भगवान जी... मेरी क्या गलती थी, अभी तो मैं दुनिया को समझ भी न पाई थी। उम्र के महज तीसरे साल में ऐसी घिनौनी तस्वीर देखने को मिली कि अब आपसे प्रार्थना है कि अगले जन्म में मुझे बेटी बनाकर न भेजना। कुछ इन्हीं तरह के सवालों को लेकर तीन साल की लाडो ने दुनिया से विदाई ली।
बिटिया ने भगवान से जरूर पूछा होगा कि मैंने तो केवल तीन साल ही बिताए थे। मंमी-पापा के साथ अभी तक तो मैं ठीक से घुलमिल भी न पाई थी और आपने मुझे अपने पास बुला लिया। जिस असहनीय दर्द से मैं गुजरी हूं न भगवान जी, अब आपसे यही प्रार्थना है कि किसी और बेटी के साथ ऐसा न होने देना।
इस घिनौने कृत्य के बाद मैं चार घंटे तक बेसुध लहूलुहान अवस्था में पड़ी रही थी। दिमाग में डर और शरीर की चोटों का असहनीय दर्द जो मैंने सहा है, ऐसा किसी भी बेटी के साथ न हो। इलाज के दौरान धीरे-धीरे मेरी सांसें मुझे अलविदा कहती जा रही थीं, पहले आंत, फिर गुर्दे और फिर एक-एक करके अंग काम करना बंद कर रहे थे।