कानपुर के सचेंडी हादसे में 18 बेकसूर गरीब लोगों की जानें चली गईं लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही अभी भी जारी है। हादसे को चार दिन बीत गए लेकिन अब तक विभागीय जांच शुरू नहीं हो सकी। अब एडीजी जोन का कहना है कि हादसे के पीछे कौन-कौन जिम्मेदार है इसको स्पष्ट करने के लिए राजपत्रित अफसर से जांच कराएंगे। हैरानी की बात ये है कि जांच अधिकारी तक अभी तय नहीं किया गया है। अफसरों की बेपरवाही चरम पर है। हादसे को लेकर शुक्रवार को एडीजी जोन, पुलिस कमिश्नर समेत अन्य अफसरों ने बैठक भी की। हादसे के पीछे कई कारण सामने आ रहे थे। खासकर यातायात नियमों का उल्लंघन और जिम्मेदारों की लापरवाही उजागर हुई थी। पुलिस, एनएचएआई, आरटीओ आदि विभाग हादसे के पीछे सीधे जिम्मेदार हैं। इनकी जिम्मेदारी तय करने के लिए हादसे की जांच जरूरी है जो अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। केवल शुरुआत में सीओ सदर ने मामले की एक रिपोर्ट भेजकर खानापूर्ति की थी।
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कानपुर में भीषण सड़क हादसा
- फोटो : amar ujala
एडीजी जोन भानु भास्कर का कहना है कि हादसा बेहद गंभीर है। जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए जल्द से जल्द जांच शुरू की जाएगी। जांच राजपत्रित अफसर से कराई जाएगी।
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कानपुर सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला
बैठक में हुए कई निर्णय
एडीजी ने कहा कि हाईवे पर होने वाले हादसों को लेकर राज्य सुरक्षा समिति बनी हुई है। समिति क्या कर रही है। क्या जिम्मेदारी है किसी को कुछ नहीं पता। इसलिए इस पूरे मामले में एनएचएआई, आरटीओ, परिवहन और स्थानीय पुलिस की भूमिका जांची जाएगी।
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कानपुर दर्दनाक हादसा
- फोटो : अमर उजाला
ये हैं सीधे जिम्मेदार, अब जांच का है इंतजार
टेंपो और बस दोनों ओवरलोड थे। इसमें आरटीओ और पुलिस दोनों जिम्मेदार हैं। टेंपो विपरीत दिशा से आ रहा था। इसके पीछे भी पुलिस की जिम्मेदार है। हादसे की सूचना पर एनएचएआई की इमरजेंसी टीम नहीं पहुंची।
समय पर एंबुलेंस भी नहीं पहुंची थी। लिहाजा एनएचएआई और स्वास्थ्य विभाग भी 18 मौतों का जिम्मेदार है। अब देखना है कि विभागीय जांच में इन जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई की जाती है नहीं।