एक समय देश की शान रहीं कानपुर की मिलों के बंद होने के बाद शहर एक बार फिर से वैश्विक पटल पर अपनी छाप बना रहा है। कानपुर अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों का न केवल हब बनकर उभरा है, बल्कि अब तक के इतिहास में सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार देने का जरिया भी बना है। वर्तमान में 32703 इकाइयों में 2,03687 श्रमिक-कर्मचारी काम कर रहे हैं।
वहीं, जल्द ही रमईपुर मेगा लेदर क्लस्टर की नींव पड़ने के बाद एक लाख से ज्यादा लोगों को और प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिल सकेगा। दादानगर में फ्लैटेड इंडस्ट्री शुरू होने से भी हजारों लोगों को काम मिलेगा। स्वदेशी, एल्गिन, लालइमली जैसी मिलों के बंद होने के बाद सरकार की ओर एमएसएमई इकाइयों को लगातार प्रोत्साहित किया गया। शहर अब एमएसएमई का बड़ा केंद्र है। दादानगर, पनकी, फजलगंज, रूमा, चौबेपुर बड़े औद्योगिक हब बन चुके हैं।