दहशतगर्द विकास दुबे के दुस्साहस की एक-एक करके पोल खोल रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार वर्ष 1998 में विकास के खिलाफ शिवली थाने में दो हत्या के प्रयास, धमकी, गालीगलौज के मामले दर्ज थे। इस पर शिवली थाने के तत्कालीन एसएसआई ब्रिजेंद्र सिंह, एसएसआई शिव सिंह, कांस्टेबल राम किशोर, लायक सिंह, होमगार्ड प्रतिपाल सिंह, शांति कुमार ने बिकरू गांव से विकास और उसके भाई दीपू को पकड़ कर अभिरक्षा में लिया था।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
विकास की मां, पत्नी और भाई अविनाश दुबे ने 15-16 लोगों के साथ जीप को घेर लिया था। असलहे से लैस विकास के गुर्गों ने पुलिस को पीटकर वर्दी तक फाड़ दी। विकास पुलिस कर्मियाें को जान से मारने की धमकी देकर भाग निकला था। इसके बाद से शिवली पुलिस दोबारा विकास दुबे के घर तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।
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विकास व गुर्गों को जुटा रही ब्यौरा
एसएसपी के आदेश पर थानेवार विकास दुबे और उसके साथियों का ब्यौरा एकत्रित किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक विकास दुबे और उसके गुर्गों के शस्त्र लाइसेंस कैसे बने आदि के संबंध में भी ब्यौरा जुटाया जा रहा है, जिसे डीजीपी को सौंपा जाएगा। जांच के आधार पर संबंधित अधिकारियों, पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बता दें कि बिकरू गांव में दो जुलाई की रात को विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस की टीम पर घातलगाकर बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया था। जिसमें सीओ सहित आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए। पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई कर विकास दुबे के पांच साथियों को मुठभेड़ में मार गिराया।
वहीं यूपी एसटीएफ ने विकास के 12 साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। नौ जुलाई की सुबह उज्जैन से कानपुर लाते समय विकास की कार पलट गई। इस दौरान उसने सिपाही की पिस्टल छीन कर भागने की कोशिश की पर पुलिस ने मुठभेड़ में विकास को भी मार गिराया। इस पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी और जांच आयोग का गठन हुआ है।