कन्नौज के छिबरामऊ में शुक्रवार की रात हुए बस हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की जान चली गई। परिवार जयपुर जाने के लिए निकला था। जिसमें तीन बच्चे पति और पत्नी बस में सवार थे। रात को बस में आग लगने की खबर जब घर पहुंची तो चीखपुकार मच गई। आननफानन में परिजन मौके पर पहुंचे। इसके बाद परिजन घटनास्थल से अस्पताल और अस्पताल से घटनास्थल के बीच दौड़ते रहे लेकिन कोई नहीं मिला। पता चला कि कई लोग बस में जिंदा जलकर राख हो गए हैं। इसके बाद परिजन गश खाकर मौके पर ही गिर पड़े।
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तीन घंटे धूं धूं कर जली थी बस
- फोटो : अमर उजाला
कन्नौज के छिबरामऊ में शुक्रवार की रात हुए बस हादसे की सूचना पर परिजन गांव वालों के साथ रात में ही घटनास्थल पहुंच गए। खोजबीन की तो बताया गया कि लईक, उनकी पत्नी शायदा व तीनों बच्चे अस्पताल में भर्ती नहीं हैं। लगता है कि बस में ही जलकर राख हो गए। यह सुनते ही परिजन स्तब्ध रह गए। लईक की बहनें व भतीजी का रो-रोकर बेसुध हो रहीं थीं। शनिवार सुबह आस-पास गांव के लोग भी लईक के घर पहुंच रहे थे। हिंदू हों या मुस्लिम, पूरा गांव रात भर जागता रहा।
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बस में एक के बाद एक तीन धमाके हुए थे
- फोटो : अमर उजाला
कमालगंज थाना क्षेत्र के गांव उगरापुर निवासी मोहम्मद लईक (45) पुत्र मो. उमर शुक्रवार शाम करीब 4.30 बजे अपने परिवार के साथ जयपुर जाने के लिए रजीपुर पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी शायदा बेगम (42), पुत्री शादिया (11), पुत्र शान अहमद (9) व शैफ अहमद (7) भी थे। फर्रुखाबाद से चलकर 5 बजे रजीपुर पहुंचने वाली प्राइवेट बस 6 बजे पहुंची थी। बस में लईक सपरिवार बैठ गए। गांव के ही छम्मीलाल वर्मा(30) पुत्र रामौतार भी जयपुर जाने के लिए 8 वर्षीय पुत्र सौरभ राजपूत के साथ बस में सवार हुए थे। बस गुरसहायगंज की ओर चली गई।
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कन्नौज बस हादसे की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
रात साढ़े आठ बजे छम्मीलाल ने अपने घर फोन कर जानकारी दी कि छिबरामऊ के पास ट्रक की टक्कर लगने से बस में आग लग गई है। लईक परिवार के साथ जलती हुई बस में ही हैं। छम्मीलाल के परिजनों ने लईक के घर जाकर उनके भाई रहीश अहमद को जानकारी दी। रहीश अपने पुत्र अदनान व ग्रामीणों के साथ तीन गाड़ियों से रात में ही घटनास्थल पहुंचे। वहां पहुंचे तो बस जल रही थी। वहां लोगों ने बताया कि घायल छिबरामऊ के सरकारी अस्पताल में गए हैं। इस पर सभी अस्पताल पहुंचे। वहां उन्हें छम्मीलाल मिले, लेकिन लईक व उनकी पत्नी, बच्चे नहीं मिले।
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कन्नौज बस हादसे में सब जलकर राख हो गया
- फोटो : अमर उजाला
छम्मीलाल ने बताया कि वह पुत्र के साथ नीचे सीट पर बैठे थे। लईक परिवार के साथ ऊपर स्लीपर में बैठे थे। आग लगने के बाद उन्होंने लईक व परिजनों को निकलते नहीं देखा। लईक के परिजन व गांव वाले अस्पताल से फिर घटनास्थल पहुंचे। इस दौरान वे घर वालों को बराबर फोन पर दिलासा देते रहे। रात में दो बजे ग्रामीण छम्मीलाल के पुत्र सौरभ को साथ लेकर गांव गए। लईक के परिजन शनिवार सुबह 6 बजे खोजबीन के बाद घर आ गए। रात भर रोते बिलखते घर वाले सुबह सभी के सलामत लौटने के इंतजार में थे।
कन्नौज बस हादसे में खत्म हो गया एक पूरा परिवार
- फोटो : अमर उजाला
घटनास्थल से लौटे परिजनों के साथ लईक, उनकी पत्नी व बच्चों को न देख घर वाले बुरी तरह रोने लगे। बड़ी बहन रहीशा बेगम, छोटी बहन याशमीन बेगम, भतीजी सानिया, भांजी इरम व अन्य परिजन फूट फूट कर रो रहे थे। लईक के भतीजे अदनान ने बताया कि हम लोगों ने काफी देर चाचा, चाची व भाई, बहनों की खोजबीन की, लेकिन उनकी राख भी नहीं मिली। आशंका है कि वह सभी जलती बस से बाहर नहीं निकल सके। लईक जयपुर में रहकर एक गैराज में वाहनों पर पेंटिंग का काम करते थे। छम्मीलाल वहां सिलाई का काम करते थे।