कन्नौज में जिला से जेल से दो कैदियों के भागने के मामले में नया मोड़ आ गया है। कैदी अंकित और शिवा रविवार की रात में नहीं, सोमवार की सुबह भागे थे। जेल में मिले सीसीटीवी फुटेज ने घटना की टाइमलाइन बदल दी है। दोनों बंदी सोमवार को सुबह 9:22 तक जेल के कैमरों में देखे गए थे।
कन्नौज जिला कारागार से दो बंदियों के भागने के मामले में नया तथ्य सामने आया है। दोनों बंदी रविवार रात को नहीं सोमवार सुबह जेल की दीवार फांदकर भागे थे। जेल के सीसीटीवी फुटेज से इसका खुलासा हुआ है। सीसीटीवी फुटेज में दोनों बंदी सोमवार सुबह 9:22 बजे तक जेल परिसर में मौजूद दिखाई दे रहे हैं।
जेल रिकॉर्ड के अनुसार, सोमवार सुबह 9:35 बजे बिजली आपूर्ति बाधित हुई और सीसीटीवी कैमरे बंद हो गए। अनुमान लगाया जा रहा है कि बंदियों को मालूम था कि सीसीटीवी फुटेज का इन्वर्टर से कनेक्शन नहीं है, इसी का फायदा उठाकर दोनों फरार हो गए।
सबसे गंभीर लापरवाही सुबह 10 बजे हुई जब पहली गिनती के दौरान दो बंदियों के कम होने के बावजूद किसी को भनक तक नहीं लगी। इसके बाद करीब 10:15 बजे कृषि कार्य के लिए 20 कैदियों को ले जाने के दौरान दो कैदी कम पाए गए, तब जाकर जेल प्रशासन में हड़कंप मचा।
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को बंदियों के जेल से भागने के बाद जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फरार बंदी शिवा उर्फ डिंपी बैरक नंबर-8 और अंकित बैरक नंबर-10 में निरुद्ध था। जेल सूत्रों के अनुसार, अंकित पहले कैंपस क्षेत्र में पहुंचा और वहीं से शिवा को साथ लेकर जेल की दीवार लांघ कर भाग गए। दोनों ने दो कंबलों को फाड़कर रस्सी उसी समय बनाई या फिर पहले से बनाकर कहीं छिपाकर रखी थी, ये बात अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। जिस स्थान से फरारी हुई, वहां शिवा रविवार को कृषि कार्य में लगाया गया था।
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को बंदियों के जेल से भागने के बाद जांच के लिए आते अफसर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आशंका है कि इसी दौरान उसने जेल की सुरक्षा व्यवस्था और कमजोर बिंदुओं को भांप लिया था। फरारी के समय घना कोहरा भी था, जिससे निगरानी और प्रभावित हुई। शासन इस मामले में जेलर, डिप्टी जेलर समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर चुका है।
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माइक लेकर गाना गाते जेल अधीक्षक भीमसेन मुकुंद
- फोटो : amar ujala
मन की बात में तारीफ के बाद मन की करने लगे थे जेल अधीक्षक
कन्नौज जिला कारागार से दो विचाराधीन बंदियों के भागने के बाद जेल अधीक्षक की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। फतेहगढ़ जेल में पुराने कंबलों से काऊ कोट बनाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी तारीफ मन की बात में की थी। इसके बाद तो वह जेल में अपने मन की करने लगे थे। कन्नौज में स्थानांतरण होने के बाद यहां भी उन्होंने अपने मन की दिखाई तो बंदियों व जेल कर्मियों में असंतोष व्याप्त हो गया।
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जेल की चहारदीवारी के किनारे खाली वॉच टॉवर
- फोटो : amar ujala
जिला जेल के अधीक्षक भीमसेन मुकंद का कार्यकाल लगातार विवादों में रहा है। भीमसेन मुकंद के सेवाकाल में कई ऐसे मौके आए जब उन पर गंभीर आरोप लगे या वह विवादों में घिरे रहे। वर्ष 1998-99 में जब वे मथुरा जिला कारागार में जेलर के पद पर तैनात थे, तब नवीन निर्माण के दौरान प्राचीन काल की मूर्तियां गायब होने का आरोप लगा।
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जिला कारागार में कंबलों की रस्सी देखते गुरसहायगंज कोतवाल अजय अवस्थी
- फोटो : amar ujala
