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ऐसे बढ़ता गया विकास दुबे का दुस्साहस, राजनेताओं से भी मिलता था संरक्षण

Tue, 07 Jul 2020 01:45 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
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विकास दुबे - फोटो : अमर उजाला
साल 2001 में कानपुर देहात के शिवली पुलिस स्टेशन के भीतर दिन-दहाड़े विकास दुबे ने भाजपा नेता संतोष शुक्ला की हत्या कर दी थी। इस घटना के चार महीने बाद दुबे ने कई राजनेताओं के साथ अदालत में आत्मसमर्पण किया था।

 
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विकास दुबे - फोटो : amar ujala
इस हत्या के चश्मदीद गवाह 25 पुलिसकर्मी एक के बाद एक अदालत में गवाही देने से मुकर गए। इस हत्या का जांच अधिकारी भी अदालत में अपने बयान से मुकर गया। इस तरह से दुबे को बरी कर दिया गया था।

 
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विकास दुबे के घर से मिला पुलिस वायरलेस का माइक - फोटो : अमर उजाला
संतोष शुक्ला की हत्या में नाम आने के बाद से ही विकास दुबे का दुस्साहसी बढ़ गया था। इस वारदात के बाद राजनेताओं और शासन, प्रशासन में उसका दबदबा और बढ़ गया। इसी का नतीजा है कि उस समय उसकी रायफल का लाइसेंस तक निरस्त नहीं हुआ था। 
 

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विकास दुबे के घर से मिले हथियार - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद उसके पास असलहों की संख्या बढ़ने लगी। संतोष शुक्ला के भाई मनोज शुक्ला का कहना है कि उन्होंने बाकायदा लाइसेंस निरस्त करने की सभी औपचारिकता पूरी की थी। लेकिन विकास के दबदबे और राजनेताओं के संरक्षण की वजह से उसका लाइसेंस निरस्त नहीं हुआ। 

 
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जांच करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
मनोज के मुताबिक सारा मामला शिवली थाने में दर्ज है। कोई भी जाकर पता कर सकता है। इस बीच विकास के पास 17 लाइसेंसी हथियार होने की बात भी सामने आई है। ये सभी असलहे उसके परिजनों, गांव के लोगों के नाम से बनवाए गए हैं जो कानपुर देहात, कानपुर नगर के अलावा लखनऊ और दूसरे जनपदों के उनके ठिकाने के पते से दर्ज हैं। 

 
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विकास दुबे के घर से बरामद सामान - फोटो : amar ujala
बताया जा रहा है कि लाइसेंस का पूरा खर्च खुद विकास उठाता है और किताब सहित असलहे भी अपने पास ही रखता है। इस खेल में वह माहिर बताया जाता है। पुलिस टीम पर फायरिंग करने वालों के हाथ में विकास के यही असलहे बताए जा रहे हैं। इतना बड़ा अपराधी होने के बावजूद उसके असलहों के लाइसेंस का निरस्त होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
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