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मिलिए महाभारत में 'समय' को आवाज देने वाले लोकप्रिय 'अदृश्य' किरदार से

Sun, 17 Dec 2017 08:34 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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महाभारत टीवी सीरियल के वाइस ओवर आर्टिस्ट
टीवी के सबसे लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत में  'मैं समय हूं' की आवाज शहरों से लेकर गांव-गांव तक पहुंचाने वाले 'अदृश्य किरदार' के बारे में शायद कम लोग ही जानते होंगे। समय की आवाज से ब्रह्माण्ड में घूमते चक्के को कुंती पुत्र अर्जुन के प्रश्नों तक ले जाने वाले वाइस ओवर आर्टिस्ट के जीवन में हिंदी भाषा का क्या महत्व है आज हम आपको यही बताने जा रहे हैं।  
   
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हरीश भिमानी
साल 1988 में बीआर चोपड़ा की 'महाभारत' में समय को अपनी आवाज़ देने वाले इस कलाकार का नाम है हरीश भिमानी। 15 फरवरी 1956 को मुंबई में जन्मे हरीश पेशेवर वाइस ओवर आर्टिस्ट हैं। उनकी आवाज तमाम टीवी सीरियल और फिल्मों में काफी लोकप्रिय हुई है। हरीश ने धारावाहिक महाभारत (बी.आर.चोपड़ा कृत) में सूत्रधार 'समय' को आवाज दी और देश में सर्वाधिक पहचाने जाने वाली आवाज बन गए। इन्हें २२००० से अधिक रिकॉर्डिंग करने का अनुभव प्राप्त हुआ है। 1980 के दशक के बाद से इन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों और समारोहों की मेजबानी के अलावा कई वृत्तचित्रों, कॉर्पोरेट फिल्मों, फीचर फिल्मों, टीवी और रेडियो विज्ञापनों, खेल, संगीत एलबम में अपनी आवाज दी। मीडिया ने हरीश भीमनी को 'भारत के सबसे मान्यता प्राप्त आवाज़ों में से एक' और 'ए राइटर विद ए ज़िंग' के रूप में वर्णित किया है।  साल 2016 में मराठी डॉक्यू-फीचर 'माला लाज वाटत नाही' जिसका हिंदी में अर्थ है 'मुझे शर्म नहीं आती' में सर्वश्रेष्ठ वोइस ओवर के लिए हरीश को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 
   
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हरीश भिमानी
हरीश भिमानी शनिवार को यूपी के इटावा जिले में एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे। छोटे पर्दे के प्रख्यात सीरियल महाभारत में मैं समय हूं की आवाज से पहचाने जाने वाले बॉलीवुड कलाकार हरीश भिमानी का कहना है कि सबसे अधिक हिंदी का प्रचार बॉलीवुड ने किया है। उन्होंने कहा अब किताबें पढ़ी नहीं सुनी जाएंगी। उनका सबसे ज्यादा पसंदीदा कार्यक्रम महामृत्युंजय मंत्र है। भिमानी 21 देशों में 140 इवेंट कर चुके हैं। वह इटावा में हिंदी सेवा निधि के कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। उन्होंने कई कार्यक्रमों में अपनी आवाज दी है। लेकिन सबसे ज्यादा प्रसद्धि महाभारत सीरियल से मिली। उन्होंने कहा कि अब हर क्षेत्र में काफी बदलाव है। अब किताबें सुनी जा सकती हैं।  
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हरीश भिमानी
बॉलीवुड में ज्यादातर हिंदी के चलन के सवाल पर उन्होंने कहा जो 70 साल में अब तक राष्ट्र भाषा प्रचार समिति सब्सिडी व अन्य सुविधाओं के बाद भी नहीं कर सका, वो काम जाने अनजाने में ही बॉलीवुड ने हिंदी को लेकर कर दिया। बॉलीवुड में अन्य आंचलिक भाषाओं के साथ-साथ हिंदी को इतना प्रसिद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि हिंदी और बॉलीवुड एक दूसरे के पूरक कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।उन्होंने कहा गीतों में धुन का ही महत्व है। जिस मामले में देश में दो नाम प्रसिद्ध है एक साहिर लुधियानवी और दूसरे प्रसिद्ध गीतकार गोपालदास नीरज है। नीरज इटावा के ही हैं। ये सौभाग्य की बात है।
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