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Kanpur: जहर घोलता कचरा और प्रशासन की चुप्पी, 13 दिन बाद भी नहीं हटा क्रोमियम का मलबा, भूजल प्रदूषण का बढ़ा खौफ

Fri, 31 Jul 2026 05:14 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई

सार

Kanpur News: महाराजपुर थाना क्षेत्र के पुरवामीर गांव में 18 जुलाई को मिले क्रोमियम युक्त औद्योगिक कचरे को 13 दिन बीत जाने के बाद भी नहीं हटाया गया है। बारिश के मौसम में इस जहरीले कचरे के भूजल में रिसने की आशंका से ग्रामीणों में गंभीर बीमारी और जल संकट का भारी भय व्याप्त है।
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पुरवामीर गांव में क्रोमियम कचरा - फोटो : amar ujala
कानपुर में महाराजपुर थाना क्षेत्र के पुरवामीर गांव में 18 जुलाई को मिले क्रोमियम युक्त औद्योगिक कचरे को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। घटना को 13 दिन बीत जाने के बाद भी कचरा वहीं पड़ा है, जिससे ग्रामीणों को भूगर्भ जल के दूषित होने का डर सताने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले गांव से सटे छिवली का पानी खराब हुआ था।





इसके बाद पुरवामीर गांव में स्थित तरंग रेस्टोरेंट की एक बोरिंग भी खराब हो गई थी। अब इस कचरे के चलते स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों का मानना है कि बारिश का पानी इस कचरे में रिसकर खेतों और फिर तालाबों के माध्यम से भूजल को प्रदूषित कर देगा। नाम न छापने की शर्त पर औंग कस्बे के कुछ मजदूरों ने बताया कि रासुपुर में स्थित एक फैक्टरी, जिसे खबरें छपने के बाद एक कद्दावर नेता के कहने पर बंद कराया गया था।
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पुरवामीर गांव में क्रोमियम कचरा - फोटो : amar ujala
भूजल प्रदूषण की विकराल समस्या
उसमें प्रदूषण नियंत्रण विभाग की लगातार छापेमारी के बाद रात के अंधेरे में गैस कटर से बड़ी-बड़ी मशीनें कटवाई गईं। बचा हुआ मलबा जेसीबी से वहीं दफना दिया गया। मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि फैक्ट्री में मनमानी होती थी और छापेमारी के बाद उन्हें मजदूरी तक नहीं दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग की लापरवाही से क्षेत्र में भूजल प्रदूषण की विकराल समस्या खड़ी हो गई है।
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महाराजपुर में क्रोमियम का कचरा - फोटो : amar ujala
फैक्ट्रियां लोगों के जीवन में जहर घोल रहीं
लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे में बिना मिलीभगत के फैक्ट्री चलना संभव नहीं था। अपने निजी स्वार्थ के लिए कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रही फैक्ट्रियां लोगों के जीवन में जहर घोल रही हैं। इस बीच रूम ढोड़ी घाट मार्ग पर कई डंपर कचरा फेंका मिला है। इस कचरे में औंग थाना क्षेत्र के रहसपुर गांव स्थित जीबीएफ मार्का का ईंट भी बरामद हुआ है, जिससे संदेह और गहरा गया है।

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महाराजपुर में क्रोमियम का कचरा - फोटो : amar ujala
वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाए
ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से मांग की है कि कचरे को तत्काल हटाकर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, अन्यथा आने वाले समय में पूरा क्षेत्र भूजल संकट की चपेट में आ जाएगा। दूषित पानी की जांच तथा स्वास्थ्य परीक्षण के लिए दो माह पहले समाजसेवियों ने लिखा था पत्र। उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष महेश वर्मा और महामंत्री रजत पांडे के प्रयासों से बीते माह पुरवामीर गांव में चार अनाथ बच्चों के लिए एक भवन की व्यवस्था की गई थी।
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क्रोमियम युक्त कचरे का सैंपल लेते प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारी - फोटो : amar ujala
अत्यधिक दूषित पानी पीने को मजबूर
इसके साथ ही बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया था जिसमें दूषित पानी पीने के कारण उनके शरीर पर कई गंभीर रोग पाए गए। व्यापार मंडल के महामंत्री रजत पांडे ने 26 मई को एसडीएम नरवल को मेल के माध्यम से प्रार्थना पत्र भेजा था। पत्र में बताया गया कि बच्चे अत्यधिक दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिसका टीडीएस करीब 870 पाया गया है।
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बारिश के पानी में तेजी से फैल रहा क्रोमियम युक्त हरा कचरा - फोटो : amar ujala
क्रोमियम कचरा डालने के बाद से समस्या गंभीर
गंदे और अशुद्ध पानी के सेवन से बच्चों को खुजली और स्केबीज जैसी त्वचा संबंधी बीमारियां हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी उसकी पुष्टि की थी। दूषित पानी के कारण बच्चों का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था। अब दो माह बाद गांव के लोग भी सामने आए हैं और मांग कर रहे हैं कि पूरे गांव के पानी की जांच कराई जाए। क्रोमियम कचरा डालने के बाद से समस्या गंभीर हो गई है।
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जहरीले क्रोमियम का ढेर - फोटो : amar ujala
पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी पीने योग्य नहीं है तो तत्काल शुद्ध पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। लोगों का आरोप है कि दो महीने पहले भी पानी पीने लायक नहीं था और अब दिन-ब-दिन स्थिति और खराब होती जा रही है। समाजसेवियों ने प्रशासन से बच्चों और ग्रामीणों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शीघ्र कार्रवाई की मांग की है ताकि दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
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