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Income Tax Raid: 11 करोड़ के चंदे ने अफसरों को भी हैरत में डाला, कहीं काला धन खपाने को तो नहीं दिया चंदा

Thu, 08 Sep 2022 10:16 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
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Income tax raid - फोटो : अमर उजाला
कानपुर में जनराज्य पार्टी को तीन साल में मिले 11 करोड़ के चंदे ने अफसरों को भी हैरत में डाल दिया है। क्योंकि पार्टी न तो ज्यादा प्रचारित है और न ही चुनावी गतिविधियों में हिस्सा लेती है। ऐसे में आयकर विभाग ने चंदा मिलने के स्रोतों की जांच शुरू कर दी है। आशंका है कि मनी लांड्रिंग, काले धन को खपाने के साथ ही आयकर में छूट पाने के लिए पार्टी को चंदा दिया गया है। अब पार्टी के संस्थापक रविशंकर यादव और राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक कृष्णा के परिजनों के भी खातों की जांच की जा रही है। जनराज्य पार्टी के बारे में क्षेत्रीय लोगों तक को जानकारी नहीं है। इसके बाद भी पार्टी को चंदा मिलता रहा है। विदेशी फंडिंग, काला धन के रूट डायवर्जन बिंदु पर भी जांच की जा रही है। 
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Income tax raid - फोटो : अमर उजाला
देखा जा रहा है कि चंदे के जरिये काली रकम को आयकर छूट के तहत सफेद तो नहीं किया गया है। बैंक खातों में लेन-देन मिलने पर ऐसे लोग भी जांच के दायरे में आ जाएंगे, जिन्होंने पार्टी को चंदा दिया है। पार्टी की सदस्यता, इसके शुल्क, सदस्यों की सूची भी जुटाई जा रही है।
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Income tax raid - फोटो : अमर उजाला
छूट मिलने के चलते बढ़ा चंदा 
राजनीतिक दलों को आयकर अधिनियम की धारा 13ए के तहत दान पर पूर्ण आयकर छूट मिलती है। वहीं दानदाताओं को आयकर अधिनियम की धारा 80 जीजीवी और 80 जीजीसी के तहत दान की गई राशि पर कटौती मिलती है। इसके चलते पार्टी चंदा जुटाने में लगी है।

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Income tax raid - फोटो : अमर उजाला
पूरे देश में 2100 से ज्यादा दलों पर कार्रवाई 
सूत्रों ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की जांच कराई थी। जांच के बाद नियमों का उल्लंघन करने में 2100 से अधिक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई की है। जांच में पाया गया कि अधिकतर दल अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं।

 
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इनकम टैक्स का छापा - फोटो : अमर उजाला
ऑडिट रिपोर्ट में भी गड़बड़
सूत्रों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2018-2019 के लिए मेसर्स टी रंजन एंड कंपनी ऑडिट फर्म थी, जबकि अगले दो वर्षों के लिए ऑडिटर मेसर्स राज निरंजन एसोसिएट्स थे। आडिट रिपोर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट सोसाइटी के नियमों के अनुसार ठीक नहीं थी। रिपोर्ट में गड़बड़ी भी मिली है। 2019 के बाद ऑडिट रिपोर्ट में सीएस का यूनीक आईडेंटीफिकेशन नंबर शामिल नहीं था, जबकि यह अनिवार्य है।
 
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