फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गंगा किनारे रंगों के समंदर में डूबे नजर आए कनपुरिए, हर ओर उड़ा अबीर-गुलाल छाया रहा खुमार

Tue, 26 Mar 2019 05:52 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 8
गंगामेला - फोटो : अमर उजाला
नगर में बड़े ही धूमधाम से गंगा मेला पर्व मनाया गया। लोगों ने एक दूसरे को अबीर -गुलाल लगाकर गले मिलकर बधाइयां दी। युवाओं ने भी जमकर मेले का लुत्फ उठाया। नगर में जमकर रंग चला और युवाओं की टोलियां निकली। वहीं चौराहों पर फिल्मी धुनों पर लोगों ने खूब मस्ती की। गंगा मेला आजादी के दिवानों की याद में पिछले 77 सालों से कानपुर में मनाया जाता रहा है।
विज्ञापन

2 of 8
गंगामेला - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को भी पूरे जोश के साथ कनपुरियों ने गंगा मेला के दिन खुद को रंगों में डुबो दिया। इस दौरान सभी रंगों में सराबोर नजर आए। हर ओर सिर्फ और सिर्फ लाल पीला हरा नीला काला रंग नजर आ रहा था। कई साल से गंगा मेला मनाने की चली आ रही इस परंपरा को हर बार निभाया जाता है। गंगा मेला के दिन यहां काफी रंग खेला जाता है।

 
विज्ञापन

3 of 8
गंगामेला - फोटो : अमर उजाला
इस दिन निकलने वाला रंग ठेला लोगों के आकर्षण का केंद्र होता है। दो बड़े बड़े भैसों पर ठेला लगाकर उसपर ड्रमों को रखा जाता है। फिर उसमे रंग भरा जाता है। रंगे पुते लोग सरसैया घाट पहुंचते हैं और गंगा स्नान करते हैं। यह परंपरा निरंतर चलती आ रही है।

 

4 of 8
गंगामेला - फोटो : अमर उजाला
जिस रास्ते से भी रंग का ठेला निकलता है उस रास्ते पर सिर्फ रंग ही रंग नजर आता है। ठेले पर रंग का जुलूस निकाला जाता है। यह जुलूस हटिया बाजार से शुरू होकर नयागंज, बिरहाना रोड, चौक सर्राफा सहित कानपुर के पुराने मोहल्ले से होते हुए रज्जन बाबू पार्क में खत्म होता है।


 
विज्ञापन

5 of 8
गंगामेला - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद सरसैया घाट पर शहर भर के लोग इकट्ठा होते हैं और एक-दूसरे को होली की बधाई देते हैं। इस दिन लोग कपड़ा फाड़ होली भी खेलते है। रंग खेलने वाले सभी लोग एक दूसरे के कपड़े फाड़ कर तारों पर टांग देते हैं। 

 
विज्ञापन

6 of 8
गंगामेला - फोटो : अमर उजाला
गंगा मेला की परंपरा अंग्रेजी हुकूमत की हार का प्रतीक भी है। वर्ष 1942 में इस मेले की नींव पड़ी थी। मेला संयोजक ज्ञानेंद्र विश्नोई बताते हैं कि कमेटी की स्थापना स्व. गुलाब चंद्र सेठ ने की थी।

 
विज्ञापन

7 of 8
गंगामेला - फोटो : अमर उजाला
हटिया तब नगर के बड़े व्यापारियों और क्रांतिकारियों का गढ़ हुआ करता था। इन्हीं क्रांतिकारियों की प्रेरणा से कुछ युवकों ने 1942 में होली के दिन तिरंगा फहरा दिया। युवकों ने घोड़े पर सवार एक अंग्रेज के धमकाने पर उसकी पिटाई कर दी।

 
विज्ञापन

8 of 8
गंगामेला - फोटो : अमर उजाला
इसकी गूंज अंग्रेज अफसरों तक पहुंची तो हटिया क्षेत्र को चारों ओर से घेर लिया गया। करीब दर्जन भर लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसकी जबरदस्त विरोध हुआ। हटिया समेत आसपास के सभी बाजार बंद हो गए। विरोध देख गिरफ्तार क्रांतिकारियों को आखिर अनुराधा नक्षत्र के दिन रिहा कर दिया गया। इसी खुशी में हटिया समेत पूरे शहर में जमकर होली खेली गई। रंगों का ठेला निकाला गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें