फर्रुखाबाद के गांव करथिया निवासी शातिर सुभाष बाथम व उसकी पत्नी रूबी की मौत के बाद मासूम बेटी गौरी अनाथ हो गई। उसका पालन-पोषण कोतवाली की सिपाही रजनी शंखवार कर रही हैं। वह सिपाही की दो बेटियों के साथ ही खाती-खेलती है और उसे बेटी का प्यार भी मिल रहा है।
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आईजी मोहित अग्रवाल की गोद में गौरी
- फोटो : अमर उजाला
इसके बावजूद रजनी को गौरी के भविष्य की चिंता है। उन्हें तीन बच्चों के पालन पोषण में दिक्कत हो रही है। मोहम्मदाबाद कोतवाली की सिपाही रजनी शंखवार की दो बेटियां श्रष्टि व लवी हैं। शातिर सुभाष व उनकी पत्नी रूबी की मौत के बाद से उसकी बेटी गौरी की भी देखरेख कर रही हैं।
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आईजी ने गौरी को लिया है गोद
- फोटो : अमर उजाला
रजनी का कहना है कि वह गौरी को तीसरी बेटी की तरह पाल रही हैं। इन दिनों उन पर ड्यूटी में सख्ती नहीं की जाती। इससे वह घर पर भी समय दे लेतीं हैं। गौरी को पालने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों तक गौरी को अपने पास रखने को तैयार हैं।
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सिपाही सीमा के बच्चों के साथ घूमने जाती गौरी
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि आईजी ने जिस तरह गौरी के भविष्य की कल्पना की है, उसके हिसाब से उसे किसी अच्छे परिवार में रहना होगा। हर कोई बच्चा अपने बच्चे के समान होता है। वह उसे शौक से पाल रही हैं। गौरी के भरण-पोषण को उन्हें 10 हजार रुपये भी दिए गए। इसके बावजूद गौरी के भविष्य को लेकर उन्हें चिंता है। तीन बच्चों को पालने में थोड़ी दिक्कत होती है। वह चाहती हैं कि कोई अच्छा परिवार गौरी को गोद ले ले।
पुलिस अधीक्षक डा.अनिल मिश्र ने कहा कि आईजी ने गौरी के पालन-पोषण के लिए सिपाही रजनी को 10 हजार रुपये दिए हैं। आगे भी मदद की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति गौरी को गोद लेने का इच्छुक होगा तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत दे दिया जाएगा।