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Kusuma Nain Death: महिला डाकू ने 12 मल्लाहों को लाइन में खड़ा कर मारी थी गोली, गैंग में शामिल होने की कहानी

Mon, 03 Mar 2025 12:54 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, इटावा

सार

Kusuma Nain Daku News: 25 साल तक दहशत फैलाने वाली कुसुमा नाइन की मौत हो गई है। कुसुमा इतनी क्रूर थी कि वह जिनका अपहरण करती उनके बदन पर चूल्हे की जलती हुई लकड़ी लगा देती थी। जंजीरों से बांध कर हंटर से मारती थी।
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Kusuma Nain - फोटो : अमर उजाला
UP News In Hindi: चंबल के बीहड़ों में करीब 25 साल तक दहशत फैलाने वाली कुसुमा नाइन ने 1984 में औरैया के मई अस्ता गांव में 12 मल्लाहों को लाइन में खड़ा कर गोली मार दी थी। कुसुमा ने इसे फूलनदेवी के बेहमई कांड का प्रतिशोध बताया था। 

1964 में जालौन के टिकरी गांव में पैदा हुई कुसुमा नाइन को माधव मल्लाह से प्रेम हो गया था। वह उसके साथ चली भी गई थी। करीब दो साल तक उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद उसने पिता को चिट्ठी लिखी कि वह दिल्ली के मंगोलपुरी में माधव के साथ है। तब पिता दिल्ली पुलिस के साथ पहुंचे और उसे घर ले आए। पिता ने उसकी शादी कुरौली गांव निवासी केदार नाई के साथ कर दी। माधव कुसुमा से प्रेम करता था। 
 
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डकैत गिरोह (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
उसने यह बात रिश्तेदार डकैत विक्रम मल्लाह को बताई। विक्रम मल्लाह माधव को लेकर गैंग के साथियों के साथ कुसुमा की ससुराल पहुंचा। उसने कुसुमा को अगवा कर लिया। इसके बाद वह माधव के साथ विक्रम गैंग में शामिल हो गई। कुछ समय बाद फूलन देवी से अनबन के बाद डकैत राम आसरे तिवारी उर्फ फक्कड़ गैंग में शामिल हो गई थी। 
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शव आने के बाद कुरैली गांव में लगी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
1982 में फूलन ने किया था आत्मसमर्पण
1980 से उसने गैंग में अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी। 14 मई 1981 को डकैत फूलन ने 22 ठाकुरों को गोली मार दी थी। इस कांड के बाद डाकू फक्कड़ और उसकी माशूका बन चुकी कुसुमा अपनी दहशत बढ़ाने के लिए बेताब थे। इस बीच 1982 में फूलन ने आत्मसमर्पण कर दिया। 

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कुरैली गांव में बैठी महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद फक्कड़ और कुसुमा ने साल 1984 में औरैया के मई अस्ता गांव में पहुंचकर 12 मल्लाहों को लाइन से खड़ा कर गोली मार दी थी। इतना ही नहीं उनके घरों को आग लगा दी थी।
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कुसुमा के पति केदार के साथ खड़े दूसरी पत्नी कुंती के पुत्र - फोटो : अमर उजाला
इससे उसका आतंक बढ़ गया था। कुसुमा इतनी क्रूर थी कि वह जिनका अपहरण करती उनके बदन पर चूल्हे की जलती हुई लकड़ी लगा देती थी। जंजीरों से बांध कर हंटर से मारती थी।
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कुसुमा की मौत के बाद तैनात पुलिस - फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने छह माह पहले परिजनों को दी थी कुसुमा के बीमार होने की जानकारी 
इटावा जेल में बंद कुसुमा की तबीयत खराब होने पर उसे सैफई मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया था। इस पर उसने अपने परिजनों से मिलने की इच्छा जताई थी। सिरसाकलार थाने से रामजी के पास भी फोन आया था, लेकिन उन्होंने मिलने से मना कर दिया था। ज्यादा हालत खराब होने पर उसे लखनऊ भेज दिया गया था। 

 
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कुसुमा के पति केदार के साथ खड़े दूसरी पत्नी कुंती के पुत्र - फोटो : अमर उजाला
आठ साल डाकू विक्रम और सोलह साल फक्कड़ के साथ रही कुसुमा 
कुरौली गांव से अगुवा करके बीहड़ ले जाई गई कुसुमा सबसे पहले माधव के माध्यम से विक्रम मल्लाह गिरोह से मिल गई। इसके बाद वह करीब आठ वर्ष तक इस गिरोह में रही। विक्रम की मौत हो जाने के बाद वह लालाराम के संपर्क में आई और कुछ दिन के बाद वह रामआसरे उर्फ फक्कड़ के संपर्क में आ गई।  सोलह साल तक बीहड़ में राज करती रही। वह इटावा के साथ-साथ कानपुर व अन्य जेलों में भी रही। 
 
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डकैत गिरोह के सदस्यों के साथ कुसुमा (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
पेड़ काटने पर नाराज कुसुमा ने ग्रामीणों को पीटा था 
बदनपुरा निवासी गौरी (70) ने बताया कि क्वांरी नदी किनारे दोपहर में मैं, जय सिंह, मटयाले निवासी रामफल की गढ़िया बकरियां चराने गए हुए थे। इस बीच फकक्ड़ गैंग के लोग आ गए थे। डकैत नाइन सड़क किनारे बकरियों के लिए काटकर डाले गए पेड़ देखकर गुस्सा गई। उसने चारों लोगों को लाइन में खड़ा करके बेल्टों से पीटा था। 
 
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