कार्डियोलॉजी अस्पताल के आईसीसीयू में रविवार सुबह लगी आग के पीछे अस्पताल प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। शासन की तीन सदस्यीय कमेटी की जांच में इस पर मुहर लगी है। जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने पुष्टि हुई है। कमेटी ने शासन को रिपोर्ट भी सौंप दी है। जिम्मेदारों पर कार्रवाई होने के साथ कुछ अहम बदलाव के भी निर्देश दिए गए हैं। जल्द कार्रवाई शुरू होगी।
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कानपुर: कार्डियोलॉजी अग्निकांड
- फोटो : अमर उजाला
कार्डियोलॉजी के आईसीसीयू में बने स्टोर रूम में आग लगी थी। पुलिस और दमकल के जवानों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर करीब 140 मरीजों को बाहर निकाला था। उनके साथ तीमारदार भी थे। हालांकि इस दौरान चार मरीजों की मौत हो गई थी। किसी की भी मौत आग से नहीं हुई थी।
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मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच कमेटी में कमिश्नर डॉ. राजशेखर, आईएएस आलोक कुमार और डीजी फायर आरके विश्वकर्मा शामिल थे। कमेटी ने जो जांच रिपोर्ट सौंपी है, उसमें बताया कि आईसीसीयू के भीतर स्टोर रूम बना था। वहां रखे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में शॉर्ट सर्किट हुआ। इस वजह से आग लगी और पूरा आईसीसीयू चपेट में आ गया। कार्डियोलॉजी प्रशासन की लापरवाही है कि वहां पर स्टोर रूम बनाया गया था।
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कुछ अहम बदलाव करने की सिफारिश
कमेटी ने कुछ अहम बदलाव करने की सिफारिश की है। इसमें आईसीसीयू से स्टोर रूम हटाने, कार्डियोलॉजी के स्ट्रक्चर में बदलाव करने को कहा है। ताकि आपात स्थिति में रेस्क्यू आसानी से किया जा सके। खिड़कियों को पूरी तरह खुलने व बंद होने वाली लगाने के निर्देश दिए गए हैं। एसी के वेंटिलेशन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। वहीं मरीजों की संख्या अधिक होने पर सवाल उठाते हुए भविष्य में ऐसा न करने की सिफारिश की गई है।
दमकल जवानों की सराहना
दमकल और पुलिस के जवानों ने तीन मंजिल तक शीशे तोड़कर मरीजों को बाहर निकाला। डीजी फायर आरके विश्वकर्मा ने बताया कि ये बेहद कठिन ऑपरेशन था लेकिन जवानों ने सफलता पूर्वक इसे अंजाम दिया। इस तरह का ये पहला ऑपरेशन रहा है। उन्होंने कानपुर फायर सर्विस के जवानों की सराहना भी की।