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किडनी ट्रांसप्लांट: दिल्ली, गाजियाबाद के अलावा इन जिलों के नर्सिंगहोम में होता है ये काम; जांच में नए खुलासे

Tue, 07 Apr 2026 03:23 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, लखनऊ के नर्सिंगहोम में अवैध कार्य हो रहे हैं। किडनी ट्रांसप्लांट मामले के जांच अधिकारी ने पांचों जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजा है। कहा है कि स्वास्थ्य विभाग जांच कराए। कानपुर के सात नर्सिंगहोम रडार पर हैं। पुलिस नोटिस देने की तैयारी कर रही है।
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Kidney Racket - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
कानपुर के किडनी ट्रांसप्लांट मामले में जांच कर रही पुलिस को दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, लखनऊ के नर्सिंगहोम में अवैध कार्य होने की जानकारी मिली है। जांच अधिकारी ने वहां के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को पत्र भेजा है। इसमें उन्हें अपने स्तर पर जांच कराने और कुछ स्टाफ की जानकारी देने के लिए कहा गया है। शहर के सात नर्सिंगहोम भी रडार पर हैं। उन्हें मंगलवार को नोटिस भेजा जा सकता है।

कमिश्नरी पुलिस केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल और मसवानपुर के मेडीलाइफ हॉस्पिटल में हुए किडनी ट्रांसप्लांट में शामिल आरोपियों की तलाश कर रही है। अब तक आहूजा हॉस्पिटल के संचालक डॉ. सुरजीत आहूजा, डॉ. प्रीति आहूजा, शिवम अग्रवाल, राजेश कुमार, राम प्रकाश, नरेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार तोमर जेल भेजे गए हैं। 
 
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मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पारुल की जांच करते मैडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डॉ. वैभव, डॉ. रोहित, डॉ. अफजल, मुदस्सर अली सिद्दीकी, डॉ. अनुराग, नवीन पांडेय आदि की तलाश चल रही है। राजेश कुमार तोमर और कुलदीप सिंह राघव ने पूछताछ में मेडिलाइफ हॉस्पिटल, आहूजा हॉस्पिटल में आने वाले डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की जानकारी दी है। 

 
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Kidney Racket - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
पुलिस उनके घर और नर्सिंगहोम में गई थी। वहां अवैध गतिविधियां होने की जानकारी मिली थी। डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी के मुताबिक पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है। कुछ ऐसे केस सामने आए हैं जिसमें जांच स्वास्थ्य विभाग से कराई जाना जरूरी है। 

 

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किडनी ट्रांसप्लांट मामले में गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार - फोटो : पुलिस
उनके यहां के डॉक्टर, पैरामेडिकल, सर्जन आदि की डिटेल चाहिए। यह वाकई डॉक्टर हैं या सिर्फ नाम के हैं। पुलिस को उनके बारे में और जानकारी चाहिए। अब तक हुई जांच डॉक्टर बताने वाले आरोपी ओटी टेक्नीशियन निकले हैं। 

 
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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रावतपुर में दर्ज एफआईआर के जांच अधिकारी मुकेश कुमार की ओर से गाजियाबाद के दो, लखनऊ, मेरठ और दिल्ली के एक नर्सिंगहोम का नाम सामने आया है। यहां पर डॉ. रोहित, डॉ. वैभव, डॉ. अफजल, डॉ. भूपेंद्र, परवेज सैफी आदि की संलिप्तता मिली है।
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हैलट के सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल से किडनी के मरीज पारूल, आयुष को पीजीआई लखनऊ लेकर जाती एंबुलेंस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कई मरीजों की सर्जरी के बाद भर्ती किया
कल्याणपुर, रावतपुर, केशवपुरम के सात नर्सिंगहोम में कई मरीजों को सर्जरी के बाद भर्ती किया गया था। इसकी जानकारी किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े और जेल गए आरोपियों से मिली है। पुलिस के पास किसी भी ऑपरेशन के साक्ष्य नहीं बरामद हुए हैं। मरीजों और सर्जरी कराने वालों के रिकार्ड सामान्य से कागज पर लिखकर इलाज होता था। इन साक्ष्यों के लिए स्वास्थ्य विभाग से जानकारी मांगी गई है।
 
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आरोपी शिवम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, लखनऊ के नर्सिंगहोम की डिटेल जानने के लिए सीएमओ को पत्र भेजा गया है। उनसे अपने स्तर पर जांच कराने के लिए कहा गया है। शहर के सात निजी अस्पतालों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।- रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर कानपुर

