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आयकर अधिकारी की मौत का मामला: नहीं रुक रहे मां के आंसू, बोली- हमारी तो दुनिया ही उजड़ गई

Sun, 25 Sep 2022 09:16 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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मृतक की मां और भाई - फोटो : अमर उजाला
एक बार भी हमसे नहीं बोला हमार बेटा। भइया हमते बात किए बगैर चले गे। ठीक हुई जाते तो अहमदाबाद न भिजतेन। हीं कुछ करि के कमा-खा लेत। हे भगवान हमार तो किस्मत फूटि गए...। यह बोलते हुए विमलेश की बुजुर्ग मां रामदुलारी दहाड़ें मारकर रो पड़ीं। कहा, सारी उम्र परिवार की परवरिश में लगा दी। जब आराम करने का समय आया तो भगवान ने यह दिन दिखा दिया। हमारी तो दुनिया ही उजड़ गई। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार मनोरोगी नहीं है, वे तो अपने बेटे का देखभाल कर रहे थे। 

अब कौन संभालेगा बच्चों को 
मां ने बताया कि विमलेश की पत्नी मिताली सवारी से बैंक ड्यूटी करने जाती थी। उसकी परेशानियों को देखते हुए बेटे ने मिताली के लिए एक स्कूटी खरीदी थी। पिछले साल 19 अप्रैल को जब विमलेश बीमार हुआ था तो मिताली ने बैंक जाना बंद कर दिया था।
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income tax officer dead body - फोटो : अमर उजाला
करीब छह माह तक काम पर नहीं गई, लेकिन नवंबर से नियमित बैंक जाने लगी। शुक्रवार को भी मिताली बैंक गई थी। डॉक्टरों की टीम जब पुलिस के साथ घर पहुंची तो रामऔतार ने मिताली को सूचना दी। उधर मिताली भी पति के शव से लिपटकर खूब रोई। कहा अब बच्चों को कौन संभालेगा। आपकी मासूम बेटी तो आपका प्यार भी न पा सकी। 
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पत्नी मिताली के साथ विमलेश (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
बीमारी के पहले हुआ था प्रमोशन 
परिजनों ने बताया कि वर्ष 2021 में ही विमलेश का प्रमोशन हुआ था। उन्हें क्या पता था कि प्रमोशन के साथ ही उसकी मौत भी आएगी। 

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मृतक का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
ससुराल से नहीं कोई संपर्क 
मां रामदुलारी ने बताया कि विमलेश के ससुराल में न ससुर हैं न ही साला। केवल सास है। शादी के बाद से न तो मिताली वहां गई न ही ससुराल से कोई यहां आया। सर्वोदय नगर मेें विमलेश की सुसराल है। उसकी मौत की खबर के बाद भी कोई नहीं आया। 
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income tax officer dead body - फोटो : अमर उजाला
एक दिन जरूर ठीक होगा मेरा विमलेश
पिता रामऔतार ने बताया कि पूरे परिवार को विश्वास था कि विमलेश जिंदा है, कोमा में चला गया है। एक दिन वह ठीक होकर उठ खड़ा होगा। प्रतिदिन उसकी मां राम दुलारी उसके सिरहाने बैठकर निहारती, साफ सफाई करती। गंगाजल मुंह में डालती थी। राम दुलारी ने बताया कि उसका बेटा भले कुछ खा-पी नहीं रहा था, लेकिन उसकी धड़कनें चल रहीं थीं। परिवार वाले यही बात मोहल्ले वालों और रिश्तेदारों को भी बताते थे। छोटे बच्चे भी विमलेश के शव तक जाते थे, उसे छूते थे।
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