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दीपावली विशेषः शुभ मुहूर्त से लेकर पूजन, अन्नकूट महोत्सव और भैय्या दूज के बारे में सब कुछ

Wed, 07 Nov 2018 02:23 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंसेज (रजि.) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश चिंतक  ने बताया कि दिवाली मूलत: यमराज का पर्व है। 5 दिन का यह यम पर्व कहलाता है। मृत्यु पर विजय प्राप्त करने के लिए देव और असुरों ने समुद्र मंथन किया था। उसमें 14 रत्न निकले। जिसमें विष और अमृत, रंभा और महालक्ष्मी का प्रादुर्भाव हुआ।
 
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धनतेरस, नरक चतुर्दशी के बाद तीसरे दिन का पर्व दीपावली है। इसमें प्रदोष काल में दीप और महालक्ष्मी की पूजन का विधान है। इसमें बसना पूजन, संस्थान में पूजन और घर में पूजन विशेष रूप से होता है। दीपावली का मुहूर्त दोपहर 12 बजे के बाद से रात 7:32 बजे तक ही है। कारण है कि इसके बाद विशाखा नक्षत्र लग जाएगा।
 
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पद्मेश इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंसेज के संस्थापक पंडित केए दुबे पद्मेश ने बताया कि इस बार प्रदोष काल शाम 5:14 से रात 7:50 बजे तक है। इसमें ही शाम 5:41 से रात 7:37 बजे के मध्य वृष लग्न रहेगा। इस काल खंड में गणेश-लक्ष्मी, कुबेर और इंद्र का पूजन करते हैं।

 

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पांचवां दीपक यमराज के लिए निकालते हैं और यह पांचों दीपक घी के ही प्रज्ज्वलित किए जाते हैं। चौघड़िया मुहूर्त के अनुसार शाम 6:51 बजे से रात 11:42 बजे तक शुभ, अमृत चर की चौघड़िया रहेगी।
 
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पूजन के लिए यह कालखंड भी उत्तम है। जो लोग साधक हैं उन्हें महानिशीथकाल में पूजन करना होता है। इस बार रात 12:04 से 12:24 बजे तक महानिशीथकाल है। सिंह लग्न में पूजन का समय रात 12:09 से रात 2:23 बजे तक रहेगा।
 
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अन्नकूट महोत्सव
दीपावली के अगले दिन गुरुवार को गोवर्धन पूजा की जाती है। इस पूजा की परंपरा श्रीकृष्ण के समय से हो रही है। इस दिन सुबह गाय के गोबर से घर के आंगन में गोवर्धन पर्वत बनाया जाता है। इसके बाद उसे फूल-पत्तों से सजाया जाता है।
 
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कहीं-कहीं पर इंद्र और वरुण की भी पूजा की जाती है और कहीं पकवानों का पहाड़ बनाकर उसके बीच में श्रीकृष्ण की मूर्ति रख कर पूजा की जाती है। बृज में इसे मानवाकार रूप में बनाया जाता है। कुछ स्थानों में इसे पर्वताकार रूप में मनाते हैं।
 

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भाई दूज
दीपावली के दो दिन बाद शुक्रवार को 9 नवंबर को भाई दूज है। इस दिन बहनें भाइयों के माथे पर टीका करती हैं और इसके बाद उन्हें मिष्ठान खिलाती हैं।

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यम द्वितीया के दिन यम की बहन यमुना नदी में स्नान करने से साल भर अकाल मृत्यु की भय से यमराज मुक्त करते हैं।
 
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आज ही के दिन अपने भाई के दीर्घायु होने के लिए उसके माथे पर टीका करते हैं और यमराज से प्रार्थना करते हैं कि मेरे भाई के घर अकाल मृत्यु न हो ऐसा हमारे ग्रंथों में उल्लेख है।
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