कानपुरः नौबस्ता में दंपति को बंधक बनाकर लूटपाट करने वाला पूर्व किराएदार अरवेंद्र रजक उर्फ बासू शातिर चोर निकला। उसने शास्त्री नगर में गन हाउस मालिक के घर समेत कई थाना क्षेत्रों में कीं 40 से ज्यादा चोरियां कबूलीं। पुलिस ने उसकी पत्नी और एक साथी समेत दो ज्वैलर्स को भी गिरफ्तार किया है।
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दो ज्वैलर्स समेत पांच गिरफ्तार, दो अन्य की तलाश
- फोटो : अमर उजाला
एसपी साउथ रवीना त्यागी ने नौबस्ता थाने में प्रेसवार्ता करके बताया कि 9 मई की रात अरवेंद्र ने पुराने विवाद में सबक सिखाने के लिए अपने तीन साथियों संग मिलकर राजीव नगर में वीरेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी को बंधक बनाकर लूटपाट की थी। उसके बाद से पुलिस उसकी तलाश में लगी थी। पुलिस टीम को मुख्य आरोपी अरवेंद्र के पत्नी और साथियों संग सैनिक चौराहे पर होने की जानकारी मिली।
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इसके बाद नौबस्ता इंस्पेक्टर संतोष कुमार सिंह ने टीम के साथ घेराबंदी करके आतरी, ग्वालियर निवासी अरवेंद्र, उसकी पत्नी पूजा उर्फ प्रीति, गोहद, भिंड (मध्यप्रदेश) निवासी उसके साथी मनोज और ज्वैलर्स नौबस्ता के सैनिक चौराहे के संजय वर्मा (बालाजी ज्वैलर्स) व चकेरी चिश्तीनगर के आकाश वर्मा (आकाश ज्वैलर्स) को धर दबोचा। पूछताछ की गई तो अरवेंद्र ने मनोज के साथ ग्वालियर के रामू और राजू के साथ घटना को अंजाम देने की बात कबूली। रामू और राजू की तलाश जारी है।
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नौबस्ता इंस्पेक्टर के अनुसार दोनों ज्वैलर्स चोरों से चोरी का माल खरीदते थे। पकड़े गए ज्वैलर्स से पूछताछ में ही पता चला कि अरवेंद्र तो चोरों का सरदार है। फिर उससे कड़ाई से पूछताछ की गई तो अरवेंद्र ने 25 फरवरी को शास्त्री नगर में गन हाउस मालिक गजेंद्र सिंह के घर समेत बर्रा, नौबस्ता, बिधनू और चकेरी थाना क्षेत्र में 40 से ज्यादा चोरी की घटनाओं को अंजाम देने की बात कबूली। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर गजेंद्र के घर से चोरी लाइसेंसी पिस्टल भी बरामद की। सोने-चांदी के दर्जनों जेवर, कैश, एक तमंचा, कारतूस भी बरामद किए। अरवेंद्र की पत्नी चोरी का माल ठिकाने लगाने में मदद करती थी। एसपी साउथ ने बताया कि पांचों के खिलाफ चोरी और माल बरामदगी की धाराओं में कार्रवाई की गई है।
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खुद को बताता था नेटवर्क कंपनी का कर्मचारी
अरवेंद्र खुद को नेटवर्क कंपनी का कर्मचारी बताकर कमरा किराए पर लेता था। रात में वह अच्छे कपड़े और लैपटॉप वाला बैग टांगकर निकलता था, ताकि किसी को शक न हो। बैग में चोरी में इस्तेमाल होने वाले औजार रहते थे। वह शहर में घूम-घूमकर बंद घरों को निशाना बनाता था। इतना ही नहीं, रात में पुलिस के रोकने-टोकने पर अपने पहनावे और बोलचाल से उन्हें भी भ्रमित कर देता था।
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किराएदारों के सत्यापन पर उठे सवाल
खुलासे ने एक बार फिर किराएदारों के सत्यापन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। न तो पुलिस सत्यापन के लिए जहमत उठाती है और न मकान मालिक सत्यापन कराते हैं। वारदात को अंजाम देने वाला मुख्य आरोपी अरवेंद्र मूलरूप से अतारी, ग्वालियर का रहने वाला है। वह करीब दो साल से शहर में अलग अलग जगहों पर किराए में रहकर चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था। इसके अलावा उसने ग्वालियर और भिंड के साथियों संग मिलकर वीरेंद्र के घर वारदात की। अगर किराएदारों के सत्यापन पर पुलिस को जोर होता तो शायद अरवेंद्र कब का पुलिस के हत्थे चढ़ जाता। वहीं, इस पर एसपी साउथ का कहना है कि जल्द ही किराएदारों के सत्यापन को लेकर अभियान शुरू किया जाएगा।