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स्मृति शेष: कल्याण का 72 किलो चांदी के सिक्के से हुआ था तुलादान, पूरा पैसा पार्टी कोष में कर दिया था दान

Sun, 22 Aug 2021 07:16 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
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कल्याण सिंह (1932 - 2021): हमीरपुर में फूलसिंह के आवास पर उनके सुपौत्र अनुभव को दुलारते कल्याण सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि में विवादित ढांचा ढहने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के जिला आगमन पर लोगों ने गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया था। मंदिर के लिए सीएम की कुर्सी दांव पर लगाकर वह आम जनता के इतने करीब आ गए थे कि पार्टी नेताओं ने जनता की मदद से 72 किलो चांदी के सिक्के से तुलादान किया था। उनके निधन से पूरे जिले में शोक की लहर है। भाजपा नेता व संघ के पूर्व जिला कार्यवाह सरस्वती शरण द्विवेदी ने बताया विवादित ढांचा ढहने के बाद कल्याण सिंह दिसंबर 1992 में जिले के राठ कस्बा आए थे। उनका स्वागत हजारों लोगों ने किया था। एसडीएम कोर्ट के पास मैदान में आयोजित सभा में उन्होंने कहा था कि भगवान श्रीराम के लिए कुर्सी ही नहीं जान भी न्यौछावर है। तब उनका 72 किलो चांदी के सिक्के से तुलादान किया गया था। उन्होंने सारे सिक्के पार्टी कोष में ही दान कर दिए थे।

 
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कल्याण सिंह (1932 - 2021): एक स्कूल के कार्यक्रम में शामिल कल्याण (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
बताया पूर्व विधायक ओंकार नाथ दुबे ने सुमेरपुर कस्बे में एक महिला की दोबारा नसबंदी किए जाने के मामले में आंदोलन किया तो पुलिस के लाठीचार्ज में घायल हुए थे। इस घटना की जानकारी होते ही कल्याण सिंह ने आकर हुंकार भरी थी।

 
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कल्याण सिंह (1932 - 2021): हमीरपुर में एक कार्यक्रम में शामिल कल्याण (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण सिंह दादा ने कहा कल्याण सिंह कार्यकर्ताओं की बहुत सुनते थे। उन्हें पद का जरा भी घमंड नहीं था। राठ कस्बा और स्वामीजी के बरहरा गांव वह कई बार आए थे। स्वामीजी के प्रति बड़ी आस्था होने से उन्होंने मौदहा बांध का नाम स्वामी ब्रह्मानंद रखा था। 

 

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कल्याण सिंह (1932 - 2021): हमीरपुर में एक सम्मान समारोह में शामिल कल्याण (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
मानवती कांड में भरी थी हुंकार
मायावती सरकार में चरखारी के विधायक उदय प्रकाश पर एक महिला से अभद्रता का आरोप था। इस मामले में पूर्व विधायक बादशाह सिंह ने बड़ा आंदोलन किया था। तब तत्कालीन एसपी जवाहरलाल त्रिपाठी ने बादशाह सिंह को गिरफ्तार कर यातनाएं दीं थी। इसकी गूंज फैलने पर उमा भारती आईं और मानवती लोधी को दिल्ली लिए जा रही थी, तभी पुलिस ने घेराबंदी कर रोक लिया था। उस समय डीएम उमा वर्मा और एसपी में टकराव भी हो गया था। इस घटना को लेकर कल्याण सिंह आए थे और पुलिस व सरकार को खुली चुनौती दी थी। 

 
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हमीरपुर में भाजपा लोकसभा प्रत्याशी सुरेन्द्र सिंह के चुनाव कार्यालय का उद्धघाटन करते कल्याण (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
दस्यु बलराम खंगार गैंग का कराया था खात्मा
कल्याण सिंह के शासनकाल में बुंदेलखंड क्षेत्र में कई दस्यु पर बड़ी कार्रवाई हुई थी। दस्यु बलराम खंगार गैंग ने आठ लोगों की सामूहिक हत्या कर दी थी। तब कल्याण सिंह ने न सिर्फ तत्कालीन एक आईपीएस सुरेश चंद्र धुसिया को सस्पेंड किया था, बल्कि कई अफसरों पर कार्रवाई भी की थी। सामूहिक नरसंहार को अंजाम देने वाले पूरे गैंग का पंद्रह दिन में ही सफाया कर दिया गया था। उस समय कल्याण सिंह के निर्देश पर तत्कालीन राजस्व मंत्री राजनाथ सिंह और तत्कालीन डीजीपी श्रीराम अरुण आए थे।
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