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डॉ. प्रीति आहूजा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किडनी ट्रांसप्लांट ग्रुप से जुड़े रहे कई साइबर अपराधी
किडनी ट्रांसप्लांट ग्रुप से कई साइबर अपराधी और शातिर जुड़े थे। ये रुपये कमाने का लालच देकर युवाओं को छोटे टास्क दिया करते थे। बेगूसराय निवासी किडनी डोनर आयुष भी शुरू में उनके दिए टास्क पूरे कर रहा था। यह जानकारी पुलिस और साइबर क्राइम ब्रांच को टेलीग्राम के किडनी डोनर नामक ग्रुप से हुई है। पुलिस की धरपकड़ से अधिकतर साइबर अपराधी किनारे हो गए हैं। 

 

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उनकी तलाश में इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर का सहयोग लिया जा रहा है। किडनी ट्रांसप्लांट मामले के आरोपी डॉ. अफजल के साथ गाजियाबाद में लूट व डकैती से जेल गए सरफराज सैफी का नाम सामने आया है। 

 

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प्रिया हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आहूजा हॉस्पिटल के कर्मचारी शिवम अग्रवाल के मोबाइल में दोनों की रुपयों के साथ वीडियो मिली है। पुलिस को मोबाइल से 25 से अधिक वीडियो और फोटो बरामद हुई हैं। इनकी साइबर सेल और साइबर क्राइम ब्रांच जांच कर रही है। टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन की तलाश शुरू हो गई है। उसके लिए आईपी एड्रेस को देखा जा रहा है।

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मेड लाइफ हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी ने बताया कि किडनी डोनर ग्रुप में 700 से ज्यादा सदस्य थे। युवाओं को किडनी ट्रांसप्लांट के डोनर और रिसीवर खोजने के अलावा रुपये कमाने का लालच दिया जा रहा था। इसमें साइबर अपराधी भी शामिल थे। अब तक हुई जांच में 40 से अधिक म्यूल नंबर मिले हैं जिन्हें फर्जी तरीके से हासिल कर सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाया गया है। 

 

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आहूजा हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रुप में हवाला कारोबार से जुड़े आरोपी भी हो सकते हैं। यह मोटा पैसा लेकर केस खोजने का कार्य कर रहे थे। सोशल मीडिया पर किडनी ट्रांसप्लांट होने की सुविधा का मैसेज भी किया जा रहा था। पुलिस आरोपियों की जानकारी जुटा रही है।

 

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मान्या हॉस्पिटल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
महाराष्ट्र का मिला कनेक्शन
पुलिस को महाराष्ट्र के एक आरोपी का कनेक्शन मिल गया है। पुलिस इसकी तलाश में है। यह आरोपी वहां के बड़े अस्पताल से संपर्क रखे हुए था। कुछ मरीजों को दिल्ली और एनसीआर के अस्पतालों में भी भेजा गया था। पुलिस इस आरोपी की और जानकारी जुटा रही है।
 

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जांच के लिए पहुंची पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हैलट अस्पताल के गार्ड के नर्सिंगहोम में कर्मचारी थे रोहन और नरेंद्र
किडनी ट्रांसप्लांट प्रकरण की कड़ियां हैलट अस्पताल से जुड़ रही हैं। यहां के सिक्योरिटी गार्ड अजय वर्मा के केशवपुरम स्थित नर्सिंगहोम में करीब तीन साल पहले मेडिलाइफ हॉस्पिटल के संचालक रोहन और नरेंद्र कार्य कर रहे थे। पुलिस ने तीनों से पूछताछ कर सर्जन, पैरामेडिकल स्टाफ और ओटी टेक्नीशियन के बारे में जानकारी जुटाई। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन को जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया है।

 

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अस्पताल में मौजूद पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रावतपुर पुलिस को मसवानपुर स्थित मेडिलाइफ हॉस्पिटल में दिसंबर में एक महिला की किडनी ट्रांसप्लांट होने की जानकारी मिली। महिला की हालत बिगड़ने पर उसे दिल्ली के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल भेजा गया था। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक जांच में सामने आया है कि नर्सिंगहोम रोहन, नरेंद्र और संदीप संचालित कर रहे थे। 

 
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kanpur kidney scam - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस ने रोहन और नरेंद्र को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पता चला कि 2023 से पहले दोनों केशवपुरम स्थित स्टार हॉस्पिटल में कार्य कर रहे थे। स्टार हॉस्पिटल को हैलट अस्पताल का सिक्योरिटी गार्ड अजय वर्मा संचालित कर रहा था। उसे मृतक आश्रित कोटे में नौकरी मिली है। स्टाफ हॉस्पिटल के बंद हो जाने के बाद रोहन और नरेंद्र ने मेडीलाइफ हॉस्पिटल का संचालन शुरू कर दिया।
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