फतेहपुर तिहरे हत्याकांड में फरार पांचवां आरोपी भी गिरफ्तार हो गया है। आरोपी ज्ञान सिंह बसंतपुर के पास से पकड़ा गया है। ज्ञान सिंह से तमंचा और कारतूस बरामद हुए हैं। मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। अब हत्याकांड की असल वजह सामने आई है।
फतेहपुर के हथगाम थाना इलाके में हुए तिहरे हत्याकांड में फरार ज्ञान सिंह उर्फ विपुल सिंह भदौरिया को पुलिस ने गुरुवार सुबह बसंतपुर के पास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के पास से हत्याकांड में प्रयुक्त तमंचा व दो कारतूस, व दो खोखे बरामद किए गए हैं। ज्ञान की बहन मुकुन को पुलिस ने दबाव बनाने के लिए बुधवार को पकड़ा था। इसके बाद उसकी गिरफ्तार हुई है। पुलिस ने ज्ञान को जेल भेज दिया है। अब मामले में नामजद विवेक पासवान बचा है। बताया जा रहा है कि तहिरापुर गांव का विवेक मुख्य आरोपी मुन्नू सिंह के काफी नजदीकी हैं। वह मुन्नू सिंह के लिए हर काम करता था। वह सात भाई हैं।
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दरवाजे पर बैठे गमगीन परिजन व अन्य
- फोटो : संवाद
घटनास्थल पर थानाध्यक्ष निकेत भरद्वाज शाम करीब चार बजे पहुंचे। घटनास्थल का नक्शा तैयार किया। प्रत्यक्षदर्शी डेयरी संचालक किशोर व अन्य गांव वालों से पूछताछ कर विवेचना के क्रम को बढ़ाया है। गांव में पुलिस व पीएसी बल तैनात है। पीड़ित व आरोपियों के घरों के बाहर फोर्स सुरक्षा को लेकर भी अलर्ट रहा। खेत पर गेहूं कटाई में ग्रामीण जुटे रहे। हालांकि गांव का माहौल तनावपूर्ण है। थानाध्यक्ष निकेत भरद्वाज ने बताया कि फरार विवेक की तलाश में टीमें दबिश दे रही हैं। जल्द ही उसे भी पकड़ा जाएगा।
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आरोपी ज्ञान सिंह
- फोटो : अमर उजाला
भाई के तिलक में आया था ज्ञान सिंह
ज्ञान बाहर रहता है। उसकी भांजी साक्षी हाथ जोड़कर पीड़ित परिवार के घर बुधवार को माफी मांगने पहुंची थी। वह बोली थी मामा ज्ञान बेकसूर हैं। बताया जा रहा है कि ज्ञान सिंह पांच अप्रैल को अपने भाई के तिलक समारोह में आया था। चर्चा रही कि उसे गांवदारी की रंजिश में फंसाया गया है।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : संवाद
मुन्नू के लहूलुहान होने के बाद फायरिंग
उधर, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मुन्नू सिंह के घर पर 14 अप्रैल को बरमभोज का आयोजन होना था। आयोजन के लिए ट्रैक्टर में चक्की से आटे की बोरियां उठाने मुन्नू सिंह का पुत्र पीयूष जा रहा था। इसी दौरान पप्पू सिंह दरवाजे पर खड़ा था। उसे घूरकर देखने के बाद गाली गलौज कर पीयूष ने ट्रैक्टर बढ़ा दिया। पप्पू ने पैदल ही लाठी लेकर पीछा किया। ट्रैक्टर घूरकर देखने के बाद गाली गलौज फिर हो गई घटना रुकवा लिया। इस दौरान पीयूष के फोन पर मुन्नू सिंह समेत अन्य पहुंचे। इधर, पप्पू का पुत्र अभय बाइक व भाई अनूप पैदल दौड़कर पहुंचे। मारपीट के दौरान मुन्नू सिंह के सिर पर लाठी से हमला हुआ। हमले में मुन्नू सिंह घायल होकर गिर पड़ा। उसके गिरते ही पप्पू सिंह पक्ष पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई।
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Fatehpur Triple Murder
- फोटो : amar ujala
अवैध कमाई की जांच की धमकी अखरती थी
अखरी गांव की प्रधानी के 20 साल का कार्यकाल मुन्नू सिंह के हाथों में रहा। कार्यकाल में मुन्नू सिंह ने क्षेत्र में कोई विकास कार्य नहीं किया। आरोप है कि विकास कार्यों के रुपये की हेराफेरी कर खुद की संपत्ति तैयार की। पप्पू सिंह अपनी मां रामदुलारी के प्रधान बनने के बाद अक्सर मुन्नू सिंह के 20 साल के कार्यकाल में कराए विकास कार्यों की जांच कराने की धमकी देता था। यह बात मुन्नू सिंह को अखरती रहती थी।
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Fatehpur Triple Murder
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दोनों पहले टिकैत गुट में थे
मुन्नू सिंह व पप्पू सिंह पहले एक साथ टिकैत गुट के लिए काम करते थे। जिले के ही एक बड़े किसान नेता के पास दोनों के विवाद सामने जाते थे। वह पक्षों के बीच समझौता कराते थे। चर्चा है कि वह भी अंदरखाने से मुन्नू सिंह को ही पसंद करते थे। यह बात पप्पू सिंह को अच्छी नहीं लगती थी। उसे लगता था सही या हो गलत हमेशा जीत मुन्नू सिंह की होती है।
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Fatehpur Triple Murder
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साढ़े ग्यारह साल बाद तिहरा हत्याकांड
