इटावा में उदी-चकरनगर मार्ग पर दर्दनाक हादसा होने के दो कारण रहे। एक तो डीसीएम की रफ्तार तेज थी दूसरे सड़क किनारे मोड़ दर्शाने वाला बोर्ड नहीं लगा था। बोर्ड न होने से चालक नहीं समझ पाया कि आगे मोड़ है। एकाएक मोड़ आने से चालक ने नियंत्रण खो दिया, जिससे 12 लोगों की जान चली गई और 52 लोग घायल हो गए।
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इटावा सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला
उदी-चकर नगर मार्ग पर मिहोली गांव के मोड़ पर हादसा हुआ। वहां पर रोड करीब 30 फीट चौड़ा है। इसी मोड़ से कालका मंदिर को रास्ता जाता है। सड़क पर मोड़ दर्शाने वाला बोर्ड नहीं लगा है। चालक तेज डीसीएम चला रहा था। गति तेज होने की वजह से वह डीसीएम को मंदिर के रास्ते की तरफ मोड़ नहीं सका।
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इटावा सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला
इससे मोड़ पर डीसीएम बेकाबू हो गई। आगे सड़क के किनारे पिलर लगा था। डीसीएम पिलर न टकराए इसलिए चालक ने स्टेयरिंग काट दी। इससे डीसीएम पिलर के साइड से टकराते हुए 30 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में डीसीएम चालक कालीचरन भी घायल हुआ है। एसएसपी ने बताय कि प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह पिलर होना सामने आई है। होश में आने पर चालक से पूछताछ की जाएगी। फिलहाल मृतकों के परिजनों की तरफ से रिपोर्ट दर्ज कर चालक पर कार्रवाई की जाएगी।
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इटावा सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला
कई थानों का फोर्स व ग्रामीण मदद को पहुंचे
हादसे की सूचना पाकर बढ़पुरा के साथ ही कोतवाली, चकरनगर व भरे थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गया। इन थानाक्षेत्रों के साथ कई गांव के लोग भी हादसा स्थल पर पहुंच गए। लोगों की जान बचाने के लिए गांव वाले 30 फीट गहरी खाई में कूद गए। ग्रामीणों ने पुलिस के साथ मिलकर घायलों को खंदी से बाहर निकाला। घायलों में कई ने जान बचाए जाने पर ग्रामीणों के साथ ही पुलिसकर्मियों का शुक्रिया अदा किया।
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अस्पताल में भर्ती घायल
- फोटो : अमर उजाला
डीसीएम पर 20 महिलाओं समेत 75 लोग सवार थे
डीसीएम पर जानवरों की तरह लोग भरे थे। पुलिस की मानें तो डीसीएम पर 75 लोग सवार थे। इनमें 20 महिलाओं के साथ कई बच्चे भी थे। माल ढोने वाली डीसीएम पर सवारियां ढोई जा रही थीं। यह आगरा से लेकर इटावा तक किसी भी पुलिस या संभागीय परिवहन विभाग के अफसर को दिखाई नहीं दिया।
इटावा हादसा: मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
- फोटो : अमर उजाला
अगर रास्ते में कोई अफसर डीसीएम को पकड़ लेता तो शायद 12 लोगों की जान बच जाती। उधर, मुंडन संस्कार में शरीक होने जा रही डीसीएम पर सवार बच्चों व महिलाओं को खंदी से निकालने में पुलिस के साथ ही ग्रामीणों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। महिलाओं और बच्चों को खंदी में लोगों ने बहुत संभाल कर निकाला। ताकि किसी को कोई दिक्कत न हो। साथ ही आरोप प्रत्यारोप भी न लग सकें।