इस मामले में सीबीआई जांच भी हुई थी, हालांकि बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी। मऊ से जिला जेल फतेहगढ़ भेजे जाने पर, उनके जेल अधीक्षक रहते छुट्टी न देने के कारण जेल वार्डर की मौत हो गई थी। इस घटना पर कैदियों और स्टाफ ने जमकर हंगामा किया था। फतेहगढ़ से भी उन्हें धन उगाही के चलते कैदी से मारपीट के मामले में हटाकर कन्नौज भेजा गया।
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जिला कारागार का निरीक्षण करते डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री व एसपी विनोद कुमार
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बंदियों के फरार होने की घटना के बाद जेल अधीक्षक पर गाज गिरना तय है। जिलाधिकारी ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। वहीं, शासन से नियुक्त किए गए जांच अधिकारी कानपुर परिक्षेत्र के डीआईजी प्रदीप गुप्ता ने भी अधीक्षक की लापरवाही की बात मानी है। डीएम जिले का पदेन डीआईजी जेल होता है, इसलिए उनकी रिपोर्ट को कार्रवाई के लिए अहम माना जा रहा है।
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फरार बंदी अंकित और शिवा उर्फ डिंपी
- फोटो : amar ujala
दोनों अफसरों ने माना है कि जेल में बंदियों की निगरानी में लापरवाही हो रही थी। कोतवाली प्रभारी अजय अवस्थी ने बताया कि भागने करने वाले अंकित व डंपी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
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कारागार परिसर में नए साल की पार्टी में शामिल लोग
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जेल अधीक्षक ने दी सफाई
जेल अधीक्षक भीमसेन मुकंद ने सफाई देते हुए कहा है कि सुबह 9.35 बजे बिजली चली जाने के कारण कैमरे बंद थे। उन्होंने दावा किया कि दोनों कैदी 9.22 बजे तक कैमरे में दिखाई दे रहे थे। जेल परिसर में लगे 50 कैमरों में से 49 क्रियाशील हैं, लेकिन अधिक कैमरों के कारण इन्वर्टर से बिजली कटौती के दौरान वह काम नहीं कर पाते हैं। उनके ऊपर जितने भी आरोप लगे हैं, सभी जांच में क्लीन चिट मिली है। जेल में सुधारों के लिए भी उनका नाम लिया जाता है। फतेहगढ़ जेल के भोजन को आईएसओ व एफएसएसएआई प्रमाण पत्र दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही है।
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जिला कारागार में जश्न के दौरान नाच रहा बंदी रक्षक
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बंदियों को पकड़ने के लिए लगाई गईं पांच टीमें
पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि जेल से भागे बंदी अंकित व शिवा की धरपकड़ के लिए पांच टीमों को लगाया गया है। इनमें ठठिया थानाध्यक्ष देवेश कुमार, तालग्राम थानाध्यक्ष ध्यानेंद्र प्रताप सिंह, गुरसहायगंज कोतवाल अजय अवस्थी, एसओजी प्रभारी जयप्रकाश शर्मा व सर्विलांस प्रभारी त्रदीप सिंह की टीम को लगाया गया है। कई स्थानों पर दबिश दी जा रही है और सीसीटीवी कैमरों की मदद ली जा रही है।
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जेल से भागा अंकित
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सोमवार सुबह का सीसीटीवी टाइमलाइन
सुबह 9:22 बजे : दोनों बंदी कैमरों में दिख रहे थे।
सुबह 9:35 बजे : बिजली जाने के बाद कैमरे बंद हो गए।
सुबह 10:00 बजे: पहली गिनती में किसी ने ध्यान नहीं दिया।
सुबह 10:15: दूसरी गिनती में दो बंदी कम मिलने पर हड़कंप।
जेल से भागा शिवा ऊर्फ डिंपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सीसीटीवी फुटेज से स्पष्ट है कि दोनों बंदी सोमवार सुबह तक जेल में थे। बिजली बाधित होने और कोहरे के कारण निगरानी प्रभावित हुई। पूरे घटनाक्रम की समयवार जांच कराई जा रही है और किसी भी स्तर की लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।- भीमसेन मुकुंद, जेल अधीक्षक