यूपी के पुखरायां में इन दिनाे खाैंफ का छाया हुअा है। दिनदहाड़े लाेग अपने बच्चाें काे घराें में छुपाकर रखते हैं। रात हाेते ही यहां सन्नाटा फैल जाता है। इसकी वजह है पानी की कमी के चलते जंगली जानवरों के झुंड अब प्यास बुझाने के लिए गांवों की ओर रुख कर दिया है।
विज्ञापन
2 of 5
डेमो पिक
सूरज की तपन अभी से अपने पूरे शबाब पर है। सुबह 10 बजते ही तपन का दौर शुरू हो जाता है। इसका प्रभाव शाम 4 बजे तक रहता है। किसान महेंद्र सिंह, सोबरनलाल, देवेंद्र, जयबिहारी, भूपेंद्र पाल, सियादुलारी, भागवती सिंह, दयाशंकर आदि ने बताया कि नदी, बंबों में पानी नहीं है। प्यासे जंगली जानवर शाम होते ही भटकने लगे हैं। सियारों का झुंड तो गांवों में खुलेआम घुस जाता है।
विज्ञापन
3 of 5
डेमो पिक
जहां कहीं गांव की नालियों में थोड़ा बहुत पानी मिलता है, उसको पीने लगते हैं। शाम हाेते ही यहां अासपास के गांवाें में सन्नाटा फैल जाता है। लाेग बच्चाें के साथ अपने घराें के अंदर छुपने के लिए मजबूर हैं। यहां लाेगाें के बीच डर फैल गया है कि किसी भी समय वह बच्चों पर हमला कर सकते हैं।
4 of 5
डेमो पिक
खेतों में भोरपहर और रात में कई लोगों को एक साथ लाठी आदि लेकर जाना पड़ता है। खेतों में जानवर भटकते हुए दिख जाते हैं। बताया कि हाइवे पार करने में वाहनों से टकराकर और रेलवे लाइन पर जंगली जानवर मरे पड़े मिलते हैं।
भोगनीपुर के एसडीएम राजीव पांडेय ने बताया कि आदमी, जानवर, पशु पक्षी को पानी पिलाना एक नेक काम है। अप्रैल, मई, जून में और हालात खराब हो सकते हैं। जिनके पास नलकूप, सबमर्सिबल हैंडपंप है वह भी सहयोग कर सकते हैं। नलकूप के पास की नाली और कुंड़ी भरी रखे, खेतों में कहीं गड्डे हों उनको पानी से भरा रखें। गांव के बाहर सूखी पड़ी नालियों और गड्डाें में पानी भरवा दें।