कानपुर में गुरुवार को आसपास के आसमान में बादलों का डेरा, रिमझिम, ओले तो कहीं तेज बारिश की फुहारों ने जहां मौसम को खुशनुमा बना दिया तो वहीं शाम को स्वर्ग का पुल कहे जाने वाले गगन में खिंचे इंद्रधनुष ने अनुपम छटा बिखेर दी। कानपुरियों को प्रकृति का सतरंगी नजारा देखने को मिला।
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कानपुर के किदवई नगर में ओले और बारिश का लुत्फ उठाती महिला
- फोटो : अर्पण मैथला, अमर उजाला, कानपुर
आसमान में बदली देख लोगों के चेहरे खिल उठे। देखते ही देखते तेज बारिश और ओलो गिरने लगे। उमस और गर्मी से बदहाल लोग मौसम में बड़ा बदलाव देख हैरान रह गए। कानपुर, उन्नाव और कानपुर देहात समेत कई जिलों में ओलों के साथ बारिश हुई है।
गुरुवार देर शाम से शुरू हुई बारिश को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि ये बारिश कई घंटों तक जारी रहेगी। मौसम जानकारों का कहना है कि आने वाले दो-तीन दिनों तक बादल छाये रहने की संभावना है। कानपुर के बिठूर, मारियानी, चौबेपुर, उदैतपुर गांव में ओलों और तेज बारिश के चलते किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं।
इंद्रधनुष के ये सात रंग हमेशा से लोगों को अपनी तरफ खींचते आए हैं। हम आपको बताते हैं, आखिर इंद्रधनुष बनता कैसे है और हर किसी को ये अलग-अलग जगहों पर कैसे दिखता है।
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कानपुर में ओलो और बारिश के बाद दिखा इंद्रधनुष
- फोटो : ओ पी वाधवानी, अमर उजाला, कानपुर
कई रंगों का है रूप
इंद्रधनुष को स्वर्ग का पुल कहा जाता है। इसे देवता एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के लिए करते हैं। इसे छटा को देवताओं की बैठक का घेरा भी बताया गया है। इस आकृति को प्रिज्म से देखने पर यह आभास होता है, कि सूर्य की रोशनी सात रंगों में बिखरी हुई है। दिन में सफेद दिखने वाली सूरज की रोशनी कई रंगों की होती है। यह रंगों का विशेष स्वरूप है। आसमान पर बनने वाला यह नजारा शुभ संयोग का संकेत भी माना गया है।
ऐसे बनती है आकृति
इंद्रधनुष बादल और बारिश के बीच की एक अनोखी क्रिया है। सूर्य की रोशनी जब बारिश की बूंदों से होकर गिरती है तो वह अलग रूप धारण कर लेती है। पानी की बूंद जब रोशनी की अंदरूनी दीवार से टकराती है और लौटती है, तभी किरणें मूल रंगों में बिखर जाती हैं। इसे साइंस की भाषा में विक्षेपण यानी रंगों का बिखराव कहते हैं। इंद्रधनुष बारिश की बूंदों के आकार पर निर्भर करता है। बूंदें बड़ी होंगी तो चटक सतरंगी इंद्रधनुष दिखेगा। बारिश के वक्त सूर्य जितना नीचे होगा, इंद्रधनुष की ऊंचाई उतनी ज्यादा होती है। पं. रामकिशोर मिश्रा के अनुसार इंद्रधनुष देखने के लिए एक खास संयोग बनता है। सात रंगों वाला इंद्रधनुष वाकई कुदरत का एक करिश्मा है। यह है इंद्रधनुष के रंगों का महत्व।
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कानपुर में ओलो की बरसात
- फोटो : ओ पी वाधवानी, अमर उजाला, कानपुर
रंगो का विशेष महत्व
नारंंगी रंग
आप भोर के समय और सूर्यास्त के समय देखते होंगे सूरज का रंग नारंगी होता है। बाद में सूरज धीरे-धीरे पूरे संसार में अपना प्रकाश फैला देता है। यह रंग आपको सिखाता है कि आप भी अपने जीवन को इसी रंग की तरह फैलाइए।
लाल रंग
इस रंग में वीरता और साहस का अहसास होता है इसलिए यह रंग शौर्यता का प्रतीक है। यह रंग शिक्षा देता है कि बगैर किसी बैर भाव के रहें और औपस में प्रेम करना सीखें।
बैंगनी रंग
इसे रॉयलिटी, लग्जरी औश्र वेल्थ का रंग माना जाता है। इसलिए इसे सबसे खास भी माना जाता है। इसे वॉयलेट रंग भी कहा जाता है। यह रंग हल्का शेड होता है।
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कानपुर में बारिश के साथ गिरे ओले
- फोटो : मोहन मिश्रा, अमर उजाला, कानपुर
जामुनी रंग
इंद्रधनुष में जामुनी रंग भी खास दिखता है। ये बहुत ही गहरा रंग है। ये रंग विराट बनने एहसास कराता है। इस रंग का साफ संकते हैं कि आप नेक कामों से दुनिया में अपना नाम रोशन करिए।
नीला रंग
इंद्रधनुष के साथ-साथ गगन और समुद्र तीनों में नीला रंग नीला होता है। नीला रंग ठंडाई का प्रतीक है। यह रंग हमें शांत, ईमानदार और जीवन में सरलता के साथ स्थिरता लाने का संकेत देता है। हर नियंत्रण पर अपने आप को काबू में रखने का संकेत देता है।
कानपुर में पीएसआईटी के पास इंध्रधनुष
- फोटो : ओ पी वाधवानी, अमर उजाला, कानपुर
हरा रंग
हरा रंग हरियाली का प्रतीक माना जाता है। इसे जीवन का सूचक भी माना जाता है। जीवन में धैर्य, उमंग और उत्साह का प्रतीक माना जाता है।
पीला रंग
इंद्रधनुष का पीला रंग चमकदार होता है। इसलिए इसे स्वच्छता का प्रतीक माना जाता है। यह सूर्य का रंग है जो प्रतीक है जीवन और रोशनी का। यह रंग पाठ पढ़ाता है स्पष्टता और जागरूकता का।