गंगा में मिलने वाली सभी छोटी नदियों को बचाने के लिए आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ वृहद स्तर पर काम करेंगे। यूरोप के वैज्ञानिक और उनकी तकनीक की मदद भी ली जाएगी। इसके अलावा भारत सरकार ने इस विशेष प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए संस्थान में सेंटर फॉर गंगा रिवर बेसिन मैनेजमेंट एंड स्टडीज के लिए मंजूरी दे दी है।
आईआईटी के वैज्ञानिक प्रो. विनोद तारे गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए पिछले कई वर्षों से काम कर रहे हैं। उनके सुझाव पर ही केंद्र सरकार ने आईआईटी कानपुर में सेंटर फॉर गंगा रिवर बेसिन मैनेजमेंट एंड स्टडीज को मंजूरी दी है। इस प्रोजेक्ट के तहत आईआईटी के वैज्ञानिक और सरकार से जुड़े अफसर मिलकर गंगा में मिलने वाली नदियों, नालों और उसके स्वरूप पर अध्ययन करेंगे। इसपर छात्रों को शोध भी कराया जाएगा और उनके लिए यह अलग विषय होगा।
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प्रो. तारे ने बताया कि इसके जरिए विलुप्त हो रहीं नदियों को भी संरक्षित करने का काम किया जाएगा। नदियों के बदलते रास्ते और कम होते जल स्तर पर भी शोध किया जाएगा। आईआईटी प्रशासन ने इसपर यूरोप के विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करने का फैसला लिया है। इसके लिए अलग से प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का नाम इंडो-यूरोप पार्टनरशिप (आईईडब्ल्यूपी) दिया गया है।
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शनिवार को इसके लिए आईआईटी की तरफ से प्रो. विनोद तारे ने नई दिल्ली में समझौते पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत यूरोप के वैज्ञानिक छोटी नदियों और नालों के अध्ययन के लिए अपनी तकनीक भारत को देंगे। उनके वैज्ञानिक भी यहां आकर छोटी नदियों को साफ व स्वच्छ करने में मदद देंगे।
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तैयार होगी नई बिल्डिंग और लैब
सरकार से केंद्र बनाने की मंजूरी मिलते ही निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने डिप्टी डायरेक्टर प्रो. मणिंद्र अग्रवाल की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया है। इसमें डीन रिसर्च डेवलपमेंट, चेयरमैन ग्रीन सेल, डीन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड प्लानिंग, प्रो. विनोद तारे, प्रो. एसएन त्रिपाठी, प्रो. सैकत चक्रवर्ती, प्रो. आरके वर्मा और आर गर्ग को सदस्य बनाया गया है। यह कमेटी सेंटर के जरिए कैंपस में जगह खोजने के साथ बिल्डिंग स्ट्रक्चर और पूरा प्लान तैयार करेगी। सेंटर में ही लैब का भी निर्माण होगा जो विभिन्न स्तर पर नदियों पर शोध के काम आएगी।
पीएचडी कोर्स भी शुरू करने की तैयारी
गंगा रिवर बेसिन पर आईआईटी प्रशासन एक स्पेशल पीएचडी कोर्स भी लांच करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए जल्द ही एक प्रस्ताव पहले सीनेट में रखा जाएगा और फिर बोर्ड ऑफ गवर्नेंस में। दोनों से मंजूरी मिलने के बाद इसे नए सत्र से शुरू करने की योजना है।