर दुबे व प्रभात मिश्र के साथ शिवली पहुंचा। यहां पर नगर पालिका के एक अधिकारी ने उनको अपने घर पर ठहराया। विकास दो दिन वहीं पड़ा रहा। फिर अधिकारी ने उसको एक कार मुहैया कराई जिससे ये तीनों औरैया पहुंचे। यहां से ट्रक पकड़कर फरीदाबाद गए।

 
विज्ञापन

3 of 5
kanpur encounter news - फोटो : amar ujala
नाम के साथ बदला हुलिया 
विकास ने एसटीएफ को पूछताछ में बताया था कि उसने टीवी पर अपनी फोटो देखी थीं। तीन चार फोटो लगभग एकजैसी ही थीं। इसलिए उसने तत्काल अपना हुलिया बदला। गमछा ओढ़ा और चश्मा-मास्क लगा लिया। दिल्ली से जयपुर और वहां से उज्जैन जाने को जो बस के टिकट लिये उसमें उसने अपना नाम संदीप पाल दर्ज कराया था। एसटीएफ ने टिकट आदि बरामद कर लिये थे। बस स्टैंड के फुटेज भी जुटाए हैं।

 

4 of 5
kanpur encounter - फोटो : amar ujala
मोबाइल तोड़ दिया था
शिवली पहुंचते ही विकास ने मोबाइल को तोड़कर फेंक दिया था। इससे सर्विलांस उसको ट्रेस नहीं कर सकी। जब उससे सवाल किया गया कि उसने पुलिसकर्मियों को क्यों मार दिया तो वो बोला कि मुझे लगा पुलिसवाले केवल घायल हुए होंगे। आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई, ये टीवी पर खबर देखकर पता चला।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
kanpur encounter - फोटो : amar ujala
विकास बोला मुझे अंजाम पता था
एसटीएफ ने उससे पूछा कि वारदात के बाद बेखौफ होकर फरीदाबाद, जयपुर और उज्जैन में घूमता रहा तो डर नहीं लगा। इस पर विकास ने जवाब दिया है कि मुझे अपना अंजाम पता था। इसलिए डर नहीं लग रहा था। सरेंडर कर जेल जाने की तैयारी थी। इसके लिए उसने कई वकीलों से संपर्क किया।पचास हजार रुपये एडवांस देने की बात भी हो गई थी। मगर उसके पहले ही वो गिरफ्तार हो गया और फिर मुठभेड़ में मार दिया गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें