चंबल के बिहड़ों से देश की संसद तक का सफर तय करने वाली महिला जो कभी खूंखार डकैतों में शुमार होती थी आज उनकी पुण्यतिथि है। एक ऐसा नाम जिसकी मर्जी के बिना बीहड़ का पत्ता भी नहीं हिलता था लेकिन समय ने कुछ ऐसी करवट ली कि 'बैंडिट क्वीन' फूलन देवी देश की संसद तक पहुंचीं। जानिए फूलन देवी से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें साथ ही देखिए 'बैंडिट क्वीन' की दुर्लभ तस्वीरें...
विज्ञापन
2 of 12
बैंडिट क्वीन फूलन देवी
'बैंडिट क्वीन' फूलन देवी के नाम की इतनी दहशत थी कि बड़े-बड़े लोगों की रूह कांपने लगती थी। कहा जाता था कि वह बहुत कठोर दिल वाली थी। हालांकि इसके पीछे बहुत बड़ा कारण था। जानकारों की मानें तो फूलन को हालात ने इतना कठोर बना दिया कि उन्होंने बहमई में सामूहिक हत्याकांड को अंजाम दिया। फूलन ने एक साथ लाइन में खड़ा कर 22 ठाकुरों की हत्या कर दी और उन्हें इसका जरा भी अफसोस नहीं हुआ। इस औरत ने अपनी छोटी सी जिंदगी में तमाम दुख झेले। यही वजह थी यूपी (जालौन) के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाली ये औरत केवल भारत ही नहीं विदेश में भी चर्चित हो गई।
विज्ञापन
3 of 12
बैंडिट क्वीन फूलन देवी
जुर्म की दुनिया छाेड़कर राजनीति में आई फूलन को लाेगाें ने संसद तक पहुंचाया।चंबल के बीहड़ों से संसद पहुंचने वाली फूलन देवी पर ब्रिटेन में आउटलॉ नाम की एक किताब प्रकाशित हुई है जिसमें उनके जीवन के कई पहलुओं पर चर्चा की गई है। फूलन देवी को मिली जेल की सजा के बारे में पढ़ने के लिए लेखक रॉय मॉक्सहैम ने 1992 में उनसे पत्राचार शुरू किया। जब फूलन देवी ने उनके पत्र का जवाब नहीं दिया तो रॉय मॉक्सहैम भारत आए और उन्हें फूलन देवी को करीब से जानने का मौका मिला।
4 of 12
बैंडिट क्वीन फूलन देवी
फूलन देवी का जन्म उत्तर प्रदेश के जालौन के पास बने एक गांव पूरवा में 10 अगस्त 1963 में हुआ था। इसी गांव से उसकी कहानी भी शुरू होती है। जहां वह अपने मां-बाप और बहनों के साथ रहती थी। कानपुर के पास स्थित इस गांव में फूलन के परिवार को मल्लाह होने के चलते ऊंची जातियों के लोग हेय दृष्टि से देखते थे। इनके साथ गुलामों जैसा बर्ताव किया जाता था।
विज्ञापन
5 of 12
बैंडिट क्वीन फूलन देवी
फूलन के पिता की सारी जमीन उनके सगे भाई ने झगड़ा करके जबरन बैनामा कराकर छीन ली थी। फूलन के पिता जो कुछ भी कमाते वो जमीन के झगड़े के चलते वकीलों की फीस में चला जाता। फूलन इसी तरह के दमघोंटू माहौल में पलती और बड़ी होती रही। उसके अंदर बदले की आग से जलने लगी। आग की इस जलन को सुलगाने में उसकी मां ने भी आग में घी का काम किया।
विज्ञापन
6 of 12
बैंडिट क्वीन फूलन देवी