साढ़े ग्यारह साल बाद जिले में तिहरे हत्याकांड की पुनरावृत्ति हुई। मंगलवार सुबह महिला प्रधान के दो बेटे और एक पौत्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे पहले 28 अगस्त 2013 को जमीन के विवाद में पिता-पुत्र और सगे भाई की लाठी-डंडों से पीटकर हत्या कर दी गई थी। गाजीपुर थाना क्षेत्र के बरुहा गांव में 28 अगस्त की सुबह एक परिवार के रामशिरोमणि यादव, उसके बेटे दिनेश यादव और भाई रामखेलावन यादव की हत्या कर दी गई थी।
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Fatehpur Triple Murder
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इस वारदात में 10 लोग नामजद हुए थे, जिनमें विवेचना के दौरान एक को मुकदमे से बाहर कर दिया गया था। इस वारदात के 11 साल सात महीना 10 दिन बाद मंगलवार को जिला एक बार फिर तिहरे हत्याकांड से थर्रा उठा। सुबह करीब 8:30 बजे हथगाम ब्लॉक के गांव अखरी प्रधान रामदुलारी सिंह पत्नी स्व. लालबहादुर सिंह के बेटे पप्पू सिंह, उनका बेटा अभय प्रताप सिंह और भाई अनूप की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
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खौफ इतना कि कोई गवाही भी नहीं देता, 40 साल पहले गोली मारकर की थी पहली हत्या
पूर्व प्रधान मुन्नू सिंह के हाथों पहली हत्या 1988 में गांव के रामराज सिंह की हुई थी। ग्रामीणों के जेहन में इस वारदात को देखने के बाद 40 साल पहले के रामराज हत्याकांड की याद ताजा हो गई। अखरी गांव का निवासी रामराज सिंह अविवाहित था। ग्रामीणों ने बताया कि जमीन के विवाद में हत्या कर मुन्नू पहली बार जेल गया था। वह करीब छह से सात माह में ही जेल से छूटकर आ गया था। इसके बाद गांव के लोग उससे डरने लगे थे। अक्सर मारपीट करता था। हत्याकांड के मामले में उसके दबाव में गवाह आ गए थे। वह गवाही देने में डर गए। हत्याकांड में कोई कार्रवाई नहीं होने से मुन्नू सिंह की दहशत गांव में और बढ़ गई थी।
दो दशक के जंगलराज से पप्पू ने दिलाई थी मुक्ति
फतेहपुर के अखरी गांव और चार मजरों के ग्रामीणों को करीब 20 साल बाद मुन्नू सिंह के जंगलराज से मुक्ति मिली थी। उसके 20 साल की प्रधानी के काम के आगे पप्पू की मां का चार साल का कार्यकाल भारी था। करीब एक साल पहले पप्पू ने ग्रामीणों की अन्ना मवेशियों की समस्या को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया था। सैकड़ों अन्ना मवेशियों को ब्लॉक में बंद करने के बाद पप्पू सिंह चर्चा में आ गए थे। अखरी ग्राम पंचायत में करीब 25 साल पहले मुन्नू सिंह की पत्नी ममता प्रधान चुनी गई थीं। ममता के बाद हरिजन सीट पर चुनाव हुआ। इसके बाद मुन्नू खुद प्रधान चुना गया। मुन्नू का बेटा और छोटी बहू भी प्रधान रह चुके हैं। इस तरह चार प्रधानी के कार्यकाल मुन्नू सिंह के परिवार में ही रहा।
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पूर्व प्रधान पर पुलिस भी रही मेहरबान
फतेहपुर में हुए तिहरे हत्याकांड के बाद भारी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। उनकी जुबानी के अनुसार, पूर्व प्रधान मुन्नू पर पुलिस भी मेहरबान रहती है। मुन्नू सिंह परिवार को एक स्थानीय नेता का संरक्षण प्राप्त है। वह नेता मुन्नू के घर भी शुभ कार्यक्रमों में आते-जाते हैं। गांव के विश्वनाथ ने बताया कि उसका बेटा नीरज एक साल पहले घर आ रहा था। रास्ते में उस पर मुन्नू सिंह ने गोली चलाई थी। किसी तरह जान बचाकर बेटा घर आ गया था। उसने थाने में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने दवाव बनाकर समझौता करा दिया था। उसके बेटे पर हमला सिर्फ पप्पू सिंह के साथ रहने की वजह से किया गया था। गांव के बुजुर्ग रवि ने बताया कि मुन्नू के पड़ोस में उनके खेत हैं। खेत पर मवेशी जाने की बात पर उन्हें मुन्नू और उनके बेटों ने कई बार लाठी डंडे से पीटा। उनके खिलाफ कोई सुनवाई नहीं करता है। इसी वजह से कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
चुनावी रंजिश में प्रधान के दो पुत्रों व एक पौत्र की गोली मारकर हत्या
यूपी के फतेहपुर जिले में तिहरे हत्याकांड से सनसनी फैल गई। हथगाम थाना क्षेत्र के अखरी गांव में यह वारदात मंगलवार को हुई। ग्राम प्रधान के दो बेटों और पौत्र की मंगलवार सुबह खेत जाते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या प्रधानी चुनाव की रंजिश में हुई है। आरोप है कि पूर्व प्रधान ने अपने बेटे और अन्य साथियों के साथ घात लगाकर वारदात को अंजाम दिया। मृतकों में एक भाकियू टिकैत गुट का जिला उपाध्यक्ष था।