जब फूलन 11 साल की हुई, तो उसके चचेरे भाई मायादिन ने उसको गांव से बाहर निकालने के लिए उसकी शादी पुत्ती लाल नाम के बूढ़े आदमी से करवा दी गई।फूलन के पति ने शादी के तुरंत बाद ही उसका रेप किया और उसे प्रताड़ित करने लगा। परेशान होकर फूलन पति का घर छोड़कर वापस मां-बाप के पास जाकर रहने लगी।गांव में ही फूलन ने अपने परिवार के साथ मजदूरी करना शुरू कर दिया। यहीं से लोगों को फूलन के विद्रोही स्वभाव के नजारे देखने को मिले।
विज्ञापन
7 of 12
बैंडिट क्वीन फूलन देवी
एक बार तो जब एक आदमी ने फूलन को मकान बनाने में की गई मजदूरी का मेहनताना देने से मना कर दिया, तो उसने रात को उस आदमी के मकान को ही कचरे के ढेर में बदल दिया।उस समय फूलन 15 साल की थी जब कुछ दबंगों ने घर में ही उसके मां-बाप के सामने उसके साथ गैंगरेप और अप्राकृतिक सेक्स किया। इसके बावजूद फूलन के तेवर कमजोर नहीं पड़े।
8 of 12
बैंडिट क्वीन फूलन देवी
उसके बाद गांव के दबंगों ने एक दस्यु गैंग को कहकर फूलन का अपहरण करवा दिया। बस यहीं से शुरू हुआ फूलन के डकैत बनने की कहानी और उसने 14 फरवरी 1981 को बेहमई गांव में 20 ठाकुरों को लाइन में खड़ा करके मारी गोली मार दी। इस घटना ने फूलन देवी का नाम बच्चे की ज़ुबान पर ला दिया था। फूलन देवी का कहना था उन्होंने ये हत्याएं रेप का बदला लेने के लिए की थीं।
9 of 12
बैंडिट क्वीन फूलन देवी
कहा जाता था कि फूलन देवी का निशाना बड़ा अचूक था और उससे भी ज्यादा कठोर था उनका दिल। उनके जीवन पर कई फिल्में भी बनीं लेकिन पुलिस का डर उन्हें हमेशा बना रहता था। साथ ही खासकर ठाकुरों से उनकी दुश्मनी थी इसलिए उन्हें अपनी जान का खतरा हमेशा महसूस होता था। चंबल के बीहड़ों में पुलिस और ठाकुरों से बचते-बचते शायद वह थक गईं थी इसलिए उन्होंने हथियार डालने का मन बना लिया।
10 of 12
बैंडिट क्वीन फूलन देवी
1994 में जेल से रिहा होने के बाद वह 1996 में सांसद चुनी गईं। समाजवादी पार्टी ने जब उन्हें लोक सभा का चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया तो काफी हो हल्ला हुआ कि एक डाकू को संसद में पहुंचाने का रास्ता दिखाया जा रहा है। वह दो बार लोकसभा के लिए चुनी गईं। लेकिन 2001 में केवल 38 साल की उम्र में दिल्ली में घर के सामने ही फूलन देवी की हत्या कर दी गई थी।
11 of 12
बैंडिट क्वीन फूलन देवी
खुद को राजपूत गौरव के लिए लड़ने वाला योद्धा बताने वाले शेर सिंह राणा ने फूलन की हत्या के बाद दावा किया था 1981 में मारे गए सवर्णों की हत्या का बदला लिया है। शेर सिंह राणा पर डकैत और सांसद फूलन देवी की हत्या का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक, शेर सिंह राणा पर जल्द ही एक फिल्म बनाई जाएगी जिसकी तैयारी भी की जा रही है।
बता दें कि शेर सिंह राणा फूलन देवी की हत्या के आरोप में 2001 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था जहां से वह 2004 में फरार हो गया। करीब 2 साल बाद 2006 में उसे कोलकाता के एक गेस्ट हाउस से गिरफ्तार किया गया। खबर यह भी कि अजय देवगन शेर सिंह राणा की बायोपिक में उसका किरदार निभाएंगे।